LTCG और STT टैक्स में बदलाव पर अलग-अलग राय, सरकार के सामने तीन विकल्प; घट जाएगा रेवेन्यू

LTCG: विदेशी निवेशकों की घटती दिलचस्पी को रोकने के लिए LTCG टैक्स खत्म करने से लेकर दर घटाने तक के सुझाव दिए गए हैं. STT में भी कुछ सेगमेंट के लिए कटौती और कुछ में बढ़ोतरी की मांग है. वित्त मंत्रालय ने बाजार से जुड़े लोगों से इसपर राय मांगी है.

लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स Image Credit: Canva

LTCG: शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की घटती भागीदारी और लगातार हो रही बिकवाली के बीच लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बदलाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है. इस मुद्दे पर बाजार से जुड़े अलग-अलग पक्षों ने सरकार को कई सुझाव दिए हैं. इनमें LTCG टैक्स पूरी तरह खत्म करने, सिर्फ विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को इससे छूट देने या इसकी दर घटाने के विकल्प शामिल हैं.

सुने गए सुझाव

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने कैपिटल मार्केट से जुड़े वरिष्ठ लोगों के साथ बैठक कर उनके सुझाव सुने हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी निवेशकों की LTCG टैक्स से जुड़ी चिंताओं पर विचार करने की बात कह चुकी हैं. इन संभावित बदलावों का उद्देश्य विदेशी निवेशकों की बिकवाली को रोकना और भारतीय शेयर बाजार को उनके लिए आकर्षक बनाए रखना है.

LTCG टैक्स पर क्या हैं तीन विकल्प?

बाजार के प्रतिभागियों ने सरकार के सामने मुख्य रूप से तीन विकल्प रखे हैं.

  • LTCG टैक्स पूरी तरह खत्म करना: कई प्रतिभागियों ने इक्विटी निवेश पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स समाप्त करने का सुझाव दिया है.
  • सिर्फ FPI को छूट: एक सुझाव यह भी है कि LTCG टैक्स से केवल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को राहत दी जाए.
  • टैक्स की दर घटाना: सरकार मौजूदा LTCG टैक्स की दर में कमी करने पर भी विचार कर सकती है.

हालांकि, कुछ प्रतिभागियों ने सिर्फ विदेशी निवेशकों को टैक्स में विशेष छूट देने पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि इससे घरेलू निवेशकों के बीच असमानता को लेकर आलोचना हो सकती है.

STT में भी बदलाव के सुझाव

STT को लेकर बाजार के प्रतिभागियों ने अलग-अलग उत्पादों के लिए अलग-अलग सुझाव दिए हैं. ज्यादातर प्रतिभागियों का मानना है कि इक्विटी पर LTCG टैक्स खत्म किया जा सकता है. इसके साथ ही केवल ऑप्शन ट्रेडिंग पर STT में मामूली बढ़ोतरी करने का सुझाव दिया गया है. कैश और फ्यूचर सेगमेंट में STT को मौजूदा स्तर पर रखने की बात कही गई है.

इसके पीछे तर्क है कि रोजाना होने वाली ट्रेडिंग गतिविधियों में ऑप्शन सेगमेंट की बड़ी हिस्सेदारी है. साथ ही, रेगुलेटर्स भी अत्यधिक सट्टेबाजी को नियंत्रित करने के लिए इस सेगमेंट पर ध्यान दे रहे हैं.

सरकार को LTCG और STT से कितनी कमाई?

LTCG और STT में किसी भी तरह का बदलाव करने से सरकार के राजस्व पर असर पड़ सकता है. वित्त वर्ष 2024-25 में LTCG टैक्स से सरकार को 1.29 लाख करोड़ रुपये मिले थे. वहीं, STT से 57,522 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ था.

सरकार को टैक्स में राहत देने के साथ सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं और सब्सिडी के लिए फंडिंग पर पड़ने वाले असर को भी ध्यान में रखना होगा.

रुपये की कमजोरी से विदेशी निवेशकों की चिंता

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का कहना है कि एशिया के कई प्रतिस्पर्धी बाजारों में LTCG टैक्स नहीं लगता. ऐसे में भारत में इस टैक्स की मौजूदगी निवेश के लिहाज से उसे नुकसान की स्थिति में रखती है.

बाजार से जुड़े लोगों के मुताबिक, रुपये में गिरावट और कैपिटल गेन टैक्स के कारण विदेशी निवेशकों का डॉलर के हिसाब से टैक्स के बाद मिलने वाला रिटर्न प्रभावित हुआ है.

इससे दूसरे बाजार उनके लिए अधिक आकर्षक बन रहे हैं. एक सुझाव यह भी दिया गया है कि FPI के कैपिटल गेन की गणना रुपये के बजाय डॉलर में की जाए.

FPI ने प्रक्रियाएं आसान करने की भी मांग की

विदेशी निवेशकों के प्रतिनिधियों ने भारत में विदेशी पूंजी लाने और उसे वापस ले जाने की प्रक्रियाओं को आसान बनाने की मांग भी की है. उनका कहना है कि देश में फंड लाने और बाहर ले जाने की प्रक्रिया को आसान बनाया जाना चाहिए. वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, सभी सुझावों के प्रभावों की जांच की जाएगी. इसके बाद ही किसी अंतिम फैसले पर पहुंचा जाएगा.

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