पेट्रोल कारों का दौर खत्म? CNG, हाइब्रिड और EV ने मचाई हलचल

भारत के कार बाजार में पेट्रोल की पकड़ कमजोर हो रही है. CNG, हाइब्रिड और EV की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है. जुलाई में इन तीनों की संयुक्त हिस्सेदारी 40.59% पहुंच गई, जबकि पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी 41.68% रही.

CNG, हाइब्रिड और EV Image Credit:

भारत में कार खरीदने वालों के पास अब पहले के मुकाबले ज्यादा विकल्प हैं. यही वजह है कि पेट्रोल कारों की पकड़ धीरे-धीरे कमजोर होती दिख रही है. महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े बाजारों में पेट्रोल कारों की बिक्री पर दबाव है, जबकि CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों की मांग बढ़ रही है. कुछ बाजारों में डीजल कारों की लोकप्रियता भी फिर बढ़ती दिख रही है.

इसके अलावा E20 पेट्रोल को लेकर भी ग्राहकों की चिंता बढ़ रही है. कार खरीदते समय लोग अब माइलेज, गाड़ी की E20 के साथ अनुकूलता और लंबे समय तक इस्तेमाल पर इसके असर जैसे सवालों पर भी ध्यान दे रहे हैं.

पेट्रोल से दूरी की वजह सिर्फ E20 नहीं

ऑटो कंपनियों का कहना है कि पेट्रोल कारों की मांग में कमी के लिए सिर्फ E20 पेट्रोल को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता. असली बदलाव यह है कि ग्राहकों के पास अब कई विकल्प मौजूद हैं. इन विकल्पों की कीमत, माइलेज और उपलब्धता उन्हें पेट्रोल कारों के मुकाबले ज्यादा आकर्षक बना रही है.

यानी बाजार में बदलाव सिर्फ पेट्रोल से इलेक्ट्रिक कारों की ओर नहीं हो रहा है. कम चलने की लागत चाहने वाले ग्राहक CNG कारों को पसंद कर रहे हैं. वहीं, बेहतर माइलेज चाहने वाले लोगों के लिए हाइब्रिड कारें एक बीच का रास्ता बन रही हैं. इनमें पेट्रोल इंजन के साथ इलेक्ट्रिक तकनीक मिलती है और चार्जिंग स्टेशन पर निर्भरता भी कम रहती है.

CNG, हाइब्रिड और EV की हिस्सेदारी बढ़ी

इस बदलाव का असर आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है. फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के उपाध्यक्ष साई गिरिधर के मुताबिक, E20 को लेकर ग्राहकों की झिझक ने कुछ खरीदारों को CNG, हाइब्रिड और EV की ओर जाने के लिए प्रेरित किया है.

जुलाई में CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों की कुल हिस्सेदारी बढ़कर 40.59% हो गई. वहीं पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी 41.68% रही. यानी दोनों के बीच अंतर सिर्फ 1.09 प्रतिशत रह गया है. एक साल पहले यह अंतर 13.21 प्रतिशत था.

डीजल की भी कुछ बाजारों में वापसी

पेट्रोल को चुनौती सिर्फ एक तकनीक से नहीं मिल रही है. CNG को कम रनिंग कॉस्ट के कारण ग्राहक पसंद कर रहे हैं. हाइब्रिड कारें बेहतर माइलेज के साथ पेट्रोल इंजन की सुविधा देती हैं. दूसरी ओर, चार्जिंग नेटवर्क बढ़ने के साथ EV की मांग भी धीरे-धीरे बढ़ रही है.

कुछ बाजारों और सेगमेंट में डीजल कारों की मांग भी फिर देखने को मिल रही है. खासकर ज्यादा लंबी दूरी, हाईवे ड्राइविंग और बेहतर ईंधन दक्षता चाहने वाले ग्राहक डीजल को अब भी पसंद कर रहे हैं.

कंपनियां किसी एक तकनीक पर नहीं लगा रहीं दांव

ऑटो कंपनियां भी ग्राहकों की बदलती पसंद को देखते हुए किसी एक तकनीक पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं. मारुति सुजुकी की CNG कारों को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है, वहीं कंपनी EV और दूसरी तकनीकों पर भी काम कर रही है.

हुंडई भी CNG पर अपना फोकस बढ़ा रही है और साथ ही EV, पेट्रोल और डीजल मॉडल पेश कर रही है. टाटा मोटर्स और महिंद्रा भी इलेक्ट्रिक और पेट्रोल-डीजल जैसे अलग-अलग पावरट्रेन वाले मॉडल पर काम कर रही हैं.

कुल मिलाकर, भारतीय कार बाजार में पेट्रोल की जगह अब CNG, हाइब्रिड और EV जैसे विकल्प तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं. E20 को लेकर ग्राहकों की चिंता इस बदलाव को तेज कर सकती है, लेकिन बाजार की दिशा बदलने की बड़ी वजह लोगों के पास बढ़ते विकल्प और उनकी अलग-अलग जरूरतें हैं.

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