भारत सरकार का बड़ा फैसला! FY31 तक बढ़ी मर्चेंट शिपिंग सब्सिडी स्कीम; इन कंपनियों पर रखें नजर
भारत सरकार ने मर्चेंट शिपिंग सब्सिडी स्कीम को FY31 तक बढ़ाने का फैसला किया है. इस कदम का उद्देश्य भारतीय शिपिंग कंपनियों को विदेशी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाना और देश की समुद्री क्षमता मजबूत करना है. पश्चिम एशिया तनाव और होर्मुज स्ट्रेट संकट के बीच यह फैसला कंपनियों के लिए बड़ा अवसर माना जा रहा है.

Merchant Shipping Subsidy Scheme: भारत सरकार ने घरेलू शिपिंग सेक्टर को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मर्चेंट शिपिंग सब्सिडी स्कीम को वित्त वर्ष 2031 तक बढ़ाने का फैसला किया है. यह कदम केवल एक सामान्य नीति विस्तार नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भारत की समुद्री और व्यापारिक रणनीति में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत लाई गई इस योजना का उद्देश्य भारतीय शिपिंग कंपनियों को विदेशी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाना और देश की समुद्री क्षमता को मजबूत करना है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, होर्मुज स्ट्रेट संकट और वैश्विक सप्लाई चेन जोखिमों के बीच यह फैसला भारतीय शिपिंग कंपनियों के लिए लंबी अवधि का बड़ा अवसर साबित हो सकता है.
क्या है मर्चेंट शिपिंग सब्सिडी स्कीम
भारत सरकार ने यह योजना वर्ष 2021 में शुरू की थी. इसके तहत सरकारी कार्गो कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए बोली लगाने वाली भारतीय शिपिंग कंपनियों को सब्सिडी सहायता दी जाती है. इसका मकसद विदेशी शिपिंग कंपनियों और भारतीय कंपनियों के बीच लागत अंतर को कम करना है. सरकार नए जहाजों को ज्यादा प्रोत्साहन दे रही है.
फरवरी 2021 के बाद रजिस्टर्ड नए जहाजों को विदेशी कंपनियों की सबसे कम बोली के मुकाबले 15 फीसदी तक सब्सिडी मिल सकती है, जबकि पुराने जहाजों को 10 फीसदी तक सहायता दी जाती है. 20 साल से ज्यादा पुराने जहाज इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे. FY31 तक योजना बढ़ने से शिपिंग कंपनियों को लंबी अवधि की नीति स्पष्टता मिलेगी, जो जहाज खरीद और फ्लीट विस्तार जैसे बड़े निवेश निर्णयों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है.
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला
भारत दुनिया की सबसे बड़ी ट्रेडिंग अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और देश की समुद्री तटरेखा 11,000 किलोमीटर से ज्यादा लंबी है. इसके बावजूद भारतीय झंडे वाले जहाज देश के कुल EXIM व्यापार का 5 फीसदी से भी कम हिस्सा ढोते हैं. 1980 के दशक में भारतीय जहाज 40 फीसद से ज्यादा EXIM व्यापार संभालते थे, लेकिन समय के साथ विदेशी कंपनियों का दबदबा बढ़ गया.
अब सरकार घरेलू शिपिंग क्षमता को दोबारा मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है. पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और समुद्री सुरक्षा जोखिमों ने यह भी दिखा दिया है कि विदेशी शिपिंग कंपनियों पर अत्यधिक निर्भरता भारत के लिए रणनीतिक कमजोरी बन सकती है.
किन कंपनियों को मिल सकता है फायदा
सरकारी नीति से सबसे बड़ा फायदा Shipping Corporation of India को मिल सकता है. सरकार अब निजीकरण की बजाय कंपनी की फ्लीट क्षमता बढ़ाने पर फोकस कर रही है. सरकारी कार्गो मूवमेंट और राष्ट्रीय समुद्री रणनीति में SCI की भूमिका और मजबूत हो सकती है.
वहीं निजी क्षेत्र की कंपनी Great Eastern Shipping Company को भी इस योजना का बड़ा लाभार्थी माना जा रहा है. कंपनी की बैलेंस शीट मजबूत मानी जाती है और इसके रिटर्न रेशियो भी बेहतर हैं. सब्सिडी योजना के कारण कंपनी को सरकारी कार्गो अवसरों तक ज्यादा पहुंच मिल सकती है.
कैसा है शेयर का हाल
शुक्रवार को Shipping Corporation of India का शेयर 1.36 फीसदी बढ़कर 331.40 रुपये पर पहुंच गया, जबकि बीते एक महीने में इसके शेयर में 13.93 फीसदी की तेजी आई है. अगर Great Eastern Shipping Company की बात करें, तो शुक्रवार को इसका शेयर 3.30 फीसदी बढ़कर 1533.90 रुपये पर पहुंच गया, जबकि बीते एक महीने में इसमें 11.94 फीसदी की तेजी आई है.
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