पेट्रोल, डीजल, CNG, Hybrid या EV? बढ़ती ईंधन कीमतों के दौर में जानिए कौन-सी कार पड़ेगी सबसे सस्ती
पेट्रोल, डीजल, CNG, हाइब्रिड और EV में कौन-सी कार सबसे ज्यादा बचत कराती है? बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच यह सवाल हर खरीदार के मन में है. आपकी सालाना रनिंग, बजट और इस्तेमाल के आधार पर हर फ्यूल टेक्नोलॉजी के फायदे और नुकसान अलग हैं. जानिए किस विकल्प में सबसे कम खर्च और सबसे ज्यादा फायदा है.

भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में ईंधन की बढ़ती कीमतें एक बार फिर कार खरीदारों को सोचने पर मजबूर कर रही हैं. आज के समय में गाड़ी की कुल कीमत से ज्यादा उसके ‘रनिंग कॉस्ट’ (यानी चलाने का खर्च) पर ध्यान दिया जा रहा है. यही वजह है कि माइलेज और फ्यूल एफिशिएंसी अब गाड़ी खरीदने का सबसे बड़ा पैमाना बन चुके हैं. भारतीय बाजार में इस वक्त खरीदारों के पास पेट्रोल, डीजल, CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक (EV) के रूप में पांच बड़े विकल्प मौजूद हैं. लेकिन आपके बजट और रनिंग के हिसाब से कौन सा सौदा सबसे किफायती रहेगा, आइए आंकड़ों और फैक्ट्स के साथ समझते हैं.
पेट्रोल कारें
पेट्रोल गाड़ियां भारतीय बाजार में आज भी सबसे आम और पहली पसंद बनी हुई हैं. डीजल या हाइब्रिड के मुकाबले इन्हें खरीदना सस्ता होता है और शहर में इनकी परफॉर्मेंस भी काफी स्मूथ रहती है.
- किसके लिए सही: जिन लोगों का सालाना सफर 10,000 किलोमीटर से कम है, उनके लिए पेट्रोल कारें आज भी आर्थिक रूप से सबसे व्यावहारिक हैं.
- चुनौती: बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में भारी ट्रैफिक के कारण पेट्रोल कारों का रियल-वर्ल्ड माइलेज काफी कम हो जाता है, खासकर टर्बो-पेट्रोल SUVs में.
डीजल गाड़ियां
आधुनिक डीजल इंजन पहले से कहीं ज्यादा रिफाइंड हो चुके हैं, लेकिन सख्त एमिशन नॉर्म्स और ऊंची शुरुआती कीमत के कारण शहरी खरीदारों के बीच इनका क्रेज थोड़ा कम हुआ है.
- किसके लिए सही: जो लोग सालाना 15,000 से 20,000 किलोमीटर या उससे अधिक गाड़ी चलाते हैं. हाईवे पर बेहतरीन माइलेज देने के कारण यह लंबी दूरी के ड्राइवरों और बड़ी SUV खरीदारों के लिए आज भी मुनाफे का सौदा है.
CNG और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड
शहरी कम्यूटर्स के लिए ये दोनों ही तकनीकें जेब का बोझ कम कर रही हैं. मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और हुंडई जैसी कंपनियों ने अपने फैक्ट्री-फिटेड CNG पोर्टफोलियो को काफी बड़ा कर दिया है. वहीं टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस, मारुति ग्रैंड विटारा और होंडा सिटी जैसी गाड़ियों ने हाइब्रिड को लोकप्रिय बनाया है.
CNG के फायदे और नुकसान: शहर में प्रति किलोमीटर सबसे कम खर्च CNG में आता है. लेकिन बूट स्पेस (डिकी की जगह) कम होना, थोड़ा कम पिकअप और गैस स्टेशनों पर लंबी कतारें इसकी बड़ी कमियां हैं.
स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड: यह तकनीक बिना चार्जिंग के झंझट के शहर के बंपर-टू-बंपर ट्रैफिक में गाड़ी को इलेक्ट्रिक मोड पर चलाती है, जिससे भारी बचत होती है. हालांकि, इनकी ऊंची कीमत की वजह से अतिरिक्त निवेश को वसूलने में खरीदार को कई साल लग जाते हैं.
EV और BaaS मॉडल
अगर कुल रनिंग कॉस्ट की बात करें, तो इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EV) इस समय रेस में सबसे आगे हैं. पेट्रोल, डीजल या CNG के मुकाबले इन्हें चार्ज करने का खर्च बेहद कम आता है.
- BaaS (बैटरी-एज-ए-सर्विस): पहले ईवी खरीदना काफी महंगा था, लेकिन इस मॉडल ने शुरुआती कीमत को काफी कम कर दी है. इसमें गाड़ी की कीमत से बैटरी की लागत को अलग कर दिया जाता है, जिससे ईवी अब पेट्रोल-डीजल कारों के बजट में आ गई हैं.
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एमजी मोटर इंडिया (MG Motor India) देश में ‘विंडसर ईवी’ के साथ इस मॉडल को लाने वाली शुरुआती कंपनियों में से है और फिलहाल उसके पास BaaS सपोर्ट वाला सबसे बड़ा ईवी पोर्टफोलियो है. अब टाटा मोटर्स, मारुति सुजुकी और किया इंडिया जैसी कंपनियां भी इस मॉडल को लाने की तैयारी में हैं.