भारत में चीन से जुड़े 370 मिलियन डॉलर के निवेश की तैयारी! 10 साल बाद ऑटो सेक्टर में होगी बड़ी एंट्री

भारत सरकार जल्द ही Horse Powertrain Ltd. के 370 मिलियन डॉलर के निवेश को मंजूरी दे सकती है. यह लगभग 10 वर्षों में चीन से जुड़ी किसी ऑटो कंपनी का भारत में सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग निवेश होगा. इस निवेश के तहत Renault के चेन्नई प्लांट में हाइब्रिड पावरट्रेन और इंजन का निर्माण किया जाएगा, जिनका इस्तेमाल Renault और Nissan की गाड़ियों में होगा.

भारत-चीन Image Credit: Bloomberg Creative/Getty Images

China Investment India: भारत सरकार जल्द ही चीन से जुड़ी ऑटो कंपनी Horse Powertrain Ltd. के लगभग 370 मिलियन डॉलर के निवेश को मंजूरी दे सकती है. यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो यह पिछले लगभग एक दशक में किसी चीन से जुड़ी ऑटो कंपनी का भारत में सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग निवेश होगा. इस निवेश के जरिए कंपनी भारत में आधुनिक हाइब्रिड पावरट्रेन और इंजन का निर्माण करेगी. इससे देश में स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ हाइब्रिड वाहनों के उत्पादन में भी तेजी आने की उम्मीद है. यह मंजूरी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि मार्च 2026 में भारत सरकार ने पड़ोसी देशों से आने वाले निवेश को स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के उद्देश्य से कुछ शर्तों के साथ मंजूरी देने की नीति में ढील दी थी. इसके बाद यह पहला बड़ा निवेश हो सकता है.

Renault के प्लांट में होगा निवेश

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, Horse Powertrain Ltd. यह निवेश चरणबद्ध तरीके से करेगी. इसकी शुरुआत Renault के चेन्नई स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से होगी. कंपनी यहां अत्याधुनिक स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड पावरट्रेन और इंजन बनाएगी, जिनका इस्तेमाल भारत में बिकने वाली Renault और Nissan की गाड़ियों में किया जाएगा.

स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड तकनीक में पारंपरिक इंटरनल कंबशन इंजन के साथ हाई-कैपेसिटी इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी का इस्तेमाल किया जाता है. इससे ईंधन की खपत कम होती है और बेहतर माइलेज मिलता है. भारत में बढ़ती ईंधन कीमतों और बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी की मांग के बीच इस तकनीक की अहमियत लगातार बढ़ रही है.

किन कंपनियों की है हिस्सेदारी

Horse Powertrain Ltd. की स्थापना वर्ष 2024 में चीन की Geely और फ्रांस की Renault ने 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ ज्वाइंट वेंचर के रूप में की थी. बाद में Saudi Aramco ने कंपनी में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी. इसके बाद Geely और Renault दोनों के पास 45-45 प्रतिशत हिस्सेदारी है.

लंदन मुख्यालय वाली इस कंपनी के दुनिया भर में 18 मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं और करीब 19,000 कर्मचारी कार्यरत हैं. कंपनी पावरट्रेन तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी रखती है.

Renault और Nissan की रणनीति को मिलेगा फायदा

भारत में Renault और Nissan पिछले कुछ वर्षों से सीमित बाजार हिस्सेदारी के साथ कारोबार कर रही हैं. अब दोनों कंपनियां एसयूवी सेगमेंट और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस करते हुए अपनी रणनीति बदल रही हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, Renault इस साल के अंत तक भारत में नई Duster एसयूवी लॉन्च कर सकती है, जिसमें Horse Powertrain की हाइब्रिड तकनीक का इस्तेमाल होने की संभावना है. इसके अलावा कंपनी अन्य ऑटो कंपनियों को भी अपने पावरट्रेन की सप्लाई करने को लेकर शुरुआती स्तर पर बातचीत कर रही है.

हाइब्रिड वाहनों की बढ़ती मांग का मिलेगा फायदा

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री धीरे-धीरे बढ़ रही है, लेकिन फिलहाल हाइब्रिड वाहनों की मांग अधिक तेजी से बढ़ रही है. ग्राहक बेहतर माइलेज और कम ईंधन खर्च वाले विकल्प तलाश रहे हैं. ऐसे में Horse Powertrain का यह निवेश भारत में हाइब्रिड तकनीक के स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देगा और आयात पर निर्भरता कम करने में भी मदद करेगा.

यदि इस निवेश को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो इससे भारत के ऑटो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी. साथ ही, भारत वैश्विक ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए हाइब्रिड पावरट्रेन निर्माण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है.

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