ड्रोन अटैक के बाद UAE की Ruwais रिफाइनरी बंद, मिडिल ईस्ट टेंशन से तेल सप्लाई पर मंडराया संकट

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच UAE की सरकारी तेल कंपनी ADNOC को अबू धाबी स्थित अपनी बड़ी Ruwais रिफाइनरी के एक हिस्से का संचालन बंद करना पड़ा है. ड्रोन हमले के बाद परिसर में आग लगने की घटना सामने आई, जिसके बाद सुरक्षा कारणों से रिफाइनरी को एहतियातन बंद किया गया. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्षेत्रीय तनाव बढ़ता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है.

ड्रोन अटैक के बाद यूएई का अहम रिफाइनरी बंद Image Credit: @Tv9

UAE Ruwais Shutdown after Drone Attack: मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब तेल इंडस्ट्री पर भी साफ दिखाई देने लगा है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सरकारी तेल कंपनी ADNOC को अबू धाबी स्थित अपने बड़े रुवैस (Ruwais) रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स का संचालन अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है. जानकारी के मुताबिक यह फैसला उस समय लिया गया जब परिसर के एक हिस्से में ड्रोन हमले के बाद आग लग गई. रायटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा है कि सुरक्षा के लिहाज से रिफाइनरी को एहतियातन बंद किया गया है, हालांकि इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है.

ड्रोन हमले के बाद लगी आग

अबू धाबी सरकार के मीडिया कार्यालय ने पुष्टि की कि एक ड्रोन हमले के बाद तेल परिसर के एक हिस्से में आग लगी थी. इसके बाद तुरंत आपातकालीन टीमें मौके पर पहुंचीं और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश शुरू कर दी गई. हालांकि अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि हमला परिसर के किस विशेष प्लांट या यूनिट पर हुआ. रिपोर्ट्स के मुताबिक, रुवैस कॉम्प्लेक्स अबू धाबी के तेल इंडस्ट्री का एक प्रमुख केंद्र है, जहां से रिफाइनिंग के साथ-साथ पेट्रोकेमिकल, फर्टिलाइजर और इंडस्ट्रियल गैस से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट भी संचालित होते हैं.

कितनी क्षमता है इस रिफाइनरी की?

रुवैस कॉम्प्लेक्स में मौजूद ADNOC की सुविधाएं मिलकर प्रतिदिन लगभग 9.22 लाख बैरल कच्चे तेल को रिफाइन करने की क्षमता रखती हैं. एनर्जी सेक्टर के जानकारों के मुताबिक यह सिर्फ एक रिफाइनरी नहीं बल्कि अबू धाबी की डाउनस्ट्रीम ऑयल इंडस्ट्री का मुख्य हब है, जहां कई बड़े औद्योगिक प्लांट भी स्थित हैं.

एक यूनिट पूरी तरह बंद

ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाली संस्था IIR Energy के अनुसार ड्रोन हमले के बाद Ruwais Refinery-2 (West) की मुख्य क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट, जिसकी क्षमता लगभग 4.17 लाख बैरल प्रतिदिन है, बंद करनी पड़ी. बताया जा रहा है कि कंपनी अब पूरे प्लांट में सुरक्षा जांच के तहत व्यापक स्तर पर शटडाउन की तैयारी कर रही है. इसके अलावा क्षेत्रीय तनाव के चलते 6 मार्च को भी Ruwais Refinery-1 (East) की कई यूनिट्स का उत्पादन लगभग 10 से 20 फीसदी तक घटा दिया गया था.

खाड़ी देशों में बढ़ रही तेल उद्योग की परेशानी

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. इसके जवाब में ईरान ने आसपास के कई देशों पर हमले किए हैं, जिसके चलते तेल से जुड़ा बुनियादी ढांचा भी निशाने पर आ रहा है. इस तनाव का असर खाड़ी के कई देशों में देखने को मिल रहा है-

  • सऊदी अरब में हाल ही में दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियों में से एक रास तनूरा रिफाइनरी पर हमले के बाद आग लगी थी, जिसे बाद में काबू कर लिया गया.
  • बहरीन की कंपनी Bapco Energies ने अपने रिफाइनरी ऑपरेशन पर फोर्स मेज्योर घोषित कर दिया है.
  • कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने भी तेल उत्पादन में कटौती शुरू कर दी है.
  • वहीं कतर ने अपने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) उत्पादन को अस्थायी रूप से रोक दिया है, जो वैश्विक LNG सप्लाई का लगभग 20 फीसदी हिस्सा है.

होर्मुज स्ट्रेट ने बढ़ाई टेंशन

विशेषज्ञों का कहना है कि इस पूरे संकट का सबसे बड़ा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ रहा है. यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन रास्तों में से एक है. अनुमान है कि दुनिया के कुल तेल कारोबार का लगभग 20 फीसदी हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है. अगर यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है.

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