अंबानी के ₹2.73 लाख करोड़ के दांव से घट सकता है देश का इंपोर्ट बिल, आंध्र प्रदेश में बड़े प्रोजेक्ट का प्लान; जानें डिटेल्स
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने आंध्र प्रदेश में अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट के लिए 30 साल में 2.73 लाख करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है. कंपनी चितलापुडी और रेचेरला कोल ब्लॉक से सिंथेसिस गैस बनाने की योजना पर काम कर रही है. इस गैस से हाइड्रोजन, अमोनिया, मेथनॉल और सिंथेटिक नेचुरल गैस बनाई जा सकती है. प्रोजेक्ट सफल होने पर LNG, अमोनिया और मेथनॉल जैसे प्रोडक्टों के आयात पर भारत की निर्भरता कम हो सकती है.
Highlights
- रिलायंस ने आंध्र प्रदेश में 2.73 लाख करोड़ रुपये के कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट का प्रस्ताव दिया है.
- जमीन के नीचे कोयले से सिंथेसिस गैस बनाकर हाइड्रोजन, अमोनिया और मेथनॉल तैयार किए जा सकते हैं.
- प्रोजेक्ट सफल होने पर एलएनजी और अन्य औद्योगिक उत्पादों के आयात पर भारत की निर्भरता घट सकती है.
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने आंध्र प्रदेश में एक बड़े एनर्जी और इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट का प्रस्ताव रखा है. कंपनी करीब 2.73 लाख करोड़ रुपये का निवेश 30 साल में करने की योजना बना रही है. इसका मकसद जमीन के नीचे मौजूद कोयले से गैस और दूसरे इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट तैयार करना है. इस प्रोजेक्ट से भारत में आयात होने वाली LNG, अमोनिया और मेथनॉल जैसी चीजों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि पूरा निवेश अभी तय नहीं है. पहले प्रोजेक्ट की तकनीकी और कारोबारी फिजिबिलिटी साबित करनी होगी.
रिलायंस ने क्या योजना बनाई है
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस ने आंध्र प्रदेश के एलुरु जिले में चितलापुड़ी और रेचेरला कोल ब्लॉक के आधार पर एक इंटीग्रेटेड अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन कॉम्प्लेक्स बनाने का प्रस्ताव रखा है. कंपनी ने इन दोनों कोल ब्लॉक को कोल मंत्रालय की ई- नीलामी के जरिए हासिल किया है. प्रस्ताव के मुताबिक, कुल निवेश 2.73 लाख करोड़ रुपये तक हो सकता है. हालांकि यह निवेश तभी आगे बढ़ेगा जब खोज और पायलट फेज में प्रोजेक्ट तकनीकी और कमर्शियल रूप से सफल साबित होगी.
3000 करोड़ रुपये से होगी पायलट प्रोजेक्ट
रिलायंस की योजना तीन चरणों में आगे बढ़ने की है. पहला चरण 2026 की तीसरी तिमाही से 2027 की चौथी तिमाही तक चलेगा. इसमें खोज और पायलट काम के लिए 3000 करोड़ रुपये तक खर्च किए जा सकते हैं. अगर यह चरण सफल रहा तो 2028 से 2030 के दौरान करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये विकास पर खर्च करने का प्रस्ताव है. इसके बाद 2030 से प्रोडक्टन फेज में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की योजना है. इसलिए अभी सबसे अहम कदम शुरुआती पायलट प्रोजेक्ट की सफलता है.
3.13 अरब टन कोयले का अनुमान
रिलायंस को मिले दोनों कोल ब्लॉक काफी बड़े हैं. चितलापुड़ी ब्लॉक करीब 3000 एकड़ में फैला है और इसमें करीब 90.49 करोड़ टन जी 12 ग्रेड कोयले का अनुमान है. वहीं रेचेरला ब्लॉक करीब 5500 एकड़ में फैला है और इसमें करीब 222.57 करोड़ टन जी 13 कोयले का अनुमान लगाया गया है. दोनों ब्लॉक मिलाकर अनुमानित कोयला भंडार करीब 3.13 अरब टन है. ये भंडार जमीन के 500 मीटर से ज्यादा नीचे बताए जा रहे हैं.
भारत के आयात बिल पर कितना असर
भारत अपनी एनर्जी और इंडस्ट्रियल जरूरतों के लिए कई महत्वपूर्ण प्रोडक्ट का आयात करता है. सरकार के मुताबिक, देश की आधे से ज्यादा LNG जरूरत आयात से पूरी होती है. करीब 20 फीसदी यूरिया लगभग पूरा अमोनिया और करीब 80 से 90 फीसदी मेथनॉल भी आयात किया जाता है. ऐसे में घरेलू कोयले से गैस और दूसरे रसायन बनाने की क्षमता बढ़ती है तो आयात पर निर्भरता कम हो सकती है. इससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों और बाहरी आपूर्ति में रुकावट का असर भी कुछ कम हो सकता है.
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2.77 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा
सरकार के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 में LNG यूरिया अमोनिया अमोनियम नाइट्रेट कोकिंग कोल और मेथनॉल जैसे प्रोडक्टों के आयात पर करीब 2.77 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए. कोयला गैसीफिकेशन से इन सभी प्रोडक्टों का आयात पूरी तरह खत्म नहीं होगा. लेकिन घरेलू स्तर पर इनके विकल्प तैयार करने से आयात बिल कम करने में मदद मिल सकती है. इसलिए इस योजना को सिर्फ कोयले से गैस बनाने वाली प्रोजेक्ट के रूप में नहीं देखा जा रहा है. इसका असर एनर्जी और रसायन उद्योग की कई कड़ियों पर पड़ सकता है.
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