1991 में 1000 से नीचे, अब 86000 पार; सेंसेक्स ने कैसे तय किया 8500% तेजी का सफर?
1991 के आर्थिक सुधारों के बाद भारतीय शेयर बाजार ने लंबा सफर तय किया है. Sensex ने 35 साल से कम समय में 8500% की छलांग लगाई है. 1991 में 1,000 से नीचे कारोबार करने वाला Sensex पिछले साल 86,000 के पार पहुंचा. जानिए उदारीकरण से अब तक Sensex का सफर कैसा रहा.

Sensex 8500% Return Since 1991: भारत आज अपनी आजादी का 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. इस दौरान भारतीय शेयर बाजार ने भी एक लंबा और शानदार सफर तय किया है. देश में 1991 के बड़े आर्थिक सुधारों के बाद सेंसेक्स में जबरदस्त तेजी देखने को मिली. 1991 के बाद से 35 साल से कम समय में सेंसेक्स करीब 8500 फीसदी चढ़ चुका है.
सेंसेक्स जनवरी 1986 में लॉन्च हुआ था. इसके कुछ ही समय बाद भारत को गंभीर Balance of Payment Crisis का सामना करना पड़ा. हालात इतने खराब हो गए थे कि देश दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गया था. उस समय तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने चेतावनी दी थी कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार इतना कम हो गया है कि उससे सिर्फ दो हफ्ते के आयात का खर्च ही चल सकता है. सरकार ने अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए इमरजेंसी लोन की व्यवस्था की. उस दौर में Sensex 1000 के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा था.
1991 के सुधारों से Sensex को मिली नई रफ्तार
जुलाई 1991 में मनमोहन सिंह ने ऐतिहासिक बजट पेश किया. इस बजट के जरिए लाइसेंस राज को खत्म करने की दिशा में बड़े कदम उठाए गए और वैश्वीकरण, निजीकरण और उदारीकरण के लिए रास्ता खोला गया. 1991 के बजट वाले दिन ही सेंसेक्स में करीब 5 फीसदी की तेजी आई. पूरे 1991 में बेंचमार्क इंडेक्स ने 82% का रिटर्न दिया और साल के आखिरी में Sensex 1909 पर बंद हुआ.
इसके बाद Sensex ने तेजी की रफ्तार पकड़ ली. डॉ. मनमोहन सिंह के फरवरी 1992 में दूसरा बजट पेश करने से पहले के सात महीनों में Sensex 94% चढ़ गया. इसमें 1991 के ऐतिहासिक बजट के असर के साथ-साथ Harshad Mehta की वजह से आया Bull Run भी शामिल था.
Harshad Mehta Scam से बाजार को लगा झटका
मार्च 1992 में Sensex पहली बार 4000 के स्तर को पार कर गया. हालांकि इसके बाद बाजार में गिरावट शुरू हुई. 28 अप्रैल 1992 को Sensex में 13% की बड़ी गिरावट आई. इसी दौरान Harshad Mehta Scam सामने आया. इसके बाद समय के साथ भारत में लगातार नए सुधार हुए. अर्थव्यवस्था में तेजी आई और इसका असर शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया.
1000 से नीचे से 86000 पार तक पहुंचा Sensex
पिछले साल दिसंबर में Sensex पहली बार 86,000 के स्तर को पार कर गया. इसका मतलब है कि 1991 में आर्थिक सुधारों के ऐलान के बाद Sensex ने करीब 8,500% का रिटर्न दिया है. इस दौरान इसका CAGR करीब 14% रहा. Sensex ने अपनी शुरुआत के बाद से 40 में से 30 साल में Positive Return दिया है.
2024 भी Sensex के लिए बड़ा साल रहा. इस दौरान Index ने 75,000, 80,000 और 85,000 के तीन बड़े पड़ाव पार किए वहीं 2014 से 2025 के बीच Sensex करीब 25,000 के स्तर से बढ़कर 86,000 के स्तर तक पहुंच गया.
अभी 78,000 के नीचे कारोबार कर रहा Sensex
पिछले साल 86,000 से ऊपर का Lifetime High बनाने के बाद Sensex में करीब 10% की गिरावट आई है और फिलहाल यह 78,000 के नीचे कारोबार कर रहा है. Global AI Frenzy, Middle East में चल रहे युद्ध के बीच बढ़ती Oil Prices और दूसरे कारणों से निवेशकों की चिंता बढ़ी है. हालांकि Analysts का Long-Term Outlook अभी भी शेयर बाजार को लेकर सकारात्मक बना हुआ है. Corporate Earnings ने भी निवेशकों को प्रभावित किया है.
Raamdeo Agrawal ने भारत के बाजार को बताया ‘Ferrari’
इस साल की शुरुआत में Motilal Oswal Financial Services के चेयरमैन Raamdeo Agrawal ने भारत को Global Markets में ‘Ferrari’ बताया था. उन्होंने कहा था कि भारत Multi-Bagger Stocks के लिए दुनिया के सबसे अच्छे बाजारों में से एक बना हुआ है. मई 2026 में Groww India Investor Festival में बोलते हुए Agrawal ने कहा था कि दशकों की Compounding, बढ़ती Financialisation और Structural Growth Trends ने भारतीय बाजार की मजबूत नींव तैयार की है.
उन्होंने कहा था कि उन्होंने Sensex को 100 से बढ़कर 80,000 तक पहुंचते देखा है. उनके मुताबिक अगले 40 साल में भी इस सफर के अलग होने की कोई वजह नहीं है.
भारत की Market Capitalisation की रफ्तार
Raamdeo Agrawal ने यह भी बताया था कि पिछले दो दशकों में भारत का Market Capitalisation डॉलर के लिहाज से करीब 14% सालाना की दर से बढ़ा है. इसकी तुलना में अमेरिकी बाजार की रफ्तार करीब 7% रही है. उन्होंने कहा था कि हर पांच से छह साल में बाजार दोगुना हो जाता है और यही इसकी रफ्तार है.
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