एक हफ्ते में NSE 1% फिसला, BSE 6% चढ़ा! अब किस शेयर में है कमाई का मौका?

NSE की लिस्टिंग के बाद NSE और BSE के शेयरों की चाल अलग रही है. NSE का शेयर एक हफ्ते में करीब 1% गिरकर IPO प्राइस से नीचे है, जबकि BSE करीब 6% चढ़ा है. NSE पर ब्रोकरेज ने 1,950 रुपये और 1,965 रुपये के टारगेट दिए हैं. BSE पर 4,000 रुपये का टारगेट है, जबकि 3,000 रुपये सपोर्ट और 3,500 रुपये रेजिस्टेंस है.

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NSE और BSE के शेयरों ने अपनी लिस्टिंग के बाद अलग-अलग प्रदर्शन किया है. NSE का शेयर जहां अपने IPO प्राइस से नीचे कारोबार कर रहा है, वहीं इसी दौरान BSE के शेयर में तेजी देखने को मिली है. दोनों स्टॉक एक्सचेंज के शेयरों की चाल में यह अंतर ऐसे समय में देखने को मिल रहा है, जब निवेशकों की नजर बाजार में एक्सचेंज कारोबार, रेगुलेटरी बदलाव और ट्रेडिंग वॉल्यूम पर बनी हुई है. ऐसे में आइए जानते हैं कि NSE और BSE के शेयरों को लेकर ब्रोकरेज का क्या नजरिया है और निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए.

IPO प्राइस से नीचे

NSE का IPO सितंबर 2026 में आया था. कोई स्टॉक एक्सचेंज खुद अपने शेयर पर लिस्ट नहीं हो सकता, इसलिए NSE के शेयरों की लिस्टिंग BSE पर हुई. 24 सितंबर 2026 को NSE का शेयर 1,800 रुपये पर लिस्ट हुआ था. यह 1785 रुपये के IPO भाव से 25 रुपये यानी 0.8% प्रीमियम पर था.

6 अक्टूबर को 1 बजकर 30 मिनट पर NSE का शेयर BSE पर 1,746.45 रुपये पर कारोबार कर रहा. लेकिन इसके बावजूद यह लिस्टिंग प्राइस से 2.98% नीचे है. इसके अलावा पिछले एक हफ्ते में शेयर करीब 0.89% गिरा है.

NSE पर ब्रोकरेज की क्या राय है?

मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रोकरेज NSE के लंबी अवधि के प्रदर्शन को लेकर सकारात्मक हैं. PL ने NSE पर कवरेज शुरू करते हुए ‘अक्यूमुलेट’ रेटिंग दी है और 1,950 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है. यह टारगेट FY29E की 35 गुना P/E वैल्यूएशन के आधार पर रखा गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, YTDFY27 यानी वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक NSE की कैश मार्केट में करीब 93% हिस्सेदारी और स्टॉक व इंडेक्स फ्यूचर्स में करीब 100% हिस्सेदारी है. हालांकि, इंडेक्स ऑप्शंस में इसकी हिस्सेदारी घटकर करीब 65% रह गई है. रेगुलेटरी बदलावों के बीच CAS और प्रोपराइटरी ट्रेडिंग नियमों की वजह से भी वॉल्यूम पर असर पड़ा है.

FY21 से FY26 के बीच NSE का रेवेन्यू 25% CAGR से बढ़ा. हालांकि, PL को FY26-29E के दौरान ग्रोथ घटकर 11% CAGR रहने की उम्मीद है. इसका कारण इंडेक्स ऑप्शंस में हिस्सेदारी कम होना है.

रिपोर्ट के मुताबिक, Macquarie ने भी NSE पर कवरेज शुरू करते हुए ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग दी है और 1,965 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है. ब्रोकरेज ने NSE को उसकी मजबूत मार्केट हिस्सेदारी, सर्विस रेंज, टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और लिक्विडिटी के आधार पर “The Dominator” कहा है.

NSE शेयर का टेक्निकल सेटअप

रिपोर्ट में बताया गया है कि एक्सपर्ट्स ने NSE शेयर को होल्ड करने की राय दी है. शेयर के लिए 1,800 रुपये और 1,950 रुपये के टारगेट बताए गए हैं, जबकि 1,680 रुपये का स्टॉप-लॉस रखने की सलाह है. टेक्निकल तौर पर 1,700 रुपये को इमीडिएट सपोर्ट माना गया है. वहीं, 1,795 रुपये से 1,800 रुपये का स्तर शेयर के लिए रेजिस्टेंस जोन है.

BSE शेयर का NSE से बेहतर प्रदर्शन, लेकिन वॉल्यूम चिंता

NSE की लिस्टिंग के बाद BSE के शेयर ने बेहतर प्रदर्शन किया है. BSE का शेयर पिछले एक हफ्ते में करीब 6% चढ़ा है और 6 अक्टूबर को यह 3.5% बढ़कर 3,292.30 रुपये पर पहुंच गया. हालांकि, लंबी अवधि के अलग-अलग समय में इसका प्रदर्शन मिला-जुला रहा है.

BSE का शेयर एक महीने में 3% से ज्यादा और तीन महीने में 13% से ज्यादा गिरा है. वहीं, छह महीने में शेयर ने 15% से ज्यादा और एक साल में 57% का रिटर्न दिया है. यह ग्रो द्वारा दिए गए डेटा पर आधारित है.

BSE पर ₹4,000 का टारगेट

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि Macquarie ने BSE पर ‘Outperform’ रेटिंग के साथ कवरेज शुरू किया है. ब्रोकरेज ने ₹4,000 का टारगेट प्राइस दिया है, जो मौजूदा स्तर से 22% से ज्यादा की संभावित बढ़त दिखाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, इंडेक्स ऑप्शंस पर BSE का बढ़ता फोकस उसे NSE के मुकाबले मजबूत कंपटिटर बनाने में मदद कर रहा है. मार्केट शेयर में बढ़ोतरी और प्लेटफॉर्म के विस्तार से रेवेन्यू और मार्जिन में आगे ग्रोथ की गुंजाइश है.

BSE पर रखनी होगी सावधानी

वहीं, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि Nuvama Institutional Equities ने BSE को ‘Buy’ से घटाकर ‘Hold’ कर दिया है और टारगेट प्राइस को 21% घटाकर 3,240 रुपये कर दिया है. ब्रोकरेज ने FY27 के EPS अनुमान में 6.3% और FY28 के EPS अनुमान में 15% की कटौती की है.

BSE का औसत दैनिक प्रीमियम ट्रेडेड वॉल्यूम घटकर 18,100 करोड़ रुपये रह गया है, जो जनवरी 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है. इसके अलावा, RBI के सख्त बैंक गारंटी नियमों से इंटरमीडियरीज के लिए कैपिटल की जरूरत बढ़ सकती है और हाई-फ्रीक्वेंसी स्ट्रैटेजी में टर्नओवर की क्षमता प्रभावित हो सकती है.

BSE शेयर का टेक्निकल सेटअप

रिपोर्ट के मुताबिक, BSE में हालिया तेजी से शॉर्ट टर्म मोमेंटम में सुधार दिखा है. हालांकि, शेयर अभी भी 200-DEMA से नीचे कारोबार कर रहा है, जो बड़े ट्रेंड में बदलाव के लिए अहम रुकावट है. रिपोर्ट में 3,000 रुपये को मजबूत सपोर्ट और ₹3,500 को अहम रेजिस्टेंस बताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, 3,500 रुपये के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट और टिकाऊ क्लोजिंग होने पर आगे तेजी हो सकती है. फिलहाल एक्सपर्ट्स ने नई पोजिशन लेने के बजाय इंतजार करने की सलाह दी है.

NSE या BSE, किसमें क्या देखें?

NSE के लिए मजबूत मार्केट हिस्सेदारी और मुनाफे की क्षमता सकारात्मक पहलू हैं, लेकिन रेगुलेटरी बदलाव और इंडेक्स ऑप्शंस में घटती हिस्सेदारी जोखिम बने हुए हैं. दूसरी ओर, BSE को इंडेक्स ऑप्शंस में बढ़ती हिस्सेदारी से ग्रोथ का मौका मिल रहा है, लेकिन ट्रेडिंग वॉल्यूम में गिरावट, सख्त नियम और तकनीकी रेजिस्टेंस पर नजर रखना जरूरी है.

ऐसे में दोनों एक्सचेंज शेयरों की तस्वीर अलग नजर आती है. NSE के मामले में ब्रोकरेज लंबी अवधि के प्रदर्शन को लेकर सकारात्मक हैं, जबकि BSE में तेजी के बावजूद ट्रेडिंग वॉल्यूम और ऊंचे तकनीकी स्तरों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. निवेशकों के लिए टारगेट के साथ-साथ सपोर्ट, रेजिस्टेंस और कारोबार से जुड़े जोखिमों पर नजर रखना भी जरूरी होगा.

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