डिमर्जर के बाद ऐसा क्या हुआ जो Vedanta को बाजार से चाहिए 3500 करोड़?

Vedanta मार्केट से और 3500 करोड़ की जरूरत क्यों है? अनिल अग्रवाल की वेदांता लिमिटेड को नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCDs) के प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए 3500 करोड़ तक जुटाने के लिए बोर्ड से मंजूरी मिल गई है. लेकिन कंपनी बार-बार बड़ी मात्रा में कर्ज क्यों जुटा रही है और इस नए फंडरेजिंग प्लान का असल में क्या मतलब है?

इस वीडियो में आपको इस बात की जानकारी मिलेगी कि NCDs क्या है, वेदांता पारंपरिक बैंक लोन लेने के बजाय यह रास्ता क्यों चुन रहा है, इन डिबेंचर में कौन इन्वेस्ट कर सकता है, 3500 करोड़ का इश्यू कैसे काम करेगा और यह फरवरी 2026 में मंजूर वेदांता के पहले के 3000 करोड़ के NCD इश्यू से कैसे अलग है?

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