6 साल के निचले स्तर पर Nifty का P/B Ratio, बैंकिंग स्टॉक्स की कमजोरी बड़ी वजह; निवेशकों के लिए क्या है मतलब?
Nifty का P/B Ratio 6 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है. 1-Year Forward P/B Ratio 2.96 गुना से नीचे आ गया है. बैंकिंग स्टॉक्स और फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियों की कमजोरी इसके पीछे बड़ी वजह है. हालांकि, कम P/B Ratio को देखकर बाजार के सस्ता होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. निवेशकों को अर्निंग्स ग्रोथ, प्रॉफिटेबिलिटी और वैल्यूएशन मेथडोलॉजी में हुए बदलाव को भी समझना जरूरी है.

Nifty P/B Ratio: बेंचमार्क Nifty का अनुमानित प्राइस-टू-बुक यानी P/B Ratio 6 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है. Nifty का 1-Year Forward P/B Ratio अब 2.96 गुना से नीचे आ गया है, जो पिछले 6 साल में सबसे कम है. हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि केवल P/B Ratio में गिरावट को देखकर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि भारतीय शेयर बाजार अब सस्ता हो गया है. निवेशकों को अर्निंग्स ग्रोथ और आने वाले समय में कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी पर भी ध्यान देना चाहिए.
6 साल के निचले स्तर पर P/B Ratio
ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Nifty का 1-Year Forward P/B Ratio फिलहाल 2.96 गुना से नीचे है. इसकी तुलना में 5 साल का औसत 3.18 गुना और 10 साल का औसत 2.99 गुना है. ऐसे में मौजूदा स्तर यह दिखाता है कि Nifty की वैल्यूएशन कंपनियों की बुक वैल्यू के मुकाबले पहले की तुलना में ज्यादा सामान्य स्तर पर आ गई है. P/B Ratio किसी कंपनी या इंडेक्स के बाजार मूल्य की तुलना उसकी नेट एसेट्स यानी बुक वैल्यू से करता है. यह खास तौर पर बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियों की वैल्यूएशन को समझने में महत्वपूर्ण माना जाता है.
Banking Stocks की कमजोरी का असर
Nifty के P/B Ratio में गिरावट की एक बड़ी वजह इंडेक्स में बैंक्स और फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियों का बड़ा वेटेज है. इन दोनों सेक्टर्स की Nifty में हिस्सेदारी करीब 35 फीसदी है, जो किसी भी सेक्टर की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है. हाल के समय में HDFC Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank जैसे बड़े बैंकिंग स्टॉक्स का प्रदर्शन कमजोर रहा है. दूसरी ओर, बैंकों की रिटेन्ड अर्निंग्स बढ़ने से उनकी नेट वर्थ और बुक वैल्यू में इजाफा हुआ है. ऐसे में शेयर कीमतों में उतनी तेजी नहीं आई, जितनी उनकी बुक वैल्यू में बढ़ोतरी हुई. इससे Nifty का P/B Ratio नीचे आया है.
सिर्फ P/B Ratio देखकर निवेश का फैसला नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि कम P/B Ratio को बाजार के सस्ते होने का सीधा संकेत नहीं माना जाना चाहिए. P/B Ratio में गिरावट शेयर कीमतों में कमी, बुक वैल्यू में बढ़ोतरी या दोनों वजहों से हो सकती है. इसलिए निवेशकों को अर्निंग्स ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी के भविष्य के अनुमान को भी देखना जरूरी है. केवल वैल्यूएशन मल्टीपल के आधार पर निवेश का फैसला करना सही रणनीति नहीं हो सकती.
P/B Ratio की कैलकुलेशन में भी हुआ बदलाव
Nifty के मौजूदा P/B Ratio को समझते समय वैल्यूएशन मेथडोलॉजी में हुए बदलाव को भी ध्यान में रखना जरूरी है. NSE ने सितंबर 2023 में P/B Ratio की कैलकुलेशन को स्टैंडअलोन फाइनेंशियल्स से बदलकर कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल्स के आधार पर कर दिया था. इस बदलाव के बाद बिना शेयर कीमत में किसी बदलाव के Nifty का रिपोर्टेड P/B Ratio 4.31 गुना से घटकर 3.45 गुना हो गया था.
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर पुरानी स्टैंडअलोन मेथडोलॉजी के आधार पर मौजूदा P/B Ratio की गणना की जाए तो यह करीब 3.7 गुना होगा. यह लंबे समय के करीब 3.5 गुना के औसत से थोड़ा ऊपर है. Nifty पिछले 1 साल में 2.64 फीसदी और पिछले 2 साल में 1.31 फीसदी नीचे है. ऐसे में मौजूदा P/B Ratio भले ही 6 साल के निचले स्तर पर हो, लेकिन निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे केवल वैल्यूएशन मल्टीपल के बजाय कंपनियों की अर्निंग्स और आने वाले प्रॉफिटेबिलिटी साइकिल को भी ध्यान में रखकर निवेश का फैसला करना चाहिए.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.