इस बिजनेस टाइकून का अमेरिका ने रिजेक्ट किया था H-1B वीजा, बना डाला Snapdeal, कौन हैं शार्क टैंक के जज कुणाल बहल

स्नैपडील के फाउंडर कुणाल बहल की कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो सपने देखता है और मुश्किलों से नहीं डरता. अमेरिका में पढ़ाई के बाद वीजा रिजेक्शन जैसी बड़ी चुनौती मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. भारत लौटकर उन्होंने स्नैपडील जैसी बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी बनाई, जो लाखों भारतीयों की ऑनलाइन शॉपिंग को आसान बनाती है. अगर आप भी बड़ा सपना देख रहे हैं, तो कुणाल बहल की यह कहानी आपको आगे बढ़ने की ताकत देगी!

कुणाल बहल का जन्म नई दिल्ली में हुआ. उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया के व्हार्टन स्कूल से मार्केटिंग और ऑपरेशंस में डुअल डिग्री ली, साथ ही इंजीनियरिंग भी की. प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में उन्होंने एनालिटिकल सोच और समस्या सॉल्व करने की कला सीखी. अमेरिका में रहकर उन्हें नई संस्कृति और इनोवेटिव विचारों का एक्सपोजर मिला. ग्रेजुएशन के बाद माइक्रोसॉफ्ट में काम किया, जहां उन्होंने बड़े टेक कंपनी के कामकाज को समझा. ये सब अनुभव बाद में उनके बिजनेस में काम आए और उन्हें मजबूत बनाया.
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ग्रेजुएशन के बाद अमेरिका में वर्क वीजा (H-1B) रिजेक्ट हो गया, जिससे माइक्रोसॉफ्ट की जॉब भी चली गई. लेकिन कुणाल ने इसे अंत नहीं, नई शुरुआत माना. भारत लौटकर हाई स्कूल के दोस्त रोहित बंसल के साथ मिले. पहले उन्होंने दादी की रेसिपी से डिटर्जेंट बिजनेस ट्राई किया, लेकिन जल्दी ही ऑनलाइन शॉपिंग की बड़ी संभावना दिखी. 2008 में स्नैपडील को डेली डील्स प्लेटफॉर्म के रूप में लॉन्च किया. 2011 में इसे फुल ऑनलाइन मार्केटप्लेस में बदला, जहां इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन, होम गुड्स सब मिलते हैं. ये फैसला दिखाता है कि रिजेक्शन भी बड़ा मौका बन सकता है!
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स्नैपडील शुरू करने में कई मुश्किलें आईं जैसे लॉजिस्टिक्स की कमी, ऑनलाइन पेमेंट पर भरोसा न होना और फ्लिपकार्ट, अमेजन जैसी बड़ी कंपनियों से कॉम्पिटिशन. कुणाल और रोहित ने डिलीवरी पार्टनरशिप बनाई और सबसे बड़ा इनोवेशन किया कैश ऑन डिलीवरी (COD). इससे लोगों को भरोसा हुआ कि सामान मिलने के बाद ही पेमेंट करेंगे. ये आइडिया भारत में ऑनलाइन शॉपिंग को क्रांति ला दी. उनकी हिम्मत बताती है कि मुश्किलें जितनी बड़ी हों, उतना ही बड़ा इनोवेशन करके उन्हें पार किया जा सकता है.
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कुणाल की लीडरशिप में स्नैपडील तेजी से बढ़ा. प्रोडक्ट कैटेगरी बढ़ाईं, लाखों सेलर्स जोड़े और फीचर्स जैसे स्नैपडील गोल्ड (फास्ट डिलीवरी, फ्री रिटर्न) लाए. सॉफ्टबैंक, अलीबाबा, फॉक्सकॉन जैसे बड़े निवेशकों से फंडिंग मिली, जिससे ऑपरेशंस स्केल हुए. 2016 तक 3 लाख से ज्यादा सेलर्स और 3.5 करोड़ प्रोडक्ट्स थे. स्नैपडील भारत का बड़ा नाम बन गया. ये दिखाता है कि सही विजन, पार्टनरशिप और लगातार बदलाव से छोटी शुरुआत भी बड़ा साम्राज्य बन सकती है.
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आज कुणाल सिर्फ फाउंडर नहीं, बल्कि टाइटन कैपिटल के जरिए नए स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं और उन्हें सपोर्ट करते हैं. शार्क टैंक इंडिया के जज के रूप में वे युवा उद्यमियों को फंडिंग के साथ मेंटरशिप देते हैं. पत्नी यशना और दो बच्चों के साथ फैमिली लाइफ बैलेंस रखते हैं. उनकी कहानी लाखों युवाओं को प्रेरित करती है कि सफलता मिलने के बाद दूसरों को ऊपर उठाना चाहिए. कुणाल बहल साबित करते हैं—सपने देखो, मेहनत करो, हार मत मानो, और दुनिया बदल दो!
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