ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव! CAFE-3 नियमों में E25 बनेगा आधार, कंपनियों और ग्राहकों पर क्या होगा असर?
भारत सरकार जल्द ही CAFE-3 नियमों में बड़ा बदलाव कर सकती है. अब E20 की जगह E25 को बेस फ्यूल बनाने की तैयारी है, जिससे ऑटो कंपनियों पर नए उत्सर्जन और फ्यूल एफिशिएंसी नियम लागू होंगे. जानिए इसका कार कंपनियों और ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा.
भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में एक बड़ा मोड़ आने वाला है. ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) जल्द ही कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE-3) के नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन करने जा रही है. BS ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया है कि अब मुख्य अनुपालन समीकरण (Compliance Equation) के लिए E20 के बजाय E25 को ‘बेस फ्यूल’ यानी आधार ईंधन के रूप में अपनाया जाएगा.
क्या है नया समीकरण और क्यों बदला फैसला?
CAFE-3 नियमों का मुख्य उद्देश्य वाहन निर्माताओं के लिए कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन की अंतिम सीमा निर्धारित करना है. पहले इन गणनाओं के लिए E20 (20% इथेनॉल मिश्रण) को आधार माना जा रहा था, लेकिन अब सरकार E25 (25% इथेनॉल मिश्रण) की ओर रुख कर रही है. यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि CAFE-3 नियम अप्रैल 2027 से लागू होने वाले हैं और अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहेंगे.
वैश्विक तनाव और तेल की बढ़ती कीमतें
इस नीतिगत बदलाव के पीछे का सबसे बड़ा कारण हालिया वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां हैं. 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है. कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने भारत सरकार को मजबूर किया है कि वह पेट्रोल पर अपनी निर्भरता कम करें. यही वजह है कि सरकारी विभाग अब ऑटो कंपनियों के साथ मिलकर E20 से E25 की ओर तेजी से बढ़ने पर चर्चा कर रहे हैं.
ऑटोमोबाइल कंपनियों के सामने चुनौती
सरकार का यह फैसला न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा है, बल्कि विदेशी मुद्रा बचाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है. हालांकि, वाहन निर्माताओं के लिए यह राह इतनी आसान नहीं होगी.
- इंजन अपग्रेडेशन: कंपनियों को अपने इंजनों को E25 फ्यूल के अनुकूल बनाने के लिए तकनीक में भारी निवेश करना होगा.
- सख्त नियम: CAFE-3 के तहत यदि कंपनियां तय सीमा से अधिक उत्सर्जन करती हैं, तो उन पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान है.
- समय सीमा: अप्रैल 2027 तक पूरे पोर्टफोलियो को नए मानकों पर लाना एक बड़ी रेस की तरह होगा.
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भारत वर्तमान में फ्यूल स्टेशनों पर E20 ईंधन अनिवार्य कर चुका है, लेकिन युद्ध और ऊर्जा संकट ने देश को और अधिक आत्मनिर्भर होने का संकेत दिया है.
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