अब यूरोप में एक्सपोर्ट होंगे भारतीय डेयरी प्रोडक्ट, सरकार ने तैयार किया बड़ा प्लान; किसानों को होगा फायदा

भारत सरकार अगले दो वर्षों में 9 राज्यों को FMD-Free बनाने की तैयारी कर रही है, ताकि यूरोप के डेयरी बाजार में भारतीय डेयरी प्रोडक्ट के एक्सपोर्ट का रास्ता खुल सके. ICAR के कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि 2030 तक पूरे देश को FMD-Free बनाने का लक्ष्य है. सरकार स्वदेशी वैक्सीन, डिजिटल ट्रैकिंग और OTP आधारित वेरिफिकेशन सिस्टम के जरिए पशुओं में FMD पर नियंत्रण की दिशा में काम कर रही है.

Dairy Export: भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, लेकिन इसके बावजूद यूरोप जैसे विकसित देशों में भारतीय डेयरी प्रोडक्ट की पहुंच बेहद सीमित रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह FMD (खुरपका-मुंहपका) को माना जाता है. अब केंद्र सरकार इस बाधा को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है. सरकार का लक्ष्य अगले दो वर्षों में कम से कम 9 राज्यों को FMD-Free घोषित कराना है, ताकि भारत को यूरोप के डेयरी बाजार में प्रवेश मिल सके. नई दिल्ली में ICAR के 98वें स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि सरकार ने 2030 तक भारत को पूरी तरह FMD-Free बनाने का लक्ष्य तय किया है. इसके लिए व्यापक स्तर पर स्वदेशी वैक्सीन, डिजिटल ट्रैकिंग और टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है.

यूरोप में डेयरी एक्सपोर्ट की राह क्यों मुश्किल रही

राजीव रंजन सिंह ने कहा कि भारत दूध उत्पादन में दुनिया में पहले स्थान पर है, लेकिन विकसित देश, खासकर यूरोपीय देश, डेयरी प्रोडक्ट के आयात के लिए FMD-Free सर्टिफिकेशन को अनिवार्य शर्त मानते हैं. यदि वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन फॉर एनिमल हेल्थ भारत के इन 9 राज्यों को FMD-Free प्रमाणित कर देता है, तो भारतीय डेयरी उद्योग को पहली बार यूरोप जैसे बड़े और प्रीमियम बाजारों में एक्सपोर्ट का अवसर मिल सकता है.

FMD के मामलों में आई बड़ी गिरावट

सरकार के अनुसार, लगातार चलाए गए टीकाकरण अभियान का असर अब साफ दिखाई देने लगा है.

  • 2021 में FMD के 105 मामले सामने आए थे.
  • 2025 में यह संख्या घटकर केवल 40 रह गई.

सरकार ने ऐसे 9 राज्यों की पहचान की है, जहां लंबे समय से FMD के मामले बेहद कम रहे हैं और टीकाकरण का पूरा चक्र भी पूरा हो चुका है. यही राज्य FMD-Free सर्टिफिकेशन के पहले दावेदार होंगे.

डिजिटल ट्रैकिंग से बढ़ेगी पारदर्शिता

सरकार ने पशुओं के टीकाकरण की निगरानी के लिए डिजिटल व्यवस्था भी मजबूत की है. अब तक 38 करोड़ पशुओं को 13 अंकों का डिजिटल आइडेंटिटी टैग दिया जा चुका है. इसके अलावा इस वर्ष OTP आधारित वेरिफिकेशन सिस्टम भी शुरू किया गया है. इस व्यवस्था के तहत पशु मालिक के मोबाइल पर OTP भेजा जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि संबंधित पशु का टीकाकरण वास्तव में हुआ है. यह कदम उन शिकायतों के बाद उठाया गया, जिनमें कुछ राज्यों में बिना टीका लगाए ही रिकॉर्ड में वैक्सीनेशन दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी.

स्वदेशी वैक्सीन पर जोर

मंत्री ने बताया कि ICAR और डिपार्टमेंट ऑफ एनिमल हसबेंड्री ने मिलकर कई स्वदेशी वैक्सीन विकसित की हैं. ये वैक्सीन केवल FMD ही नहीं, बल्कि CSF और PPR जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने में भी मदद कर रही हैं. इसके अलावा कार्यक्रम के दौरान देश में विकसित अफ्रीकन स्वाइन फीवर वैक्सीन भी लॉन्च की गई, जिसे पशुपालन क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

मछली एक्सपोर्ट में भी दिखी मजबूती

मंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 में अमेरिका द्वारा लगाए गए 58 प्रतिशत टैरिफ का शुरुआती असर भारतीय समुद्री खाद्य निर्यात पर जरूर पड़ा, क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा सीफूड मार्केट है. इसके बावजूद भारत का सीफूड एक्सपोर्ट बढ़कर 73,891 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के 62,408 करोड़ रुपये की तुलना में काफी अधिक है. सरकार का मानना है कि विभिन्न देशों के साथ हुए FTA की वजह से भारतीय निर्यातकों को नए बाजार मिले हैं, जिससे अमेरिका पर निर्भरता कुछ हद तक कम हुई है.

रिसर्च के लिए 123 करोड़ रुपये

सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत ICAR को 123 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. इस राशि का उपयोग पशु एवं मत्स्य रोग नियंत्रण, एक्वाकल्चर और नई नस्लों के विकास से जुड़े रिसर्च में किया जाएगा. साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र नेटवर्क के माध्यम से इन शोधों का लाभ सीधे किसानों और पशुपालकों तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए हैं.

सरकार का मानना है कि यदि FMD-Free सर्टिफिकेशन का लक्ष्य समय पर हासिल हो जाता है, तो भारत के डेयरी एक्सपोर्ट को नई गति मिलेगी और दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देश के लिए यूरोप का बहुप्रतीक्षित बाजार भी खुल सकता है.

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