SUVs और EVs का बढ़ता क्रेज, टायर कंपनियों की बल्ले-बल्ले! CEAT समेत इन 3 स्टॉक्स पर रखें नजर
भारत में ऑटो सेक्टर की बढ़ती डिमांड से टायर इंडस्ट्री को बड़ा सपोर्ट मिल रहा है. SUVs और EVs की बढ़ती बिक्री, पुराने कमर्शियल व्हीकल फ्लीट और ग्रामीण डिमांड से टायर कंपनियों की ग्रोथ मजबूत बनी हुई है. इस रिपोर्ट में CEAT, Apollo Tyres और TVS Srichakra जैसे प्रमुख टायर स्टॉक्स का एनालिसिस किया गया है.

Tyre Stocks: भारत में ऑटो सेक्टर की बढ़ती डिमांड के बीच टायर इंडस्ट्री में भी मजबूत ग्रोथ देखने को मिल रही है. हालांकि, मजबूत डिमांड का फायदा हर टायर कंपनी को समान रूप से नहीं मिल रहा है. असली अंतर इस बात से पैदा हो रहा है कि कंपनियां बढ़ती बिक्री को कितनी मजबूती से मार्जिन, बैलेंस शीट और सस्टेनेबल अर्निंग्स में बदल पा रही हैं. पुराने कमर्शियल व्हीकल फ्लीट की वजह से रिप्लेसमेंट टायर की डिमांड बनी हुई है. वहीं, SUVs और EVs की बढ़ती बिक्री के कारण बड़े और प्रीमियम टायरों की डिमांड बढ़ रही है. ग्रामीण इलाकों में बढ़ते खर्च से टू-व्हीलर और फार्म इक्विपमेंट सेगमेंट को भी सपोर्ट मिल रहा है. इसके चलते प्रमुख लिस्टेड टायर कंपनियों की वॉल्यूम ग्रोथ डबल डिजिट में बनी हुई है. आइए आपको उन टायर कंपनियों के बारे में बताते हैं, जिन पर आप नजर रख सकते हैं.
CEAT
CEAT के Q1FY27 नतीजे कमजोर रहे. कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 22.4% बढ़कर 4,318 करोड़ रुपये पहुंच गया, लेकिन नेट प्रॉफिट 96.4% गिरकर सिर्फ 4 करोड़ रुपये रह गया. EBITDA मार्जिन भी एक साल पहले के 10.9% से घटकर 8.6% रह गया. हालांकि, पूरे FY26 को देखें तो तस्वीर बेहतर नजर आती है. कंपनी का रेवेन्यू 18.6% बढ़कर 15,678 करोड़ रुपये पहुंचा और EBITDA मार्जिन 11.3% से बढ़कर 13.2% हो गया.
नेट प्रॉफिट भी 47.9% बढ़कर 697 करोड़ रुपये रहा. CEAT के लिए नेचुरल रबर की कीमतों में तेज बढ़ोतरी बड़ा कॉस्ट प्रेशर बनी. इसके अलावा Camso ऑफ-हाईवे बिजनेस के इंटीग्रेशन से वेयरहाउसिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और पर्सनल कॉस्ट बढ़ी. कंपनी ने कॉस्ट गैप को कम करने के लिए रिप्लेसमेंट मार्केट में कीमतें बढ़ाई हैं.
Apollo Tyres
Apollo Tyres की कहानी केवल मार्जिन रिकवरी तक सीमित नहीं है. कंपनी ने अपने फाइनेंशियल लीवरेज को भी काफी कम किया है. FY26 में कंपनी का कंसोलिडेटेड EBITDA मार्जिन 13.7% से बढ़कर 14.6% हुआ. Q1FY27 में कॉस्ट प्रेशर के कारण यह घटकर 11.7% रहा, लेकिन रेवेन्यू करीब 13% बढ़ा.
कंपनी का नेट डेट-टू-EBITDA मार्च 2026 तक घटकर 0.4 गुना रह गया, जो एक साल पहले 0.7 गुना और 2020 में 3.2 गुना था. Apollo Tyres ने यूरोपियन बिजनेस की कॉस्ट एफिशिएंसी सुधारने के लिए नीदरलैंड्स में अपना हाई-कॉस्ट प्लांट बंद कर दिया है. प्रोडक्शन को भारत और हंगरी की लो-कॉस्ट फैसिलिटीज में शिफ्ट किया गया है.
TVS Srichakra
TVS Srichakra ने तीनों कंपनियों में सबसे तेज ग्रोथ दिखाई है. Q1FY27 में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 30.4% बढ़कर 1,068 करोड़ रुपये हो गया. यह पहली बार है जब कंपनी ने 1,000 करोड़ रुपये का क्वार्टरली रेवेन्यू पार किया. ऑपरेटिंग मार्जिन 6% से बढ़कर 8% हुआ, जबकि नेट प्रॉफिट 161.5% बढ़कर 34 करोड़ रुपये पहुंच गया.
हालांकि, कंपनी का मौजूदा 8% ऑपरेटिंग मार्जिन FY24 के 10% से अभी भी कम है. इसके अलावा, इसकी अमेरिकी सब्सिडियरी Super Grip Corporation को FY26 में 18 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग लॉस हुआ. कंपनी उत्तराखंड और मदुरै में कैपेसिटी एक्सपेंशन पर 430 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है.
वैल्यूएशन में बड़ा अंतर
तीनों स्टॉक्स के वैल्यूएशन में भी बड़ा अंतर है. 4 सितंबर 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, Apollo Tyres करीब 13 गुना ट्रेलिंग P/E पर ट्रेड कर रहा था, जबकि CEAT का ट्रेलिंग P/E 22.77 गुना था. वहीं, TVS Srichakra करीब 43.58 गुना ट्रेलिंग P/E पर ट्रेड कर रहा था.
इससे साफ है कि तीनों कंपनियों की ग्रोथ के साथ-साथ उनका वैल्यूएशन प्रोफाइल भी अलग है. ऐसे में निवेशकों के लिए केवल टायर डिमांड और रेवेन्यू ग्रोथ को देखना पर्याप्त नहीं होगा. मार्जिन, डेट, कैश फ्लो और मौजूदा वैल्यूएशन जैसे फैक्टर्स पर भी नजर रखना जरूरी होगा.
यह भी पढ़ें: Opening Bell: सेंसेक्स 500 से अधिक अंक चढ़ा, निफ्टी 23900 के पार; IT, PSU और बैंक शेयरों में तेजी
डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.