12.5% अमेरिकी टैरिफ का इन दो स्टॉक पर दिखेगा असर, टेक्सटाइल-अपैरल सेक्टर पर रहेगी खास नजर

अमेरिका की ओर से भारत समेत कुछ देशों से होने वाले आयात पर श्रम (Forced Labour) से जुड़े आरोपों के आधार पर 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है. हालांकि यह प्रस्ताव अभी समीक्षा के दौर में है, लेकिन इससे अमेरिकी बाजार पर निर्भर भारतीय टेक्सटाइल और गारमेंट कंपनियों की चिंता बढ़ गई है. ऐसे में निवेशकों की नजर उन कंपनियों पर है, जिनके कारोबार और मुनाफे पर इस संभावित टैरिफ का असर पड़ सकता है.

Trump Tariffs Impact on Indian Garments Industry Image Credit: Canva/ Money9

USA Market Oriented Stocks : भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर प्रस्तावित 12.5% अतिरिक्त टैरिफ का असर सबसे ज्यादा टेक्सटाइल, गारमेंट और लेदर सेक्टर की कंपनियों पर पड़ सकता है. हालांकि यह प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और अंतिम फैसला होना बाकी है, लेकिन अमेरिकी बाजार पर निर्भर भारतीय कंपनियों के लिए यह एक बड़ा जोखिम बनकर उभरा है. ऐसे में निवेशकों की नजर उन कंपनियों पर है जिनकी कमाई का बड़ा हिस्सा अमेरिका से आता है. इस रिपोर्ट में आप उन दो कंपनियों के बारे में जानेंगे जिन पर इस प्रस्तावित टैरिफ का असर हो सकता है.

Welspun Living: मार्जिन पर बढ़ सकता है दबाव

होम टेक्सटाइल सेक्टर की कंपनी Welspun Living अमेरिका को बड़ी मात्रा में तौलिए, बेडशीट और अन्य घरेलू उत्पाद निर्यात करती है. अगर अतिरिक्त टैरिफ लागू होता है तो अमेरिकी रिटेलर्स के लिए भारतीय उत्पाद महंगे हो जाएंगे. ऐसे में ग्राहक कंपनियां सप्लायर्स से कीमतें घटाने की मांग कर सकती हैं, जिससे वेलस्पन के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है.

फंडामेंटल्सवैल्यू
मार्केट कैप (Market Cap)₹13,778 करोड़
पी/ई रेश्यो (TTM)57.23
पी/बी रेश्यो (P/B Ratio)3.38
इंडस्ट्री पी/ई53.43
डेट-टू-इक्विटी रेश्यो0.29
आरओई (ROE)5.91%
ईपीएस (TTM)2.51
डिविडेंड यील्ड0.07%
बुक वैल्यू₹42.51
फेस वैल्यू₹1
Source – Groww

हालांकि, कंपनी की बाजार में मजबूत पकड़, बड़े ग्राहकों के साथ लंबे संबंध और ब्रांडेड उत्पादों की मौजूदगी इसे कुछ हद तक सुरक्षा मिल सकती है.

Gokaldas Exports: ऑर्डर शिफ्ट होने का खतरा

भारत की प्रमुख गारमेंट एक्पोर्ट करने वाली कंपनी Gokaldas Exports के लिए अमेरिका सबसे बड़े बाजारों में से एक है. यदि 12.5% टैरिफ लागू होता है तो भारतीय कपड़ों की कीमत बढ़ सकती है, जिससे अमेरिकी खरीदार दूसरे देशों से सोर्सिंग बढ़ा सकते हैं.

मापदंडआंकड़ा
मार्केट कैप (Market Cap)₹5,132 करोड़
पी/ई रेश्यो(TTM)51.23
पी/बी रेश्यो(P/B Ratio)2.38
इंडस्ट्री पी/ई32.56
डेट-टू-इक्विटी रेश्यो0.59
आरओई (ROE)4.63%
ईपीएस (TTM)13.67
डिविडेंड यील्ड0.00%
बुक वैल्यू₹294.84
फेस वैल्यू₹5
Source – Groww

इसके अलावा रिटेलर्स कम कीमत पर सप्लाई की मांग कर सकते हैं, जिससे कंपनी के मार्जिन प्रभावित हो सकते हैं. हालांकि चीन से बाहर उत्पादन शिफ्ट होने के वैश्विक ट्रेंड का फायदा कंपनी को मिल रहा है, जो लंबे समय में राहत दे सकता है.

टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर पर रहेगी खास नजर

प्रस्तावित टैरिफ का सबसे ज्यादा असर टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर की उन कंपनियों पर पड़ सकता है जिनकी आय का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से आता है. यदि लागत बढ़ती है तो अमेरिकी खरीदार वैकल्पिक सप्लाई चेन तलाश सकते हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों के ऑर्डर प्रभावित हो सकते हैं.

हालांकि जिन कंपनियों के पास मजबूत ब्रांड, बड़े पैमाने पर उत्पादन और डायवर्सिफाई मार्केट हैं, वे इस चुनौती का बेहतर सामना कर सकती हैं.

अंतिम फैसला आने तक बनी रहेगी अनिश्चितता

फिलहाल अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि यानी USTR का यह प्रस्ताव परामर्श और सुनवाई की प्रक्रिया में है. साथ ही भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत भी जारी हैं. ऐसे में टैरिफ की अंतिम दर, उसका दायरा और लागू होने की समयसीमा बदल सकती है.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.