‘Eye in the Sky’ बना ISRO का EOS-05! 36000 KM की ऊंचाई से करेगा निगरानी; पहली बार जियो-ऑर्बिट में पहुंचा इमेजिंग सैटेलाइट
ISRO ने GSLV-F17 के जरिए 2,367 किलोग्राम वजन वाले EOS-05 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है. यह भारत का पहला डेडिकेटेड जियो-ऑर्बिट इमेजिंग सैटेलाइट है, जो नियर रियल-टाइम इमेजरी उपलब्ध कराएगा. करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर काम करने वाला EOS-05 एग्रीकल्चर, डिजास्टर मैनेजमेंट और स्ट्रैटेजिक एप्लिकेशंस के लिए महत्वपूर्ण डेटा उपलब्ध कराने में मदद करेगा.
Highlights
- ISRO ने GSLV-F17 से 2,367 किलोग्राम के EOS-05 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है.
- EOS-05 करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई से नियर रियल-टाइम इमेजरी उपलब्ध कराएगा.
- सैटेलाइट एग्रीकल्चर, डिजास्टर मैनेजमेंट और स्ट्रैटेजिक एप्लिकेशंस के लिए महत्वपूर्ण डेटा देगा.
ISRO ने शुक्रवार को 2026 की पहली लॉन्च सफलता हासिल की है. स्पेस एजेंसी ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए 2,367 किलोग्राम वजन वाले EOS-05 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया. यह भारत का पहला डेडिकेटेड जियो-ऑर्बिट इमेजिंग सैटेलाइट है, जो नियर रियल-टाइम इमेजरी उपलब्ध कराएगा. इस मिशन के जरिए ISRO ने GSLV से अब तक का सबसे भारी पेलोड लॉन्च किया है.
36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर करेगा काम
GSLV-F17 ने शुक्रवार सुबह 2:55 बजे श्रीहरिकोटा के सेकंड लॉन्च पैड से उड़ान भरी. करीब 18 मिनट बाद EOS-05 को निर्धारित सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक इंजेक्ट किया गया. इसके बाद सैटेलाइट को आवश्यक जियो-ऑर्बिट तक पहुंचाया जाएगा.
EOS-05 को करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा. इस एल्टीट्यूड पर सैटेलाइट अर्थ की रोटेशनल स्पीड के साथ काम कर सकता है और लंबे समय तक एक समान क्षेत्र की इमेजिंग उपलब्ध कराने में सक्षम होगा.
एग्रीकल्चर और डिजास्टर मैनेजमेंट में होगा इस्तेमाल
ISRO के वैज्ञानिकों ने EOS-05 को ‘आई इन द स्काई’ बताया है. इसका इस्तेमाल एग्रीकल्चर, डिजास्टर मैनेजमेंट और स्ट्रैटेजिक एप्लिकेशंस के लिए नियर रियल-टाइम इमेजरी उपलब्ध कराने में किया जा सकेगा. सैटेलाइट की एडवांस्ड इमेजिंग कैपेबिलिटी से देश को महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तेजी से डेटा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.
ISRO चेयरमैन V Narayanan ने कहा कि GSLV-F17 ने एडवांस्ड EOS-05 जियो-इमेजिंग सैटेलाइट को निर्धारित ऑर्बिट में सक्सेसफुली और प्रिसाइजली इंजेक्ट किया है. उन्होंने बताया कि यह श्रीहरिकोटा से 107वां लॉन्च और GSLV का 19वां मिशन है.
GSLV ने लॉन्च किया अब तक का सबसे भारी सैटेलाइट
V Narayanan ने बताया कि GSLV के शुरुआती D1 मिशन में 1,536 किलोग्राम का पेलोड कैरी किया गया था. इसके बाद ISRO ने स्ट्रक्चरल मास को ऑप्टिमाइज करने और प्रोपल्शन सिस्टम में सुधार के जरिए लॉन्च व्हीकल की परफॉर्मेंस बढ़ाई. अब GSLV ने 2,367 किलोग्राम के सैटेलाइट को ऑर्बिट में पहुंचाकर नया माइलस्टोन हासिल किया है.
मिशन डायरेक्टर Thomas Kurien ने बताया कि इस मिशन में यूनिकली कॉन्फिगर्ड EOS सैटेलाइट भेजा गया है, जो नियर रियल-टाइम इमेजिंग करने में सक्षम है. यह GSLV से GTO या सब-GTO ऑर्बिट में भेजा गया अब तक का सबसे भारी सैटेलाइट है.
2021 के असफल मिशन के बाद बड़ी सफलता
GSLV-F17/EOS-05 मिशन को 2021 में असफल हुए GSLV-F10/EOS-03 मिशन के रिप्लेसमेंट के तौर पर देखा जा रहा है. उस मिशन में लॉन्च के 307 सेकंड बाद ऑनबोर्ड कंप्यूटर ने फ्लाइट को एबॉर्ट कर दिया था. ISRO की जांच में क्रायोजेनिक अपर स्टेज में आई एनोमली को मिशन फेलियर की वजह बताया गया था.
2026 में ISRO की पहली सफलता
EOS-05 मिशन से पहले 12 जनवरी को PSLV-C62 के जरिए 16 सैटेलाइट्स को ऑर्बिट में भेजने का प्रयास किया गया था. हालांकि, रॉकेट के क्रिटिकल थर्ड स्टेज में एनोमली आने के बाद सैटेलाइट्स को इंटेंडेड ऑर्बिट में स्थापित नहीं किया जा सका था.
करीब आठ महीने के गैप के बाद मिली GSLV-F17 की सफलता ISRO के लिए महत्वपूर्ण है. EOS-05 से एग्रीकल्चर, डिजास्टर मैनेजमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग और स्ट्रैटेजिक एप्लिकेशंस के लिए नियर रियल-टाइम सैटेलाइट इमेजरी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.
यह भी पढ़ें: Jio IPO से दिवाली धमाका करने की तैयारी में मुकेश अंबानी, ₹37800 करोड़ जुटाने का प्लान, टूट जाएंगे सारे रिकॉर्ड!
Latest Stories
नेपाल का बाढ़ का तांडव: भारत सरकार और राज्यों ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर, यहां देखें पूरी जानकारी
मिसाइल निर्माण में बड़ी छलांग! अब DRDO की तकनीक मिलेगी भारतीय उद्योगों को, बढ़ेगी डिफेंस सेक्टर में हिस्सेदारी
तमिलनाडु में महिलाओं को बड़ा तोहफा! साल में 3 LPG सिलेंडर फ्री, बसों में बिना किराए सफर का दायरा भी बढ़ा
