Nifty Outlook 18 May: कमजोर रुपये और महंगे तेल से बढ़ा दबाव, एक्सपर्ट्स बोले- निफ्टी 23,150 तक टूट सकता है

विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली, 110 डॉलर के पार पहुंचे कच्चे तेल और रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसले रुपये के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि निफ्टी जब तक 23,850 के ऊपर टिक नहीं पाता, तब तक बाजार में ‘Sell on Rise’ का दबाव बना रहेगा. ईरान-अमेरिका तनाव, ग्लोबल मार्केट की कमजोरी और बढ़ती बॉन्ड यील्ड इस हफ्ते बाजार की दिशा तय करेंगे.

निफ्टी आउटलुक Image Credit: Canva

Nifty Outlook 18 May: विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली, रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच चुका रुपया और कच्चे तेल की दहकती कीमतों के बीच सोमवार यानी 18 मई को भारतीय शेयर बाजार (Share Market) की शुरुआत गिरावट के साथ होने के संकेत मिल रहे हैं. पिछले कारोबारी हफ्ते में सेंसेक्स में करीब 2,000 अंकों की भारी गिरावट आई थी, जबकि निफ्टी 50 भी 2% टूट गया. शुक्रवार को आखिरी कारोबारी सत्र में निफ्टी 46 अंक (-0.19%) की कमजोरी के साथ 23,643.50 के स्तर पर बंद हुआ. एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक निफ्टी ऊपरी स्तरों पर टिकने में कामयाब नहीं होता, तब तक बाजार का मूड ‘सेल ऑन राइज’ (हर तेजी पर बिकवाली) का रहेगा.

नए कारोबारी हफ्ते में बाजार की दिशा तय करने वाले 5 सबसे बड़े ट्रिगर्स ये हैं:

  1. ईरान और अमेरिका में बढ़ता तनाव

ईरान और अमेरिका के बीच जुबानी जंग फिर तेज हो गई है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग्ची के ‘अमेरिका पर भरोसा नहीं’ वाले बयान और डोनाल्ड ट्रंप के ‘धैर्य खोने’ की चेतावनी ने भू-राजनीतिक संकट को बढ़ा दिया है. दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत और तनाव का बाजार के सेंटीमेंट पर सीधा असर दिखेगा.

  1. कच्चे तेल की कीमतें $110 के पार

पश्चिम एशिया के संकट के चलते स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के जल्द खुलने की उम्मीदें धुंधली हो गई हैं. इसके कारण पिछले हफ्ते कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें करीब 8% तक उछलकर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. भारत के लिए कच्चे तेल का महंगा होना सबसे बड़ा सिरदर्द है, जिससे घरेलू महंगाई बढ़ने का खतरा है.

  1. रुपये की ऐतिहासिक गिरावट

शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया पहली बार 96 के स्तर के नीचे फिसल गया. अब बाजार में चर्चा इस बात की है कि क्या रुपया मनोवैज्ञानिक स्तर यानी ₹100 प्रति डॉलर तक जा सकता है. कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों (FPI) को बाजार से पैसा निकालने पर मजबूर कर रहा है. हालांकि, सरकार द्वारा विदेशी निवेशकों को बॉन्ड टैक्स में राहत देने जैसे कदमों की उम्मीद से बाजार को थोड़ा सहारा मिल सकता है.

  1. ग्लोबल मार्केट में मंदी का माहौल

अमेरिकी और एशियाई बाजारों से मिलने वाले संकेत अच्छे नहीं हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई समिट से कोई बड़ा नीतिगत नतीजा न निकलने से अमेरिकी बाजार शुक्रवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुए. इंटेल, एनवीडिया और एएमडी जैसी बड़ी टेक और एआई (AI) कंपनियों के शेयरों में 4% से 6% तक की गिरावट दर्ज की गई, जिसका असर सोमवार को भारतीय आईटी (IT) शेयरों पर दिख सकता है.

  1. बढ़ती बॉन्ड यील्ड

अमेरिका में ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड का बढ़ना भारतीय बाजार के लिए एक और बड़ा झटका है. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) उभरते बाजारों (जैसे भारत) से अपना पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड में शिफ्ट कर रहे हैं, जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ है.

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क्या कहते हैं मार्केट एक्सपर्ट्स?

  • धुपेश धमेजा (सैमको सिक्योरिटीज): “निफ्टी इस समय 23,770–23,850 के रेजिस्टेंस जोन को पार करने के लिए संघर्ष कर रहा है. जब तक इंडेक्स 23,850 के नीचे है, तब तक हर तेजी पर बिकवाली का दबाव रहेगा. नीचे की तरफ 23,500–23,300 का स्तर मजबूत सपोर्ट का काम करेगा. अगर 23,400 का स्तर टूटता है, तो निफ्टी 23,150 तक फिसल सकता है.”
  • नागराज शेट्टी (एचडीएफसी सिक्योरिटीज): “बाजार का अंडरलाइंग ट्रेंड अभी अस्थिर है. अगले हफ्ते निफ्टी के 23,200 से 23,800 के व्यापक दायरे में घूमने की संभावना है.”
  • विनोद नायर (जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स): “शुक्रवार को रुपये की कमजोरी के बावजूद बाजार ने निचले स्तरों से रिकवरी दिखाई थी. चीन में मांग सुधरने की उम्मीद से मेटल और फार्मा शेयरों में खरीदारी दिखी, लेकिन आईटी शेयरों में गिरावट का दौर जारी रहा.”

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.