ट्रंप के करीबी केविन वॉर्श बनेंगे फेडरल रिजर्व के नए चैयरमैन, ब्याज दरों और महंगाई पर बदलेगी अमेरिका की रणनीति?
अमेरिकी सीनेट ने केविन वॉर्श को फेडरल रिजर्व का नया चेयरमैन मंजूर कर दिया है. डोनाल्ड ट्रंप समर्थित वॉर्श अब जेरोम पॉवेल की जगह लेंगे. उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब अमेरिका महंगाई, ब्याज दर विवाद और आर्थिक अनिश्चितता से जूझ रहा है.

Kevin Warsh Federal Reserve chairman: अमेरिकी सीनेट ने केविन वॉर्श को दुनिया के सबसे शक्तिशाली केंद्रीय बैंक, ‘फेडरल रिजर्व’ के अगले अध्यक्ष के रूप में मंजूरी दे दी है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नामित वॉर्श, जेरोम पॉवेल की जगह लेंगे. पॉवेल का कार्यकाल 15 मई तक है. उनकी यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था महंगाई और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है.
बुधवार को सीनेट में हुए मतदान के दौरान वॉर्श के नाम पर मुहर लगी. हालांकि, उनकी राह आसान नहीं थी. रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने जेरोम पॉवेल के खिलाफ चल रही न्याय विभाग की जांच के कारण उनकी नियुक्ति में अड़ंगा लगाया था. लेकिन अप्रैल में जांच बंद होने के बाद वॉर्श के नाम को हरी झंडी मिल गई.
ट्रंप का दबाव और फेड की स्वायत्तता पर सवाल
वॉर्श की नियुक्ति को लेकर सबसे बड़ी बहस फेडरल रिजर्व की स्वायत्तता (Independence) को लेकर है. राष्ट्रपति ट्रंप अक्सर जेरोम पॉवेल की आलोचना करते रहे हैं और ब्याज दरों में कटौती की मांग करते आए हैं. विपक्ष और अर्थशास्त्रियों को डर है कि वॉर्श स्वतंत्र रूप से फैसले लेने के बजाय ट्रंप के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ा सकते हैं.
डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने तो वॉर्श को ट्रंप की “कठपुतली” तक कह डाला. हालांकि, अपनी पुष्टि सुनवाई (Confirmation hearing) के दौरान वॉर्श ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ने उन पर किसी भी फैसले के लिए दबाव नहीं डाला है और वे एक स्वतंत्र अध्यक्ष के रूप में काम करेंगे.
केविन वॉर्श के सामने हैं कई चुनौतियां
56 वर्षीय केविन वॉर्श के सामने चुनौतियों का पहाड़ है:
- महंगाई का संकट: ईरान युद्ध के कारण गैस की कीमतों में 50% का उछाल आया है, जिससे अमेरिका में महंगाई दर 3.8% तक पहुंच गई है.
- फेड में मतभेद: ब्याज दरों को लेकर फेड की समिति बंटी हुई है. पिछले महीने तीन दशकों में सबसे अधिक असहमति वाले वोट देखे गए.
- पॉवेल का साया: जेरोम पॉवेल ने अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद भी फेड के बोर्ड में बने रहने का फैसला किया है, जिससे सत्ता के दो केंद्र बनने का खतरा है.
वॉर्श का ‘नया विजन’
वॉर्श पहले भी फेड की कार्यप्रणाली के कड़े आलोचक रहे हैं. उन्होंने फेड में ‘निजाम बदलने’ (Regime Change) की वकालत की है. उनका मानना है कि फेड को अपनी भावी योजनाओं के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे बदलती आर्थिक स्थितियों में फैसले लेना मुश्किल हो जाता है.
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वॉर्श अपनी निजी संपत्ति को लेकर भी विवादों में रहे हैं. उनकी संपत्ति 100 मिलियन डॉलर से अधिक आंकी गई है, जिसमें स्पेसएक्स जैसी कंपनियों में हिस्सेदारी शामिल है. उन्होंने शपथ लेने के 90 दिनों के भीतर इन संपत्तियों को बेचने का वादा किया है. अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वॉर्श महंगाई को काबू करने और अर्थव्यवस्था को संभालने में कितने सफल होते हैं.