NSE का बड़ा फैसला, इन दो शेयरों को F&O से किया बाहर; जारी किया नया सर्कुलर

National Stock Exchange ने Exide Industries और Nuvama Wealth Management को F&O सेगमेंट से हटाने का फैसला किया है. एक्सचेंज के अनुसार इन शेयरों में नए फ्यूचर्स और ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट जारी नहीं किए जाएंगे. हालांकि मई, जून और जुलाई 2026 तक के मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट एक्सपायरी तक जारी रहेंगे.

एक्सचेंज के अनुसार इन शेयरों में नए फ्यूचर्स और ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट जारी नहीं किए जाएंगे. Image Credit: TV9 Bharatvarsh

NSE ने घोषणा की है कि एक्साइड इंडस्ट्रीज और नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट को फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट से हटाया जाएगा. एक्सचेंज ने कहा है कि इन दोनों शेयरों में अब नए F&O कॉन्ट्रैक्ट जारी नहीं किए जाएंगे. हालांकि जिन निवेशकों के पास पहले से खुले कॉन्ट्रैक्ट हैं, वे उनकी एक्सपायरी तक ट्रेडिंग जारी रख सकेंगे. यह फैसला सेबी के नए नियमों और पात्रता मानकों के तहत लिया गया है. मार्केट रेगुलेटरी ने डेरिवेटिव सेगमेंट के लिए सख्त मानक लागू किए हैं ताकि केवल मजबूत और ज्यादा ट्रेडिंग वाले शेयर ही F&O में बने रहें.

NSE ने जारी किया नया सर्कुलर

NSE ने 22 मई 2026 को जारी सर्कुलर में बताया कि Exide Industries और Nuvama Wealth Management के लिए नए F&O कॉन्ट्रैक्ट जारी नहीं होंगे. एक्सचेंज के अनुसार यह फैसला सेबी के नए पात्रता नियमों के तहत लिया गया है. हालांकि मई 2026, जून 2026 और जुलाई 2026 तक के मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध रहेंगे. एक्सचेंज ने कहा कि मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स में नए स्ट्राइक प्राइस भी जोड़े जाते रहेंगे. लेकिन जुलाई 2026 के बाद इन शेयरों में कोई नया कॉन्ट्रैक्ट उपलब्ध नहीं होगा.

निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं

NSE ने साफ किया है कि जिन ट्रेडर्स ने पहले से इन शेयरों में पोजिशन ले रखी है उन्हें फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है. सभी मौजूदा अनएक्सपायर्ड कॉन्ट्रैक्ट अपनी तय अवधि तक सक्रिय रहेंगे. निवेशक मई, जून और जुलाई 2026 की एक्सपायरी तक सामान्य तरीके से ट्रेडिंग कर सकेंगे. एक्सचेंज ने यह भी कहा कि मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स के भीतर जरूरत के अनुसार नए स्ट्राइक प्राइस जोड़े जाएंगे. यानी फिलहाल ट्रेडिंग पूरी तरह बंद नहीं की गई है. केवल नए एक्सपायरी साइकल जारी करने पर रोक लगाई गई है.

सेबी के नए नियमों का असर

यह फैसला सेबी के अगस्त 2024 में जारी नए नियमों के आधार पर लिया गया है. सेबी ने डेरिवेटिव बाजार को मजबूत बनाने के लिए पात्रता मानकों को काफी सख्त कर दिया था. नियामक का कहना था कि केवल उन्हीं शेयरों को F&O में रखा जाए जिनमें पर्याप्त ट्रेडिंग और बाजार गहराई हो. इसी के तहत बाजार में एंट्री और एग्जिट के नियमों में बदलाव किया गया. कमजोर ट्रेडिंग वाले शेयरों को धीरे-धीरे बाहर किया जा रहा है.

F&O के लिए बढ़ाए गए मानक

सेबी ने F&O सेगमेंट में बने रहने के लिए कई वित्तीय मानकों को बढ़ा दिया था. मार्केट वाइड पोजिशन लिमिट को 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1500 करोड़ रुपये किया गया. एवरेज डेली डिलीवरी वैल्यू की सीमा 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 35 करोड़ रुपये कर दी गई. इसके अलावा मीडियन क्वार्टर सिग्मा ऑर्डर साइज को 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 75 लाख रुपये किया गया. इन बदलावों का मकसद बाजार में केवल मजबूत और ज्यादा सक्रिय शेयरों को बनाए रखना है.

यह भी पढ़ें- 6 फ्री शेयर दे रही यह कर्ज-मुक्त कंपनी, 5 महीने में 348% तक उछले शेयर, 25 मई है रिकॉर्ड डेट

प्रोडक्ट सक्सेस फ्रेमवर्क भी हुआ लागू

सेबी ने प्रोडक्ट सक्सेस फ्रेमवर्क नाम से नया सिस्टम भी लागू किया है. इसके तहत उन शेयरों को F&O से हटाया जाएगा जिनमें पर्याप्त ट्रेडिंग वॉल्यूम और ओपन इंटरेस्ट नहीं होगा. नए नियमों के अनुसार किसी शेयर में रोजाना कम से कम 75 करोड़ रुपये का औसत कारोबार होना जरूरी है. साथ ही फ्यूचर्स और ऑप्शंस में 500 करोड़ रुपये का औसत ओपन इंटरेस्ट भी जरूरी रखा गया है. इन मानकों को पूरा नहीं करने वाले शेयर धीरे-धीरे डेरिवेटिव सेगमेंट से बाहर किए जा सकते हैं.