कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट; 6 महीने के हाई से नीचे आया भाव; फिर भी क्यों बढ़ रही टेंशन?

Crude Oil Price Today: शुक्रवार को सऊदी अरब में हूति हमलों के बाद एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं, जिससे कीमतें लगभग 3 डॉलर ऊपर बंद हुई थीं. हफ्ते के अंत तक ब्रेंट 6% और WTI 2.3% की बढ़त के साथ बंद हुआ.

कच्चे तेल की कीमतें. Image Credit: Getty image

Highlights

  • कच्चे तेल की कीमतें एक और उतार-चढ़ाव वाले सप्ताह की ओर बढ़ रही हैं.
  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति का फैसला बाजार की दिशा तय कर सकता है.
  • वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमत 120 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है.

Crude Oil Price Today: कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को गिरावट दर्ज की गई. पिछले हफ्ते के आखिरी में तेल की कीमतें लगभग छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद सोमवार को गिर गईं. हालांकि, सऊदी अरब पर लगातार हो रहे हमलों के कारण सप्लाई को लेकर चिंताएं बनी रहीं.

US क्रूड फ्यूचर्स 1.60 डॉलर (यानी 1.55%) गिरकर 101.67 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए. ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.56 डॉलर (यानी 1.34%) गिरकर 115.16 डॉलर पर आ गए.

एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं

शुक्रवार को सऊदी अरब में हूति हमलों के बाद एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं, जिससे कीमतें लगभग 3 डॉलर ऊपर बंद हुई थीं. हफ्ते के अंत तक ब्रेंट 6% और WTI 2.3% की बढ़त के साथ बंद हुआ.

वीकेंड पर भी हमले जारी रहे. हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने शनिवार को सऊदी अरब के एयरपोर्ट और तेल सुविधाओं को निशाना बनाया. सऊदी अरब ने रविवार को बताया कि उसने कुछ और मिसाइलों और ड्रोन्स को रोक दिया है.

सऊदी अरब एयरपोर्ट पर काम शुरू

सऊदी अरब (जो दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक है) ने रविवार को अपने मुख्य एयरपोर्ट पर आंशिक रूप से कामकाज फिर से शुरू कर दिया. इससे पहले हूति हमलों में इस एयरपोर्ट को नुकसान पहुंचा था, जबकि इस विद्रोही समूह ने आगे भी इन सुविधाओं को निशाना बनाने की धमकी दी है.

कीमतों में उतार-चढ़ाव

विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें एक और उतार-चढ़ाव वाले सप्ताह की ओर बढ़ रही हैं. पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण आपूर्ति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति का फैसला बाजार की दिशा तय कर सकता है.

रेलिगेयर ब्रोकिंग में रिसर्च के एसवीपी (SVP) अजीत मिश्रा ने कहा, ‘निकट भविष्य में बाजार का रुख तेजी की ओर है, लेकिन यह काफी हद तक खबरों पर निर्भर है. ट्रेडर्स को अचानक आई तेजी के पीछे भागने से बचना चाहिए. बाजार की दिशा समझने के लिए उन्हें भू-राजनीतिक घटनाक्रमों, फेड के संकेतों और साप्ताहिक इन्वेंट्री डेटा पर नजर रखनी चाहिए.’

तेल की कीमतों में आ सकता है उछाल

उन्होंने आगे कहा कि अगर एनर्डी इंफ्रास्ट्रक्चर या होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली शिपिंग में कोई रुकावट आती है, तो वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमत 120 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. वहीं, अगर तनाव कम करने की दिशा में कोई ठोस प्रगति होती है, तो कीमतों में बड़ी गिरावट (करेक्शन) भी आ सकती है.

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड में कमोडिटीज रिसर्च के प्रमुख नवनीत दमानी ने कहा, ‘जैसे-जैसे होर्मुज और सऊदी अरब के आसपास बढ़ते हमलों पर ध्यान गया, कीमतों में तेजी और तेज हो गई. इससे एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्यात सुरक्षा को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं.’

यह भी पढ़ें: रेलवे कंटेनर ट्रांसपोर्टेशन में बड़े बदलाव की योजना, मिलेगी कई तरह छूट; अधिक एक्सपोर्ट आकर्षित करने की कोशिश