Dollar Vs Rupee: रुपया रिकॉर्ड लो पर, डॉलर के मुकाबले 94.05 के नए निचले स्तर पर बंद, जानें एक्सपर्ट की राय?
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और ग्लोबल अनिश्चितता के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है. महीने के अंत की डॉलर डिमांड भी ज्यादा रही, जिससे रुपये में कमजोरी बनी रही. हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, कमजोर डॉलर इंडेक्स और घरेलू शेयर बाजार में तेजी के बावजूद रुपये को कोई खास सपोर्ट नहीं मिला.
बुधवार को रुपये में कमजोरी जारी रही और यह डॉलर के मुकाबले 29 पैसे गिरकर 94.05 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ. विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते बाजार में दबाव बना रहा. फॉरेक्स मार्केट में रुपया 93.94 पर खुला और दिनभर कमजोरी के साथ 93.86 से 94.08 के रेंज में कारोबार करता रहा. आखिर में यह 94.05 के ऑल टाइम लो स्तर पर बंद हुआ. इससे पहले मंगलवार को भी रुपया 23 पैसे गिरकर 93.76 पर बंद हुआ था.
क्यों गिरा रुपया?
फॉरेक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और ग्लोबल अनिश्चितता के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है. महीने के अंत की डॉलर डिमांड भी ज्यादा रही, जिससे रुपये में कमजोरी बनी रही. हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, कमजोर डॉलर इंडेक्स और घरेलू शेयर बाजार में तेजी के बावजूद रुपये को कोई खास सपोर्ट नहीं मिला.
आगे क्या अनुमान?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि रिजर्व बैंक रुपये को 94 के स्तर के आसपास सपोर्ट दे सकता है. आने वाले समय में रुपया 93.25 से 94.25 के दायरे में कारोबार कर सकता है.
अन्य संकेत
डॉलर इंडेक्स करीब 0.17 प्रतिशत गिरकर 99.26 पर रहा. वहीं ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भी करीब 4.33 प्रतिशत की गिरावट देखी गई और यह 99.97 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था. दूसरी तरफ घरेलू शेयर बाजार में मजबूती रही, जहां सेंसेक्स 1,205 अंक चढ़कर 75,273.45 पर और निफ्टी 394 अंक बढ़कर 23,306.45 पर बंद हुआ.
क्या है एक्सपर्ट की राय?
LKP Securities के वाइस प्रेसिडेंट और रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, कच्चे तेल के दाम अभी भी ऊंचे बने हुए हैं, जिससे रुपये पर दबाव बना हुआ है. भले ही अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की शुरुआती खबरें आई हैं, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम रास्ते पर अब भी रुकावटें बनी हुई हैं. इससे तेल की सप्लाई को लेकर खतरा बना हुआ है और कीमतें ऊंची बनी हुई हैं. उन्होंने आसान भाषा में समझाया कि जब तेल महंगा होता है, तो भारत को ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं क्योंकि हम ज्यादा तेल आयात (इंपोर्ट) करते हैं. इससे देश का खर्च बढ़ता है और रुपये की कीमत गिरने लगती है. जतिन त्रिवेदी का कहना है कि जब तक तेल की सप्लाई सामान्य नहीं होती, तब तक रुपये में कमजोरी बनी रह सकती है. आने वाले समय में रुपया 93.70 से 94.50 के बीच रह सकता है.
बाजार में बंपर रैली
भारतीय शेयर बाजार ने 25 मार्च को बंपर रैली देखने को मिली. कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,205 अंक यानी 1.63 फीसदी उछलकर 75,273.45 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 394.05 अंक, यानी 1.72 फीसदी, की बढ़त के साथ 23,306.45 के स्तर पर क्लोज हुआ. सेक्टोरल स्तर पर हर इंडेक्स हरे निशान में रहा. कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर में लगभग 3.5 फीसदी की तेज रैली देखने को मिली, जबकि रियल्टी, फार्मा, PSU बैंक, मेटल, ऑटो, FMCG और कैपिटल गुड्स सेक्टर में करीब 2 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई.
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