Nifty Outlook May 27: किस लेवल पर है इमिडिएट सपोर्ट? जानें- बुधवार को कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल
Nifty Outlook May 27: मंथली डेरिवेटिव एक्सपायरी के चलते निफ्टी ने पहले हाफ में अपनी बढ़त जारी रखी और 24,089 के इंट्राडे हाई को छुआ. हालांकि, दूसरे हाफ में यह तेजी से पलटा और निफ्टी अपनी पीक से टूट गया.

Nifty Outlook May 27: प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी50 ने मंगलवार, 26 मई को अपनी दो दिन की बढ़त गंवा दी. इसकी वजह कमजोर वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच हुई मुनाफावसूली थी. सेंसेक्स 479 अंक या 0.63% गिरकर 76,009.70 पर बंद हुआ, जबकि NSE के निफ्टी 50 में 118 अंकों या 0.49% की गिरावट आई और यह 23,913.70 पर स्थिर हुआ. बुधवार को शेयर बाजार की कैसी चाल रहेगी, एक्सपर्ट्स से समझ लीजिए.
कैश मार्केट का टर्नओवर
HDFC सिक्योरिटीज के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट, नंदिश शाह ने कहा कि कल की मजबूत क्लोजिंग के बाद, मंथली डेरिवेटिव एक्सपायरी के चलते निफ्टी ने पहले हाफ में अपनी बढ़त जारी रखी और 24,089 के इंट्राडे हाई को छुआ. हालांकि, दूसरे हाफ में यह तेजी से पलटा और निफ्टी अपनी पीक से 200 से अंक से अधिक गिरकर 23,913 पर बंद हुआ, जो 118 अंकों की गिरावट थी. पिछले सत्र की तुलना में NSE कैश मार्केट का टर्नओवर 7 फीसदी बढ़ा.
निफ्टी के सेगमेंट में अडानी एंटरप्राइजेज, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स और टेक महिंद्रा ने सबसे ज्यादा बढ़त हासिल की, जबकि अपोलो हॉस्पिटल्स, विप्रो और भारती एयरटेल प्रमुख पिछड़ने वालों में शामिल रहे.
सेक्टर के हिसाब से, निफ्टी मेटल, FMCG और ऑटो को छोड़कर, बाकी सभी इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए. कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, फाइनेंशियल सर्विसेज़, प्राइवेट बैंक और रियल्टी सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली.
इमिडिएट सपोर्ट
ब्रॉडर मार्केट ने मजबूती दिखाई और मुख्य इंडेक्स से अलग प्रदर्शन किया. निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 में क्रमशः 0.54% और 0.37% की बढ़त हुई. बाजार की स्थिति लगातार सातवें सत्र में भी पॉजिटिव बनी रही, जिसमें BSE का बढ़त-गिरावट रेश्यो 1.07 रहा, जो मिड- और स्मॉल-कैप शेयरों के प्रति लगातार बनी हुई दिलचस्पी को दर्शाता है.
भारतीय रुपये की तीन दिन से जारी बढ़त का सिलसिला टूट गया और इसमें 45 पैसे की तेज गिरावट दर्ज की गई. कमजोर एशियाई मुद्राओं, वैश्विक जोखिम से बचने की ट्रेंड और अमेरिकी सैन्य हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण स्थानीय मुद्रा पर भारी दबाव पड़ा.
टेक्निकल नजरिए से 23,800–23,850 का पिछला ब्रेकआउट जोन इमिडिएट सपोर्ट के तौर पर काम करने की उम्मीद है, जिसके बाद 23,600 का स्तर आएगा. ऊपरी तरफ, 24,100 का स्तर निकट-अवधि में एक प्रमुख रेजिस्टेंस स्तर बना हुआ है.
ओपनिंग डाउन गैप
HDFC Securities के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट, नागराज शेट्टी ने आज के मार्केट परफॉर्मेंस पर अपनी राय दी. उन्होंने कहा कि सोमवार को गैप-अप ओपनिंग के साथ तेजी दिखाने के बाद, मंगलवार को Nifty में ऊपरी स्तरों से थोड़ी बिकवाली का दबाव देखा गया और यह दिन के आखिर में 118 पॉइंट्स नीचे बंद हुआ. Nifty की शुरुआत कमजोर रही, लेकिन सेशन के शुरुआती हिस्से में इसने रिकवर किया और निचले स्तरों से ज़ोरदार वापसी की. यह 11 मई के पिछले ओपनिंग डाउन गैप (लगभग 24100 के स्तर पर) की रुकावट को पार नहीं कर पाया, और सेशन के बीच से लेकर आखिर तक कमज़ोरी बनी रही.
डेली चार्ट पर एक ठीक-ठाक नेगेटिव कैंडल बनी, जिसमें ऊपरी तरफ़ एक छोटी सी शैडो (shadow) थी. तकनीकी तौर पर, यह मार्केट एक्शन 24100 के स्तर के आस-पास एक रुकावट होने का संकेत देता है. इस कंसोलिडेशन या कमजोरी ने मार्केट के शॉर्ट-टर्म पॉजिटिव सेंटीमेंट को नुकसान नहीं पहुंचाया है और Nifty आखिरकार निचले स्तरों से वापसी कर सकता है और नजदीकी भविष्य में 24100 की रुकावट को पार कर सकता है. इसलिए, यह ‘डिप्स पर खरीदने’ (Buy on Dips) का एक मौका होगा. इमिडिएट सपोर्ट 23800 के स्तर पर है.
टेक्निकल बिकवाली का दबाव
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड, विनोद नायर ने कहा कि दक्षिण ईरान में अमेरिकी सेना के ऑपरेशन की खबरों के बाद, अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लेकर जो थोड़ी-बहुत उम्मीद थी, वह तेजी से खत्म हो गई. इससे कच्चे तेल की कीमतें अचानक बढ़ गईं और रुपये की जो थोड़ी-बहुत बढ़त हुई थी, वह भी खत्म हो गई. महीने के F&O एक्सपायरी ने जो पहले से ही जोखिम भरे माहौल में थी, टेक्निकल बिकवाली के दबाव को और बढ़ा दिया, जिससे घरेलू शेयर बाजार नीचे गिरकर बंद हुए.
DIIs से मिला बाजार को सहारा
इसके बावजूद, मिड-कैप शेयरों ने मजबूती दिखाई और इंडेक्स सेशन के दौरान अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया. यह मजबूती घरेलू कंपनियों की कमाई पर लोगों के भरोसे को दिखाती है, जिसे DII (घरेलू संस्थागत निवेशकों) के लगातार निवेश से सहारा मिला, जबकि FII (विदेशी संस्थागत निवेशकों) की निकासी से बाजार के मूड पर बुरा असर पड़ा. कच्चे तेल की कीमतें हफ्ते के आधार पर अभी भी कम हैं, इसलिए बाजार अभी भी इस बात की काफी संभावना मानकर चल रहे हैं कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होगा.’
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.