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Tata Group में करते थे नौकरी, शुरू की खुद की हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी ACKO, अब नेट वर्थ ₹107 करोड़ पार
वरुण दुआ, एकको जनरल इंश्योरेंस कंपनी के संस्थापक और सीईओ, भारत की पहली डिजिटल इंश्योरेंस कंपनी को खड़ा करके एक यूनिकॉर्न बना चुके हैं. दिल्ली में जन्मे इस उद्यमी ने अपनी शिक्षा, अनुभव और चुनौतियों का सामना करते हुए कम समय में बड़ी सफलता हासिल की है. उनकी कंपनी की वैल्यूएशन आज 1.1 बिलियन डॉलर है और उन्होंने शार्क टैंक इंडिया में जज बनकर स्टार्टअप जगत को भी प्रभावित किया है.
वरुण दुआ का जन्म 25 फरवरी 1981 को दिल्ली में हुआ था. उनके पिता का नाम चंदर मोहन दुआ और मां का नाम रश्मि दुआ है. फिलहाल वे मुंबई में रहते हैं. उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की और उसके बाद अहमदाबाद के प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूल एमआईसीए से मास्टर्स पूरा किया. उनकी शिक्षा ने उन्हें बिजनेस और मार्केटिंग की मजबूत नींव दी, जो आगे चलकर उनकी सफलता का आधार बनी.
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शिक्षा पूरी करने के बाद वरुण ने लियो बर्नेट एडवरटाइजिंग में ट्रेनी के रूप में काम किया. फिर वे टाटा एआईजी लाइफ इंश्योरेंस और फ्रैंकलिन टेम्पलटन इन्वेस्टमेंट्स में मार्केटिंग मैनेजर बने. इंश्योरेंस सेक्टर में 10 साल से ज्यादा का अनुभव होने से उन्हें उत्पादों और ग्राहक सेवा की गहरी समझ मिली. व्यक्तिगत जीवन में उनकी पत्नी का नाम सपना राणा है. वे एक एंजेल इन्वेस्टर भी हैं और उन्होंने 9 राउंड में निवेश किया है, जिसमें हालिया निवेश मार्च 2024 में तोहैंड्स में हुआ.
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वरुण ने 2016 में एकको इंश्योरेंस की शुरुआत की, जो भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल इंश्योरेंस कंपनी है. इसका मोटो है- “इंश्योरेंस मेड ईजी: जीरो कमीशन, जीरो पेपरवर्क”. उन्होंने “फुल पैसा वसूल” कैंपेन से इसे लोकप्रिय बनाया. शुरुआत में 30 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई और अब कंपनी ने 6 राउंड में 458 मिलियन डॉलर का फंडिंग हासिल किया है. एकको की वैल्यूएशन 1.1 बिलियन डॉलर है और इसमें 4.5 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हैं. कंपनी जनरल और लाइफ इंश्योरेंस देती है और ऑटोमोबाइल पॉलिसी में 120% ग्रोथ दर्ज की है. इनका कुल नेट वर्थ 107 करोड़ रुपये हैं.
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एकको की शुरुआत में सबसे बड़ी चुनौती ट्रस्ट की थी. इंश्योरेंस सेक्टर में झूठे दावे और प्रीमियम सेटलमेंट की असफलताओं से लोग सशंकित थे. वरुण ने ग्राहकों को आसान और पारदर्शी सेवा देकर इस कमी को दूर किया. हालांकि, कोई बड़ी व्यक्तिगत विफलता या दुर्घटना का जिक्र नहीं है, लेकिन बाजार में प्रतिस्पर्धा और ट्रस्ट बनाने में संघर्ष ने उन्हें मजबूत बनाया. उन्होंने डिजिटल अप्रोच से पेपरवर्क हटाकर ग्राहकों का विश्वास जीता.
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वरुण दुआ शार्क टैंक इंडिया के पैनल में जज बने, जहां वे अपनी उद्यमिता अनुभव से युवा उद्यमियों को मार्गदर्शन देते हैं. इससे वे स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं और आर्थिक विकास में योगदान देते हैं. एक एंजेल इन्वेस्टर के रूप में उन्होंने बायबाय, वार्री और डेजर्व जैसी कंपनियों में निवेश किया. भविष्य में एकको हेल्थ इंश्योरेंस में विस्तार करेगी और टीम बढ़ाएगी. वरुण की सफलता युवाओं के लिए प्रेरणा है.