SEBI का बड़ा फैसला, CAS सिस्टम में फिलहाल नहीं होगा बदलाव; निवेशकों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद

सेबी ने मौजूदा सीएएस सिस्टम में फिलहाल किसी बदलाव की योजना से इनकार किया है. सेबी चेयरमैन तुहिन कांता पांडे के मुताबिक, ब्रोकर के ऐप में नई सुविधाएं आने और निवेशकों की जागरूकता बढ़ने के साथ शेयर बाजार में भागीदारी बढ़ सकती है. एनएसई क्लियरिंग के 30 साल पूरे होने पर उन्होंने भारत के सिक्योरिटीज मार्केट में क्लियरिंग और सेटलमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर भी बात की.

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SEBI: शेयर बाजार के निवेशकों के लिए सेबी ने बड़ा संदेश दिया है. सेबी के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने साफ कहा है कि फिलहाल मौजूदा सीएएस सिस्टम में किसी तरह का बदलाव करने की योजना नहीं है. उनका कहना है कि जैसे-जैसे ब्रोकर अपने ऐप में नई सुविधाएं जोड़ेंगे और निवेशक उनसे परिचित होंगे, बाजार में भागीदारी बढ़ती जाएगी. एनएसई क्लियरिंग के 30 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान तुहिन कांता पांडे ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था सुचारु रूप से काम कर रही है. उन्होंने कहा कि फिलहाल किसी बदलाव की जरूरत नहीं है. समय के साथ निवेशक नई सुविधाओं का इस्तेमाल करना सीखेंगे और इससे बाजार में उनकी भागीदारी बढ़ेगी.

तीन दशकों में बदला भारत का सिक्योरिटीज मार्केट

अपने संबोधन में पांडे ने कहा कि पिछले 30 वर्षों में भारत का सिक्योरिटीज मार्केट पूरी तरह बदल चुका है. इस बदलाव में क्लियरिंग और सेटलमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर की अहम भूमिका रही है. उन्होंने बताया कि क्लियरिंग कॉरपोरेशंस के बीच इंटरऑपरेबिलिटी ने कैपिटल एफिशिएंसी को बेहतर बनाया है और विभिन्न एक्सचेंजों के बीच क्लियरिंग तथा सेटलमेंट की प्रक्रियाओं को सरल किया है. उनके मुताबिक, इस व्यवस्था ने बाजार सहभागियों के लिए ऑपरेशनल जटिलताओं को कम किया है और पूरे सिस्टम को अधिक प्रभावी बनाया है.

सेटलमेंट और मार्जिन नियमों की समीक्षा जारी

हालांकि सेबी मौजूदा सीएएस सिस्टम में बदलाव नहीं कर रहा है, लेकिन रेगुलेटर क्लियरिंग कॉरपोरेशंस से जुड़े सेटलमेंट, मार्जिन और रिस्क मैनेजमेंट नियमों को अधिक तार्किक बनाने पर काम कर रहा है. सेबी कुछ अन्य प्रस्तावों पर भी विचार कर रहा है. इनमें अनिर्धारित छुट्टियों के दौरान सेटलमेंट से जुड़े कामकाज के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार करना शामिल है. इसके अलावा कैश मार्केट में सिक्योरिटीज के अर्ली पे-इन को स्वीकार किए जाने के बाद होने वाले बाय और सेल ट्रांजैक्शंस पर लागू मार्जिन रिक्वायरमेंट्स की भी समीक्षा की जा रही है.

AI के दौर में बदलना होगा रिस्क मैनेजमेंट

तुहिन कांता पांडे ने कहा कि बाजार नियमन के अगले चरण में केवल पारंपरिक काउंटरपार्टी और सेटलमेंट रिस्क पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं होगा. टेक्नोलॉजी फेल्योर, लिक्विडिटी शॉक्स, कॉमन एक्सपोजर और टेक्नोलॉजी सर्विस प्रोवाइडर्स की विफलता जैसे जोखिम एक साथ कई संस्थानों को प्रभावित कर सकते हैं.

उन्होंने कहा कि अब जोखिम को केवल किसी एक संस्था तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता, बल्कि संस्थानों के बीच मौजूद आपसी संबंधों को भी समझना जरूरी है. पांडे के मुताबिक, एआई का बढ़ता उपयोग सर्विलांस, रिस्क एनालिटिक्स और डिसीजन मेकिंग में नई संभावनाएं लेकर आएगा, लेकिन इसके साथ कुछ नई चुनौतियां भी सामने आएंगी. उन्होंने कहा कि ओपेक मॉडल्स, डेटा गवर्नेंस और ऑपरेशनल रिस्क जैसे पहलुओं पर भी बराबर नजर रखनी होगी.

पूरे सिस्टम की मजबूती पर रहेगा फोकस

सेबी चेयरमैन ने कहा कि भविष्य में रिस्क मैनेजमेंट को केवल जोखिम मापने तक सीमित नहीं रखना होगा, बल्कि संभावित जोखिमों का पहले से अनुमान लगाने की क्षमता भी विकसित करनी होगी. इसके लिए रेगुलेटर एंटिटी-लेवल रिस्क मैनेजमेंट से आगे बढ़कर नेटवर्क-लेवल और सिस्टम-वाइड रिस्क मैनेजमेंट पर जोर देगा.

उन्होंने कहा कि रिस्क मैनेजमेंट को बदलते बाजार और तकनीकी माहौल के साथ विकसित करना जरूरी है. नियामक का फोकस अब केवल किसी एक संस्था के जोखिम को समझने के बजाय पूरे वित्तीय सिस्टम की आपसी कड़ियों और संभावित जोखिमों को पहचानने पर रहेगा.

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