FPI के फेवरेट लिस्ट से बाहर हुए ऑयल एंड गैस और फाइनेंशियल स्टॉक, 15 दिनों में 63450 करोड़ रुपये की बिकवाली
जून 2026 के पहले 15 दिनों में FPI ने भारतीय शेयर बाजार से 63,450 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं. सबसे ज्यादा बिकवाली फाइनेंशियल सर्विसेज और ऑयल एंड गैस सेक्टर में दर्ज की गई, जबकि ऑटोमोबाइल, आईटी, एफएमसीजी, हेल्थकेयर और मेटल्स सेक्टर भी दबाव में रहे. दूसरी ओर, टेलीकम्युनिकेशन, सर्विसेज और यूटिलिटीज सेक्टर में सीमित विदेशी निवेश देखने को मिला है.

FPI Selling: विदेशी निवेशकों (FPI) की भारतीय शेयर बाजार से दूरी लगातार बढ़ती जा रही है. जून 2026 के पहले 15 दिनों में ही फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) ने भारतीय शेयरों से 63,450 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं. इसके साथ ही कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से FPI की कुल निकासी 2.79 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है. मार्च 2026 में सबसे ज्यादा 1.18 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली दर्ज की गई थी. ऐसे में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय बन गई है.
फाइनेंशियल और ऑयल एंड गैस सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली
NSDL के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 15 जून के बीच विदेशी निवेशकों ने लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली की. सबसे ज्यादा दबाव फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर पर देखने को मिला, जहां FPI ने 11,263 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. इसके बाद ऑयल, गैस एंड कंज्यूमेबल फ्यूल्स सेक्टर में 10,488 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई.
इन सेक्टरों में भी हुई भारी बिकवाली
फाइनेंशियल सर्विसेज और ऑयल, गैस एंड कंज्यूमेबल फ्यूल्स सेक्टर के बाद ऑटोमोबाइल एंड ऑटो कंपोनेंट्स सेक्टर से 9,044 करोड़ रुपये निकाले गए, जबकि इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर में 6,733 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई. इसके अलावा एफएमसीजी सेक्टर से 5,063 करोड़ रुपये, मेटल्स एंड माइनिंग सेक्टर से 4,722 करोड़ रुपये और हेल्थकेयर सेक्टर से 4,501 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई.
इसके अलावा कैपिटल गुड्स, पावर और कंस्ट्रक्शन मैटेरियल्स सेक्टरों से भी 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली हुई. वहीं कंज्यूमर सर्विसेज सेक्टर में 1,852 करोड़ रुपये और रियल्टी सेक्टर में 1,093 करोड़ रुपये का आउटफ्लो दर्ज किया गया.
इन सेक्टरों में आई विदेशी खरीदारी
जहां अधिकांश सेक्टरों में विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की, वहीं कुछ सेक्टर ऐसे भी रहे, जिन्होंने निवेश आकर्षित किया. टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर सबसे आगे रहा, जहां 373 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया. इसके अलावा सर्विसेज सेक्टर में 302 करोड़ रुपये का निवेश आया, जबकि यूटिलिटीज सेक्टर में 7 करोड़ रुपये का मामूली निवेश देखने को मिला. हालांकि, इन तीनों सेक्टरों में आई खरीदारी बाकी सेक्टरों में हुई भारी बिकवाली की भरपाई नहीं कर सकी.
आगे बाजार पर क्या रहेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली का यह सिलसिला जारी रहता है, तो भारतीय शेयर बाजार में निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की लगातार खरीदारी अब तक बाजार को संभालने में अहम भूमिका निभा रही है. आने वाले समय में वैश्विक ब्याज दरों, AI सेक्टर में निवेश की दिशा और विदेशी निवेशकों की रणनीति भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
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