फ्यूल स्टेशन पर कैसे चेक करें पेट्रोल की क्वालिटी, किस मीटर में दिखेगा नंबर, क्या है प्योरिटी का पैमाना?

अगर पेट्रोल भरवाते समय आपको उसकी क्वालिटी पर संदेह हो, तो इसकी जांच करने के लिए पेट्रोल पंप पर फिल्टर पेपर टेस्ट और डेंसिटी टेस्ट की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए. पेट्रोल पंप के सिटिजन चार्टर में इन दोनों तरीकों का जिक्र है. जानें इन्हें कैसे किया जाता है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

पेट्रोल पंप Image Credit:

Petrol Quality Check: अगर आपको पेट्रोल भरवाते समय उसकी गुणवत्ता पर संदेह हो, तो इसकी जांच के लिए कुछ आसान तरीके मौजूद हैं. पेट्रोल पंपों पर लगे सिटिजन चार्टर के मुताबिक, ग्राहक फिल्टर पेपर टेस्ट और डेंसिटी टेस्ट के जरिए पेट्रोल की क्वालिटी की जांच कर सकते हैं. इसके अलावा, सही मात्रा और सही कीमत की जांच करने का अधिकार भी ग्राहकों को दिया गया है.

फिल्टर पेपर टेस्ट से ऐसे करें जांच

सिटिजन चार्टर के अनुसार, अगर पेट्रोल की शुद्धता जांचनी है तो सबसे पहले डिस्पेंसिंग नोजल का मुंह साफ करें. इसके बाद नोजल के नीचे फिल्टर पेपर रखें और उस पर पेट्रोल की एक बूंद गिराएं.

चार्टर के मुताबिक, यदि यह बूंद करीब दो मिनट में बिना कोई दाग छोड़े उड़ जाती है, तो पेट्रोल सामान्य माना जाता है. लेकिन यदि फिल्टर पेपर पर जहां पेट्रोल की बूंद गिरी थी, वहां गुलाबी रंग का दाग दिखाई देता है, तो यह मिट्टी के तेल (MS) की मिलावट का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में ग्राहक तुरंत शिकायत दर्ज करा सकते हैं. चार्टर में यह भी कहा गया है कि अगर किसी रिटेल आउटलेट पर फिल्टर पेपर उपलब्ध नहीं है, तो ग्राहक की मांग पर डीलर इसे उपलब्ध कराने का जिम्मेदार होगा.

डेंसिटी टेस्ट क्या होता है?

पेट्रोल और डीजल की गुणवत्ता जांचने का दूसरा तरीका डेंसिटी टेस्ट है. इसके लिए 500 मिलीलीटर क्षमता वाला एक पारदर्शी और कैलिब्रेटेड हाइड्रोमीटर जार तथा हाइड्रोमीटर का इस्तेमाल किया जाता है. जांच के दौरान जार को डिस्पेंसिंग यूनिट से करीब तीन-चौथाई तक ईंधन से भरा जाता है. इसके बाद उसमें थर्मामीटर और हाइड्रोमीटर डालकर तापमान और घनत्व दर्ज किया जाता है. फिर इस घनत्व को 15 डिग्री सेल्सियस के मानक तापमान पर कन्वर्जन चार्ट की मदद से बदला जाता है और रिटेल आउटलेट पर उपलब्ध रेफरेंस डेंसिटी चार्ट से उसका मिलान किया जाता है.

किस मीटर में दिखेगा नंबर?

इसके अलावा अगर आपको पेट्रोल की क्वालिटी पर संदेह है, तो इसकी जांच डेंसिटी टेस्ट के जरिए की जा सकती है. इसके लिए पेट्रोल पंप पर हाइड्रोमीटर (Hydrometer) का इस्तेमाल किया जाता है. यह उपकरण ईंधन का घनत्व (Density) मापता है और इसी में डेंसिटी की रीडिंग यानी नंबर दिखाई देता है.

सही मात्रा और सही कीमत जांचने का भी अधिकार

सिटिजन चार्टर के अनुसार, सभी रिटेल आउटलेट पर 5 लीटर का माप उपलब्ध होना जरूरी है. अगर ग्राहक को ईंधन की मात्रा पर संदेह हो, तो वह इससे जांच करा सकता है. चार्टर में यह भी कहा गया है कि 2.5 मिलीलीटर प्रति 5 लीटर तक की त्रुटि स्वीकार्य सीमा के भीतर मानी जाएगी. इसके अलावा, ग्राहकों को पेट्रोल भरवाने से पहले डिस्प्ले पर दिखाई गई कीमत जांचनी चाहिए और डिलीवरी शुरू होने से पहले तथा खत्म होने के बाद मीटर की रीडिंग भी देखनी चाहिए.

मिलावट का संदेह हो तो क्या करें?

अगर ग्राहक को पेट्रोल या डीजल में मिलावट का संदेह हो, तो वह पहले फिल्टर पेपर टेस्ट या डेंसिटी टेस्ट करा सकता है. अगर इसके बाद भी संदेह बना रहे, तो संबंधित तेल कंपनी या पेट्रोल पंप पर उपलब्ध शिकायत व्यवस्था के जरिए शिकायत दर्ज करा सकता है.

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