तबाही की दस्तक! भारतीय शेयर बाजार की खुल गई पोल, क्या तबाही अभी बाकी है?
शेयर बाजार में चल रही वैश्विक अनिश्चितताओं और युद्ध जैसी खबरों के बीच विशेषज्ञों ने निवेशकों को घबराने के बजाय अपने पोर्टफोलियो पर ध्यान देने की सलाह दी. उनका कहना है कि केवल खबरों के आधार पर फैसला लेना सही नहीं होता. पिछले 14 महीनों में बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद कई निवेशकों को एफडी से बेहतर रिटर्न मिला है. स्मॉल कैप शेयरों ने अप्रैल में शानदार प्रदर्शन किया, जबकि निफ्टी और बड़े शेयर उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए. एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेशकों को लंबी अवधि के लिए लार्ज, मिड और स्मॉल कैप में संतुलन बनाकर निवेश करना चाहिए.
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे एक बड़ा कारण MSCI इंडेक्स में बदलाव है. Reliance और HDFC जैसे बड़े भारतीय शेयरों का वेटेज कम हुआ है, जबकि ताइवान की चिप बनाने वाली कंपनियों का हिस्सा बढ़ गया है. इसी वजह से लार्ज कैप शेयरों पर दबाव देखने को मिला. हालांकि आने वाले 2-3 वर्षों में भारतीय बड़े शेयरों में फिर से अच्छी तेजी आने की उम्मीद जताई गई है. उनका कहना है कि निवेशकों को शोर और अफवाहों से दूर रहकर धैर्य के साथ निवेश करना चाहिए क्योंकि लंबी अवधि में मजबूत कंपनियां अच्छा रिटर्न देती हैं.
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