एयर इंडिया के नए CEO Gebremariam की एंट्री, सामने हैं कई बड़ी चुनौतियां; चंद्रशेखरन ने दी है ये सलाह
एयर इंडिया के नए CEO-designate Tewolde Gebremariam ने अपनी नई जिम्मेदारी संभाल ली है. इथियोपियन एयरलाइंस के पूर्व ग्रुप CEO Gebremariam के सामने एयर इंडिया के ऑपरेशंस, सेफ्टी, इंजीनियरिंग, मेंटेनेंस और फ्लीट एक्सपेंशन से जुड़ी कई बड़ी चुनौतियां हैं. बढ़ी हुई फ्यूल कॉस्ट्स, एयरस्पेस डिसरप्शंस, पायलट अवेलेबिलिटी और एयरक्राफ्ट डिलीवरी शेड्यूल्स भी उनके लिए अहम मुद्दे होंगे.

Air India CEO: एयर इंडिया के नए CEO-designate Tewolde Gebremariam ने अपनी नई जिम्मेदारी संभाल ली है. सोमवार को टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने एयर इंडिया एम्प्लॉइज के साथ टाउन हॉल मीटिंग की, जिसमें उन्होंने Gebremariam को एयरलाइन के वर्कफोर्स से इंट्रोड्यूस कराया. यह Gebremariam की एयर इंडिया एम्प्लॉइज के साथ पहली सीधी बातचीत रही. उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब एयर इंडिया ऑपरेशनल और फाइनेंशियल चैलेंजेज के बीच अपने बिजनेस को मजबूत करने और फ्लीट एक्सपेंशन को सस्टेनेबल परफॉर्मेंस में बदलने की कोशिश कर रही है.
इथियोपियन एयरलाइंस के ग्रुप CEO रह चुके हैं Gebremariam
Tewolde Gebremariam इससे पहले इथियोपियन एयरलाइंस के ग्रुप CEO रह चुके हैं. एयर इंडिया की जिम्मेदारी संभालने के बाद उनकी प्राथमिकता एयरलाइन के ऑपरेशंस का आकलन करने के साथ-साथ सेफ्टी और इंजीनियरिंग कैपेबिलिटीज की समीक्षा करना है. वह ऑपरेशनल गैप्स की पहचान करने, सेफ्टी और इंजीनियरिंग प्रोसेसेज की समीक्षा करने और एयरलाइन की रिलायबिलिटी को बेहतर करने के उपायों पर फोकस करेंगे.
Gebremariam के सामने यह भी अहम चुनौती होगी कि एयर इंडिया के मौजूदा सिस्टम्स, प्रोसेसेज और टेक्निकल इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ते फ्लीट को संभालने के लिए कितने तैयार हैं. फ्लीट एक्सपेंशन के साथ मेंटेनेंस और इंजीनियरिंग कैपेबिलिटीज को मजबूत करना एयरलाइन के लिए महत्वपूर्ण है.
ऑपरेशनल चैलेंजेज से निपटना बड़ी प्राथमिकता
नए CEO ऐसे समय में एयर इंडिया की कमान संभाल रहे हैं, जब एयरलाइन पर ऑपरेशनल प्रेशर बना हुआ है. बढ़ी हुई फ्यूल कॉस्ट्स और एयरस्पेस डिसरप्शंस ने एयरलाइन के ऑपरेशंस को प्रभावित किया है. यूरोप और नॉर्थ अमेरिका के लिए फ्लाइट्स को रीरूट किए जाने से जर्नी टाइम्स बढ़े हैं और ऑपरेटिंग चैलेंजेज भी बढ़े हैं. पायलट अवेलेबिलिटी भी एयरलाइन के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती है.
इसके अलावा, एयरक्राफ्ट डिप्लॉयमेंट और डिलीवरी शेड्यूल्स की समीक्षा की जा रही है, ताकि कॉस्ट्स को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सके. जून में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, एयर इंडिया विंटर पीरियड के लिए शेड्यूल्ड कुछ एयरक्राफ्ट डिलीवरीज को डिफर करने पर विचार कर रही थी. इन परिस्थितियों में नए CEO की रिव्यू महत्वपूर्ण होगी. एयरक्राफ्ट डिलीवरीज, फ्लीट प्लानिंग और ऑपरेशनल प्रोसेसेज से जुड़े आगे के फैसले उनके आकलन पर निर्भर कर सकते हैं.
इंजीनियरिंग और मेंटेनेंस पर भी रहेगा फोकस
एयर इंडिया अपने फ्लीट का विस्तार कर रही है और इसके साथ टेक्निकल और इंजीनियरिंग कैपेबिलिटीज को मजबूत करना भी जरूरी है. Gebremariam का इथियोपियन एयरलाइंस में ऑपरेशनल और इंजीनियरिंग कैपेबिलिटीज विकसित करने का अनुभव एयर इंडिया के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है. नए CEO को एयरलाइन के मेंटेनेंस सिस्टम्स और टेक्निकल ऑपरेशंस का आकलन करना होगा. इसका उद्देश्य बढ़ते फ्लीट के साथ सर्विस रिलायबिलिटी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बेहतर करना होगा.
फंडिंग चैलेंज भी बड़ी जिम्मेदारी
Gebremariam के सामने केवल ऑपरेशनल चैलेंजेज ही नहीं हैं, बल्कि फाइनेंशियल प्रेशर भी एक बड़ी चुनौती है. एयर इंडिया अपने शेयरहोल्डर्स से एडिशनल कैपिटल जुटाने की कोशिश कर रही है. टाटा सन्स ने करीब 10,000 करोड़ रुपये के इन्वेस्टमेंट को प्रोविजनली अप्रूव किया है. वहीं, सिंगापुर एयरलाइंस भी एयर इंडिया की फंडिंग रिक्वेस्ट की समीक्षा कर रही है.
एयर इंडिया को 26,000 करोड़ रुपये से अधिक का लॉस हुआ है. ऐसे में नए CEO को ऑपरेशनल परफॉर्मेंस सुधारने के साथ फ्लीट एक्सपेंशन से जुड़े कॉस्ट्स को मैनेज करने और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी की दिशा में भी काम करना होगा.
नए CEO के फैसलों पर रहेगी नजर
Tewolde Gebremariam की शुरुआती रिव्यू एयर इंडिया के लिए कई महत्वपूर्ण फैसलों की दिशा तय कर सकती है. एयरक्राफ्ट डिलीवरीज, स्टाफिंग, इंजीनियरिंग ऑपरेशंस, मेंटेनेंस सिस्टम्स और ऑपरेशनल रिलायबिलिटी जैसे मुद्दे उनके शुरुआती एजेंडे में महत्वपूर्ण रहेंगे.
एयर इंडिया के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती फ्लीट एक्सपेंशन को बेहतर ऑपरेशनल परफॉर्मेंस और सस्टेनेबल ग्रोथ में बदलने की है. ऐसे में Gebremariam का अनुभव और उनके शुरुआती फैसले एयरलाइन के अगले चरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि नए CEO एयर इंडिया की ऑपरेशनल रिलायबिलिटी सुधारने, फाइनेंशियल प्रेशर कम करने और बढ़ते फ्लीट को प्रभावी तरीके से मैनेज करने के लिए क्या रणनीति अपनाते हैं.
चंद्रशेखरन ने दी है ये सलाह
चंद्रशेखरन ने एयर इंडिया के कर्मचारियों को मौजूदा चुनौतियों के बीच कॉस्ट कॉन्शसनेस की मजबूत कल्चर विकसित करने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि एयरलाइन का हर कर्मचारी कॉस्ट एफिशिएंसी सुधारने में योगदान दे सकता है. उन्होंने एयर इंडिया के अगले फेज के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों सेफ्टी, कस्टमर ट्रस्ट, ऑपरेशनल एक्जीक्यूशन और कॉस्ट डिसिप्लिन पर फोकस करने की बात कही.
चंद्रशेखरन ने माना कि पिछले 18 महीने एयर इंडिया के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहे हैं. जियोपॉलिटिकल डिसरप्शंस, एयरस्पेस क्लोजर, फ्यूल प्राइस में बदलाव और AI171 एक्सीडेंट ने एयरलाइन के ऑपरेशंस और परफॉर्मेंस को प्रभावित किया है. उन्होंने कर्मचारियों से मजबूत प्रोसेसेज, सख्त कंप्लायंस और पर्सनल अकाउंटेबिलिटी पर ध्यान देने को कहा है.
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