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IIT से की थी पढ़ाई, फिर छोड़ी Amazon की नौकरी, आज ये शख्स संभाल रहा करोड़ों का ज्वेलरी बिजनेस
भारत में ज्वेलरी का बाजार बहुत पुराना और पारंपरिक है, लेकिन गौरव सिंह कुशवाहा ने इसे पूरी तरह बदल दिया. आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई करने वाले गौरव ने अमेजन जैसी बड़ी कंपनी छोड़कर 2011 में ब्लूस्टोन शुरू किया. उन्होंने ऑनलाइन ज्वेलरी खरीदने को आसान, भरोसेमंद और आधुनिक बनाया. आज ब्लूस्टोन भारत की सबसे बड़ी ऑनलाइन ज्वेलरी कंपनियों में से एक है.
गौरव सिंह कुशवाहा ने आईआईटी दिल्ली से कंप्यूटर साइंस में डिग्री ली. पढ़ाई के बाद वे अमेजन में काम करने लगे, जहां उन्हें ई-कॉमर्स और ग्राहकों की पसंद के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिला. लेकिन उनका मन पारंपरिक ज्वेलरी बाजार को बेहतर बनाने में लगा. इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़कर अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला किया. रतन टाटा से मिलकर मिली सलाह ने उन्हें स्केलेबल और इनोवेटिव बिजनेस बनाने की प्रेरणा दी.
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2011 में गौरव ने ब्लूस्टोन की नींव रखी. उनका सपना था कि लोग घर बैठे प्रीमियम ज्वेलरी खरीद सकें, वो भी बिना किसी शक के. पहले ज्वेलरी सिर्फ दुकानों पर मिलती थी, लेकिन ब्लूस्टोन ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाकर सुविधा, पारदर्शिता और पर्सनलाइजेशन दिया. आज ब्लूस्टोन पर सोना, हीरा और प्लेटिनम की ज्वेलरी आसानी से ब्राउज और खरीदी जा सकती है. गौरव की दूरदर्शिता ने कंपनी को डिजिटल ज्वेलरी रिटेल में आगे ला दिया.
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गौरव की स्मार्ट प्लानिंग से ब्लूस्टोन छोटे स्टार्टअप से बड़ी कंपनी बनी. कंपनी ने टेक्नोलॉजी अपनाई, नए प्रोडक्ट्स लॉन्च किए और ग्राहकों की जरूरतों पर ध्यान दिया. आज ब्लूस्टोन के लाखों महीने के विजिटर्स हैं, अमेरिका, यूके जैसे देशों में शिपिंग होती है और ऑफलाइन स्टोर्स भी बढ़ रहे हैं. 2025 में ब्लूस्टोन का आईपीओ आया.
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गौरव ने ब्लूस्टोन में कई नई चीजें शुरू कीं. सबसे खास है ‘मेक योर ओन’ फीचर, जहां ग्राहक खुद डिजाइन चुनकर ज्वेलरी बना सकते हैं. कंपनी 30 दिन का रिटर्न और लाइफटाइम फ्री एक्सचेंज देती है. हर पीस सर्टिफाइड होता है, जिससे ग्राहकों का भरोसा बढ़ा. एआई और एआर जैसी टेक्नोलॉजी से वर्चुअल ट्राय-ऑन भी संभव है. इन सबसे ब्लूस्टोन ने ऑनलाइन ज्वेलरी खरीदने का नया स्टैंडर्ड सेट किया.
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गौरव की लीडरशिप में ब्लूस्टोन आगे बढ़ रहा है. कंपनी स्टोर्स बढ़ाकर 400 तक ले जाना चाहती है, टियर-2 शहरों में फैलना है और टेक्नोलॉजी में निवेश जारी रखना है. गौरव को कई अवॉर्ड मिले, जैसे फॉर्च्यून इंडिया के 40 अंडर 40 में जगह. उनकी कहानी बताती है कि सही विजन और मेहनत से कोई भी पारंपरिक बाजार बदला जा सकता है. गौरव सिंह कुशवाहा आज लाखों युवाओं के लिए इंस्पिरेशन हैं!