FII का 110 दिन में ₹1100 करोड़ का सेलिंग प्रेशर! बैंकिंग शेयरों में बिकवाली क्यों, जानें किन स्टॉक्स में बन रहा मौका?
अगर ग्लोबल स्थिति स्थिर होती है और विदेशी निवेश वापस आता है, तो बैंकिंग शेयरों में तेज रिकवरी देखने को मिल सकती है. खासकर प्राइवेट बैंक इस समय बेहतर स्थिति में माने जा रहे हैं क्योंकि ICICI Bank और Axis Bank जैसे शेयरों को मजबूत पोजीशन में माना जा रहा है, जबकि PSU बैंकों में SBI और Bank of Baroda जैसे स्टॉक्स वैल्यू बेसिस पर आकर्षक दिख रहे हैं.

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक फाइनेंशियल शेयरों में ताबड़तोड़ बिकवाली की है. इस दौरान उन्होंने फाइनेंशियल सेक्टर से कुल 1,26,089 करोड़ रुपये की निकासी की है. केवल 110 ट्रेडिंग सेशन्स में हुई यह भारी बिकवाली औसतन 1,146 करोड़ रुपये प्रतिदिन की बिक्री के बराबर है, जिससे बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में लिक्विडिटी पर दबाव बढ़ा है तथा शेयरों के वैल्यूएशन में भारी गिरावट देखने को मिली है.
बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा निशाने पर
दिलचस्प बात यह है कि FII ने जितनी बिकवाली फाइनेंशियल सेक्टर में की है, उतनी किसी और सेक्टर में नहीं हुई.
- IT सेक्टर में बिकवाली: करीब 33,514 करोड़ रुपये
- फाइनेंशियल सेक्टर में बिकवाली: करीब 1,26,089 करोड़ रुपये
- इसका मतलब है कि बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में बिकवाली IT सेक्टर से लगभग चार गुना ज्यादा रही है.
मंथली बिकवाली का ट्रेंड
महीने के हिसाब से देखें तो FII ने लगातार फाइनेंशियल शेयरों में बिकवाली की है.
- मार्च: 60,655 करोड़ रुपये की बिकवाली
- अप्रैल: 30,856 करोड़ रुपये की बिकवाली
- मई: 23,141 करोड़ रुपये की बिकवाली
- फरवरी: 8,418 करोड़ रुपये की खरीदारी (थोड़ी राहत)
लेकिन बाकी महीनों में लगातार आउटफ्लो ही देखने को मिला है.
कुल FII आउटफ्लो में 44 प्रतिशत हिस्सा फाइनेंशियल्स का
इस साल अब तक कुल मिलाकर सभी सेक्टर्स से FII का आउटफ्लो करीब 2,88,386 करोड़ रुपये रहा है. इसमें अकेले फाइनेंशियल सेक्टर का हिस्सा लगभग 44 प्रतिशत है, जो बहुत बड़ा आंकड़ा है.
FII क्यों बेच रहे हैं शेयर?
- अमेरिका में ऊंची बॉन्ड यील्ड
- डॉलर का मजबूत होना
- वेस्ट एशिया में जियो पॉलिटिकल टेंशन
- कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
- रुपये पर दबाव और महंगाई की चिंता
- इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा निकालकर सेफ एसेट्स में शिफ्टिंग
इन सभी कारणों से विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं.
बैंकिंग सेक्टर की बड़ी भूमिका भी कारण
बैंकिंग सेक्टर के इंडेक्स में बड़ा वेटेज होने की वजह से भी यह सबसे आसान एग्जिट रूट बन गया है. जब FII को तेजी से कैश निकालना होता है तो वे सबसे ज्यादा लिक्विड स्टॉक्स यानी बैंकिंग शेयरों में बिकवाली करते हैं.
ग्लोबल रोटेशन का असर
वैश्विक निवेशक इस समय अपने पैसे को अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान के AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर में लगा रहे हैं. इसके अलावा चीन में रिकवरी और सरकारी स्टिमुलस, यूरोप में बैंकिंग और डिफेंस सेक्टर में खरीदारी और अमेरिका के छोटे और मिड कैप स्टॉक्स में रुचि इस रोटेशन का सीधा असर भारतीय बैंकिंग शेयरों पर पड़ रहा है.
घरेलू निवेशकों की खरीदारी से संतुलन
एक दिलचस्प बात यह है कि घरेलू म्यूचुअल फंड और DII लगातार बैंकिंग शेयरों में खरीदारी कर रहे हैं. इससे बाजार में एक तरह का बैलेंस बना हुआ है.
रिपोर्ट के मुताबिक:
- DII ने प्राइवेट बैंकों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है
- पहले जहां वे अंडरवेट थे, अब धीरे-धीरे ओवरवेट हो रहे हैं
- वैल्यूएशन का गैप भी बड़ा फैक्टर
एक रिपोर्ट के अनुसार बैंकिंग सेक्टर की कमाई बाजार में बहुत मजबूत है, लेकिन वैल्यूएशन उतना नहीं मिल रहा. NSE 500 की 22 प्रतिशत कमाई बैंकिंग से आती है, लेकिन मार्केट कैप में हिस्सेदारी सिर्फ 13 प्रतिशत है. इसका मतलब है कि बैंकिंग सेक्टर अभी भी डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है.
आगे क्या हो सकता है?
अगर ग्लोबल स्थिति स्थिर होती है और विदेशी निवेश वापस आता है, तो बैंकिंग शेयरों में तेज रिकवरी देखने को मिल सकती है. खासकर प्राइवेट बैंक इस समय बेहतर स्थिति में माने जा रहे हैं क्योंकि ICICI Bank और Axis Bank जैसे शेयरों को मजबूत पोजीशन में माना जा रहा है, जबकि PSU बैंकों में SBI और Bank of Baroda जैसे स्टॉक्स वैल्यू बेसिस पर आकर्षक दिख रहे हैं.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.