बरनी से आजादी: मनीषा कालरा, पुरी बेन रबारी और आकांक्षा खन्ना की कहानियों से सीखें महिलाओं की फाइनेंशियल फ्रीडम का नया मंत्र

HDFC म्यूचुअल फंड और TV9 की ‘बरनी से आजादी’ मुहिम मनीषा कालरा, पुरी रबारी और आकांक्षा खन्ना जैसी महिलाओं की प्रेरक कहानियां सामने लाती है, जिन्होंने चुनौतियों को पार कर न सिर्फ आत्मनिर्भरता हासिल की बल्कि निवेश की समझ के जरिए वित्तीय आजादी की नई परिभाषा भी गढ़ी है.

HDFC MF के MD & CEO Navneet Munot Image Credit: Money9 Live

आज की नारी अब केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं है. वह सपने देख रही है, उन्हें जी रही है और सबसे महत्वपूर्ण बात, अपने पैसों की बागडोर खुद अपने हाथों में ले रही है. इसी जज़्बे को सलाम करने के लिए HDFC म्यूचुअल फंड, TV9 नेटवर्क के साथ मिलकर एक विशेष अभियान लेकर आए हैं ,  ‘बरनी से आज़ादी ‘ निवेशक शिक्षा और जागरूकता अभियान

इस अभियान का मक़सद उन महिलाओं की कहानियों को सामने लाना है जिन्होंने मुश्किलों को मात देकर अपनी पहचान बनाई और यह साबित किया कि पैसे सिर्फ हाथ में नहीं, बल्कि सही समझ के साथ निवेश में होने चाहिए.

नवनीत मुनोत का विज़न : रसोई की बरनी से निकलकर निवेश की दुनिया तक

HDFC एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ नवनीत मुनोत महिलाओं की इस प्रगति को समाज के एक बड़े बदलाव के रूप में देखते हैं. उनका मानना है कि सरकार की ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और ‘सुकन्या समृद्धि’ जैसी योजनाओं ने जो आधार तैयार किया, उसका असर अब दिखने लगा है.

मुनोत एक दिलचस्प उदाहरण देते हुए कहते हैं, “मैं उस दौर से आता हूं जहां मध्यमवर्गीय परिवारों में बचत का मतलब काले या भूरे रंग का एक बैग होता था, जिसमें कुछ इंश्योरेंस पॉलिसी या पीपीएफ के काग़जात रखे होते थे. मां अक्सर बटुए से निकालकर या रसोई की बरनी से पैसे निकालकर देती थीं.”

वे कहते हैं कि आज समय बदल चुका है. अब अगली पीढ़ी की बेटियां अपने भविष्य और निवेश को लेकर जागरूक हैं. मुनोत के अनुसार, महिलाओं के लिए निवेश सरल (Simple), लक्ष्य-आधारित (Goal-based) और पारदर्शी (Transparent) होना चाहिए. चाहे बच्चों की पढ़ाई हो या रिटायरमेंट, सही निवेश ही वित्तीय आजादी है.

मनीषा कालरा, सिटी गर्ल्स हू वॉक दिल्ली से तोड़ी अकेलेपन की बेड़ियां

दिल्ली की रहने वाली मनीषा कालरा ने महिलाओं के लिए एक ऐसा मंच तैयार किया है जहां सिर्फ बातें नहीं होतीं, बल्कि हौसले साझा किए जाते हैं. ‘City Girls Who Walk Delhi’ नाम की इस कम्युनिटी की शुरुआत मनीषा ने कोविड के बाद महसूस किए गए अकेलेपन को दूर करने के लिए की थी.

यह एक ऐसी कम्युनिटी है जहां हर वीकेंड लड़कियां बिना किसी फीस या दबाव के मिलती हैं, शहर घूमती हैं और नए दोस्त बनाती हैं. मनीषा का कहना है, “महिलाओं की दोस्ती को लेकर समाज में कई नकारात्मक रूढ़ियां थीं, जिन्हें हमने बदला है. आज यहां महिलाएं न केवल एक-दूसरे को भावनात्मक सहारा देती हैं, बल्कि नेटवर्किंग और बिजनेस के अवसर भी तलाशकरती है. .”

पुरी बेन रबारी: कच्छ की कला को बनाया रोजगार का ज़रिया

गुजरात के जामनगर के पास एक छोटे से गांव की पुरी रबारी की कहानी अटूट हौसले की मिसाल है. बी.कॉम और एनसीसी (C सर्टिफिकेट) करने वाली पुरी का सपना सेना में जाने का था. उन्होंने कई बार पुलिस में भर्ती होने की लिखित परीक्षा दी, लेकिन कुछ ही अंकों से चूक गईं. इसी बीच मां की बीमारी और पारिवारिक ज़िम्मेदारियों के कारण उन्हें गांव में ही रुकना पड़ा.

हार मानने के बजाय पुरी ने अपनी पारंपरिक विरासत को हथियार बनाया. उन्होंने ‘Puri Halari Handicraft’ की शुरुआत की, जिसके जरिए वे कच्छ के मशहूर एम्ब्रॉयडरी और ग्लास वर्क को आधुनिक पहचान दिला रही हैं. आज वे न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि गांव की 15 अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं. उनका सफर बताता है कि अगर एक रास्ता बंद हो जाए, तो हुनर का दूसरा रास्ता खुद बनाया जा सकता है.

आकांक्षा खन्ना: पारंपरिक चिकनकारी को दिया वेस्टर्न तड़का

लखनऊ की आकांक्षा खन्ना कंपनी सेक्रेटरी (CS) की तैयारी कर रही थीं, लेकिन उनका दिल हमेशा से चिकनकारी की बारीकियों में बसता था. परिवार की आर्थिक मदद के लिए नौकरी के साथ-साथ उन्होंने प्रदर्शनी (Exhibitions) लगाना शुरू किया.

चुनौतियां तब आईं जब उन्होंने जमी-जमाई नौकरी छोड़कर पूरी तरह बिजनेस में उतरने का फैसला किया. उन्होंने ‘Nibs Tog’ ब्रांड के जरिए चिकनकारी को वेस्टर्न आउटफिट्स जैसे जैकेट और मॉडर्न ड्रेसेस के साथ जोड़ा. आकांक्षा कहती हैं, “एक मध्यमवर्गीय परिवार में करियर स्विच करना आसान नहीं था, लेकिन जब आप परंपरा को आधुनिकता के साथ जोड़ते हैं, तो बाजार खुद-ब-खुद मिल जाता है.”

चुनाव ही असली आजादी है

‘बरनी से आजादी’ सिर्फ एक कैंपेन नहीं हैं, बल्कि एक विचार है. मनीषा, पुरी और आकांक्षा जैसी महिलाएं यह साबित कर रही हैं कि वित्तीय आजादी का मतलब सिर्फ पैसा कमाना नहीं, बल्कि उसे सही जगह निवेश करना और खुद पर भरोसा करना है. जैसा कि इस मुहिम का संदेश है: “खुद पर भरोसा ही असली ताकत है.”

बरनी से आज़ादी के बारे में और जानने के लिए विज़िट करें – https://www.hdfcfund.com/learn/barni-se-azadi

निवेशक शिक्षा और जागरूकता अभियान

म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए, वन टाइम KYC की आवश्यकता को पूरा करने की प्रक्रिया के बारे में अधिक जानकारी हेतु https://www.hdfcfund.com/information/key-know-how पर विजिट करें. निवेशकों को केवल रजिस्टर्ड म्यूचुअल फंड्स में निवेश करना चाहिए, जिनके विवरण का सत्यापन सेबी की वेबसाइट (www.sebi.gov.in/intermediaries.html) पर किया जा सकता है. किसी पूछताछ, शिकायत तथा समस्या के समाधान के लिए निवेशक एएमसी तथा/या निवेशक संपर्क अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं. इसके साथ ही, निवेशक एएमसी को सीधे भी शिकायत कर सकते हैं, अगर वे एएमसी द्वारा दिए गए समाधान से संतुष्ट न हों तो वे स्कोर्स पोर्टल https://scores.sebi.gov.in/ पर भी शिकायत कर सकते हैं. स्कोर्स पोर्टल निवेशकों को सेबी को ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने तथा तत्पश्चात इसकी स्थिति को देखने की सुविधा प्रदान करता है. अगर निवेशक सीधे एएमसी से की गई या स्कोर्स पोर्टल के जरिए दर्ज शिकायतों पर समाधान से संतुष्ट न हों तो वे स्मार्ट ओडीआर पर https://smartodr.in/login शिकायत दर्ज कर सकता है.

डिस्क्लेमर: म्यूचुअल फंड निवेश बाज़ार के जोखिमों के अधीन हैं, योजना से जुड़े सभी दस्तावेज़ों को ध्यान से पढ़ें ।