Opening Bell: निफ्टी 22500 के नीचे खुला, सेंसेक्स 230 अंक टूटा; इंफोसिस और अल्ट्राटेक सीमेंट में 3 फीसदी तक की गिरावट
Opening Bell: सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखी गई, क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. वहीं, निवेशक इस हफ्ते के आखिर में आने वाले अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले का इंतजार कर रहे हैं.

Opening Bell: कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच, भारतीय इंडेक्स 26 अक्टूबर को निफ्टी 22500 के नीचे गिरावट के साथ खुले. सेंसेक्स 269.07 अंक या 0.37 फीसदी नीचे 72,854.76 पर और निफ्टी 99.75 अंक या 0.44 फीसदी नीचे 22,500.25 पर था. लगभग 877 शेयर बढ़े, 1794 शेयर गिरे और 202 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ.
टॉप गेनर्स और लूजर्स
निफ्टी पर कोटक महिंद्रा बैंक, जेएसडब्ल्यू स्टील, डॉ रेड्डीज लैब्स, सिप्ला और सन फार्मा प्रमुख लाभ में रहे, जबकि श्रीराम फाइनेंस, इंफोसिस, बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस घाटे में रहे.
सेंसेक्स पर इंफोसिस और एशियन पेंट्स सबसे अधिक गिरावट वाले शेयर रहे, जो बाजार खुलने पर 2 फीसदी से अधिक गिर गए. कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा और अडानी पोर्ट्स के शेयरों में तेजी रही.
सेक्टोरल इंडेक्स
सेक्टर के मोर्चे पर निफ्टी फार्मा को छोड़कर बाकी सभी इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे थे. निफ्टी फार्मा में 0.38 फीसदी की तेजी रही. निफ्टी ऑटो, FMCG, IT और PSU बैंक, इन सभी में 1 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई.
इंफोसिस के शेयरों में बड़ी गिरावट
IT सर्विस सेक्टर की दिग्गज कंपनी इंफोसिस के शेयरों में 4 फीसदी तक की गिरावट आई और ये NSE पर 1,107 रुपये के दिन के निचले स्तर पर आ गए. कंपनी ने दूसरी तिमाही में अपने कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में सालाना आधार पर 6% की वृद्धि दर्ज की है, जो 7,823 करोड़ रुपये रही. पिछले साल की इसी अवधि में यह आंकड़ा 7,364 करोड़ रुपये था.
भारतीय इक्विटी बाजारों पर दबाव
ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ-टेक फर्म ‘एनरिच मनी’ के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा, ‘भारतीय इक्विटी बाजारों पर दबाव बने रहने की संभावना है, क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति को लेकर अनिश्चितता निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर डाल रही है. पश्चिम एशिया में जारी गतिरोध और इसके और अधिक बढ़ने का जोखिम, घरेलू बाजारों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है.’
उन्होंने कहा कि इस हफ्ते वैश्विक बाजारों के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27-28 अक्टूबर को होने वाली नीतिगत बैठक एक अहम घटना होगी.
फेडरल रिजर्व के रुख पर नजर
पोनमुडी ने आगे कहा, ‘हालांकि ऐसी पूरी उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, लेकिन निवेशक भविष्य की नीतिगत दिशा के संकेतों पर नजर रखेंगे. अगर फेडरल रिजर्व का रुख सख्त होता है, तो इससे अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड ऊंची बनी रह सकती है, डॉलर मजबूत हो सकता है और उभरते बाजारों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) सीमित हो सकता है. इसके विपरीत, अगर उनका रुख संतुलित रहता है, तो इससे जोखिम वाले एसेट्स को कुछ राहत मिल सकती है.’