आर्थिक मुश्किलों से लड़कर कुणाल शाह ने कैसे पलट दी जिंदगी! जानें CRED के फाउंडर के दिलचस्प किस्से

कुणाल शाह भारत के स्टार्टअप जगत के एक चमकते सितारे हैं, जिन्होंने गरीबी से लड़ते हुए अरबपति बनने का सफर तय किया. मुंबई में जन्मे कुणाल ने 15 साल की उम्र से काम शुरू किया और फिलॉसफी की डिग्री लेकर एमबीए बीच में छोड़ दिया. उन्होंने फ्रीचार्ज और क्रेड जैसी कंपनियां बनाकर करोड़ों लोगों की जिंदगी आसान की. उनकी कहानी बताती है कि जिज्ञासा, नई सोच और कड़ी मेहनत से कुछ भी हासिल किया जा सकता है.

कुणाल का जन्म 1983 में मुंबई में हुआ. 14 साल की उम्र में परिवार की आर्थिक मुश्किलों ने उन्हें झकझोर दिया, और 15 साल की छोटी उम्र में उन्होंने काम करना शुरू कर दिया. विल्सन कॉलेज से फिलॉसफी में ग्रेजुएशन किया, लेकिन एमबीए बीच में छोड़ दिया क्योंकि उन्हें बिजनेस की दुनिया में कूदना था. ये मुश्किलें उन्हें तोड़ने की बजाय मजबूत बनाती गईं.
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2009 में कुणाल ने अपना पहला स्टार्टअप पैसाबैक लॉन्च किया, जो प्रमोशनल डिस्काउंट्स पर फोकस करता था. ये छोटी शुरुआत थी, लेकिन कुणाल की नई सोच ने इसे सफल बनाया. उन्होंने देखा कि लोग डिस्काउंट्स और कैशबैक पसंद करते हैं, और इसी से उन्होंने बिजनेस की बुनियाद रखी. ये अनुभव उन्हें आगे की बड़ी सफलताओं के लिए तैयार करता गया, और बताता है कि छोटे आइडिया से बड़ा साम्राज्य बन सकता है.
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2010 में कुणाल ने संदीप टंडन के साथ मिलकर फ्रीचार्ज शुरू किया, जो मोबाइल रिचार्ज और बिल पेमेंट्स को आसान बनाता था. उन्होंने देखा कि स्मार्टफोन बढ़ रहे हैं, और लोगों को कैशबैक देकर उन्होंने लाखों यूजर्स जोड़े. कंपनी इतनी तेजी से बढ़ी कि 2015 में स्नैपडील ने इसे 400 मिलियन डॉलर (करीब 3,000 करोड़ रुपये) में खरीद लिया.
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2018 में कुणाल ने CRED लॉन्च किया, जो क्रेडिट कार्ड बिल्स को समय पर पे करने पर रिवार्ड्स देता है. उन्होंने देखा कि लोग क्रेडिट कार्ड से परेशान हैं, तो इसे सरल और फायदेमंद बनाया. आज क्रेड के 1 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड्स हैं, ये भारत के 20% क्रेडिट कार्ड पेमेंट्स हैंडल करता है, और 2021 में इसकी वैल्यू 2 बिलियन डॉलर (करीब 16,000 करोड़ रुपये) हो गई. आईपीएल स्पॉन्सरशिप से लेकर रेंट पे और शॉर्ट-टर्म लोन तक, कुणाल ने इसे बड़ा ब्रांड बनाया – ये साबित करता है कि समस्याओं को सॉल्यूशन में बदलकर कैसे स्टार्टअप उड़ान भरता है.
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कुणाल सिर्फ फाउंडर नहीं, बल्कि एंजेल इन्वेस्टर भी हैं. उन्होंने 259 स्टार्टअप्स में निवेश किया, जैसे रेजरपे और अनएकेडमी. हाल ही में उन्होंने नर्टुरेव में 1 मिलियन डॉलर इन्वेस्ट किया. अवॉर्ड्स जैसे ‘एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर’ (2016) और ‘इंडियाज मोस्ट एडमायर्ड एंटरप्रेन्योर’ (2019) उनकी मेहनत की गवाही देते हैं. मेंटरशिप और चैरिटी से वे युवाओं को आगे बढ़ाते हैं, जो बताता है कि सफलता सिर्फ पैसे की नहीं, बल्कि दूसरों को ऊपर उठाने की भी होती है.Source – Startup Talky
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