SEBI करेगा डेरिवेटिव सेटलमेंट प्राइस की समीक्षा, एक हफ्ते में आएगा कंसल्टेशन पेपर

SEBI क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) लागू होने के बाद डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के एक्सपायरी-डे सेटलमेंट प्राइस तय करने की व्यवस्था की समीक्षा करेगा. बाजार प्रतिभागियों और हितधारकों से मिले फीडबैक के बाद नियामक इसमें संभावित बदलावों पर विचार कर रहा है. SEBI करीब एक सप्ताह में कंसल्टेशन पेपर जारी कर सकता है. इसमें डेरिवेटिव सेटलमेंट प्राइस निर्धारित करने की मौजूदा पद्धति में प्रस्तावित बदलावों की जानकारी दी जाएगी.

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Highlights

  • SEBI CAS लागू होने के बाद डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के एक्सपायरी-डे सेटलमेंट प्राइस तय करने की पद्धति की समीक्षा करेगा.
  • एक हफ्ते में कंसल्टेशन पेपर जारी कर सेटलमेंट प्राइस की मौजूदा व्यवस्था में संभावित बदलावों पर सुझाव मांगे जा सकते हैं.
  • समीक्षा का फोकस डेरिवेटिव सेटलमेंट प्राइस पर है, CAS की पूरी व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव नहीं है.

SEBI Derivatives Settlement Price: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) लागू होने के बाद डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के एक्सपायरी-डे सेटलमेंट प्राइस तय करने की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने जा रहा है. बाजार नियामक को बाजार प्रतिभागियों और अन्य हितधारकों से इस व्यवस्था को लेकर सुझाव और फीडबैक मिले हैं. इसके बाद SEBI ने सेटलमेंट प्राइस तय करने की पद्धति में संभावित बदलावों पर विचार शुरू किया है.

नियामक के अनुसार, इस संबंध में एक कंसल्टेशन पेपर करीब एक सप्ताह में जारी किया जा सकता है. इसमें डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस निर्धारित करने की मौजूदा पद्धति में प्रस्तावित बदलावों का विवरण दिया जाएगा. हालांकि, SEBI ने स्पष्ट किया है कि यह समीक्षा मुख्य रूप से डेरिवेटिव सेटलमेंट प्राइस की पद्धति से जुड़ी है और इसका मतलब CAS व्यवस्था में बदलाव करना नहीं है.

3 अगस्त से लागू हुआ है CAS

SEBI ने इक्विटी कैश मार्केट में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी CAS को 3 अगस्त 2026 से लागू किया था. इसके लिए नियामक ने 16 जनवरी 2026 को सर्कुलर जारी किया था. CAS के तहत शेयरों का क्लोजिंग प्राइस तय किया जाता है. मौजूदा व्यवस्था में CAS से निर्धारित क्लोजिंग प्राइस को ही डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस तय करने के आधार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है.

CAS लागू होने के बाद इसके शुरुआती एक महीने के कामकाज और बाजार पर इसके प्रभाव की SEBI ने निगरानी की. इस दौरान बाजार से जुड़े अलग-अलग पक्षों से इस व्यवस्था को लेकर फीडबैक और सुझाव प्राप्त हुए. इनमें डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी के दिन सेटलमेंट प्राइस निर्धारित करने से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं.

हितधारकों से मिले फीडबैक के बाद समीक्षा

SEBI ने कहा कि CAS लागू होने के शुरुआती अनुभव और विभिन्न हितधारकों से मिले फीडबैक को ध्यान में रखते हुए डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के सेटलमेंट प्राइस निर्धारित करने की पद्धति में कुछ बदलाव प्रस्तावित किए जा सकते हैं. इसके लिए जल्द ही कंसल्टेशन पेपर जारी किया जाएगा.

नियामक ने यह भी बताया कि CAS लागू करने से पहले व्यापक स्तर पर हितधारकों के साथ विचार-विमर्श किया गया था. इस प्रक्रिया में दो दौर के पब्लिक कंसल्टेशन पेपर जारी किए गए थे. इसके अलावा SEBI की एडवाइजरी कमेटी, स्टॉक एक्सचेंज, ब्रोकर एसोसिएशन, संस्थागत निवेशकों, बाजार प्रतिभागियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ भी चर्चा की गई थी.

CAS लागू होने के बाद भी SEBI ने इसके संचालन से जुड़े शुरुआती मुद्दों को समझने और उनका समाधान करने के लिए विभिन्न पक्षों के साथ बातचीत जारी रखी. इसमें स्टॉक एक्सचेंज, ब्रोकर, प्रोपराइटरी ट्रेडर्स, सॉफ्टवेयर वेंडर्स, म्यूचुअल फंड, इंडस्ट्री एसोसिएशन और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) शामिल रहे.

सोशल मीडिया और मीडिया से मिले फीडबैक पर भी नजर

SEBI ने कहा कि उसने CAS के पहले महीने के दौरान इसके कामकाज और बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव की बारीकी से निगरानी की. नियामक ने विभिन्न माध्यमों से मिले फीडबैक को भी समीक्षा में शामिल किया. इसमें सोशल मीडिया और अन्य मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए सामने आए सुझाव और चिंताएं भी शामिल हैं.

SEBI की प्रस्तावित समीक्षा का मुख्य फोकस इस बात पर है कि डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी के समय सेटलमेंट प्राइस किस तरीके से निर्धारित किया जाए. यानी फिलहाल नियामक CAS की पूरी व्यवस्था को बदलने के बजाय उससे जुड़े डेरिवेटिव सेटलमेंट प्राइस की पद्धति की समीक्षा कर रहा है.

कंसल्टेशन पेपर से साफ होगी नई व्यवस्था

प्रस्तावित बदलावों की पूरी जानकारी SEBI के कंसल्टेशन पेपर में सामने आएगी. इसके बाद बाजार प्रतिभागियों और अन्य हितधारकों को प्रस्तावों पर अपनी राय देने का अवसर मिल सकता है. SEBI के मुताबिक, शुरुआती चरण में मिले अनुभव और फीडबैक के आधार पर यह समीक्षा की जा रही है.

इस कदम से डेरिवेटिव मार्केट में कारोबार करने वाले निवेशकों, ट्रेडर्स, ब्रोकर और अन्य बाजार प्रतिभागियों की नजर अब SEBI के आगामी कंसल्टेशन पेपर पर रहेगी. इसमें यह स्पष्ट हो सकता है कि एक्सपायरी-डे सेटलमेंट प्राइस तय करने के लिए CAS से मिलने वाले क्लोजिंग प्राइस के इस्तेमाल को लेकर नियामक क्या बदलाव प्रस्तावित करता है.

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