7 दिन, ChatGPT और ₹4,000 कमाने का चैलेंज… आखिर कितना हुआ फायदा?
ChatGPT की मदद से 7 दिन में ₹4,000 कमाने का प्रयोग किया गया. AI ने कमाई के कई तरीके सुझाए, लेकिन बिक्री और ग्राहक जुटाने में मुश्किल आई. सात दिन बाद ₹699 की कमाई हुई, खर्च घटाने पर सिर्फ ₹579 बचे.

AI की सलाह से कमाई: क्या ChatGPT की मदद से एक हफ्ते में पैसे कमाए जा सकते हैं? इस सवाल का जवाब जानने के लिए एक प्रयोग किया गया. लक्ष्य था सात दिनों में ₹4,000 कमाना. इसके लिए ChatGPT से ऐसा प्लान बनाने को कहा गया, जिसे सीमित समय और उपलब्ध स्किल्स के साथ पूरा किया जा सके. नतीजा उम्मीद से काफी अलग रहा.
ChatGPT ने सुझाए दो तरीके
प्रयोग करने वाले व्यक्ति के पास ग्राफिक डिजाइनिंग, कुकिंग, AI टूल्स और वीडियो एडिटिंग जैसी स्किल्स थीं. कामकाजी दिनों में रोजाना करीब एक घंटे और शनिवार-रविवार को 6-7 घंटे उपलब्ध थे. ChatGPT ने सात दिनों के लिए डिजिटल प्रोडक्ट और फूड सेलिंग, इन दो तरीकों का सुझाव दिया.
हफ्ते के दौरान कलरिंग बुक, प्रिंटेबल या ई-बुक टेम्पलेट जैसे डिजिटल प्रोडक्ट तैयार करने की सलाह दी गई. वहीं वीकेंड पर सीमित मेन्यू के साथ स्पेशल मील बेचने का सुझाव था. ChatGPT के अनुमान के मुताबिक इससे ₹3,000 से ₹5,000 तक कमाई हो सकती थी.
रेगुलर टिफिन सर्विस शुरू करने से किया मना
ChatGPT ने रोजाना टिफिन सर्विस शुरू करने के बजाय सिर्फ शनिवार और रविवार को स्पेशल मील बेचने की सलाह दी. इसकी वजह यह थी कि रेगुलर टिफिन सर्विस में खाना बनाने, पैकिंग, डिलीवरी और लगातार ग्राहकों की जरूरत पड़ती है.
ग्राहक जुटाने के लिए अपार्टमेंट और आसपास के WhatsApp ग्रुप, दोस्तों, सहकर्मियों, PG में रहने वाले लोगों और स्टूडेंट्स से संपर्क करने का सुझाव दिया गया. हालांकि, यहां सबसे बड़ी चुनौती यह रही कि प्रयोग करने वाले के पास पहले से कोई ग्राहक आधार नहीं था.
डिजिटल प्रोडक्ट बनाने में भी आया पेंच
ChatGPT ने शुरुआत में एक खास थीम वाली बच्चों की कलरिंग बुक बनाने का सुझाव दिया. इसकी कीमत करीब ₹199 रखने की सलाह थी. छोटे एक्टिविटी पैक ₹149-199 और टेम्पलेट ₹299-399 में बेचने का सुझाव दिया गया. प्रयोग के दौरान एक के बजाय दो डिजिटल प्रोडक्ट तैयार किए गए. लेकिन असली चुनौती इन्हें बनाना नहीं, बल्कि इनके खरीदार ढूंढना था.
₹4,000 के लक्ष्य के मुकाबले मिले ₹579
सात दिन पूरे होने के बाद कुल रेवेन्यू ₹699 रहा. प्रिंटिंग पर ₹120 खर्च हुए. इस खर्च को घटाने के बाद वास्तविक रकम ₹579 बची. यानी ₹4,000 के लक्ष्य का सिर्फ करीब 14.5 फीसदी ही हासिल हो सका। लक्ष्य से ₹3,421 कम कमाई हुई.
सबसे बड़ी सीख क्या मिली?
इस प्रयोग से पता चला कि AI किसी काम की रणनीति बनाने में मदद कर सकता है, लेकिन सिर्फ प्लान बना देने से कमाई नहीं होती. ग्राहक जुटाना सबसे बड़ी चुनौती है. प्रयोग करने वाले ने माना कि उसने प्रोडक्ट बनाने को प्रगति समझ लिया, जबकि असली लक्ष्य बिक्री से पैसा कमाना था.
इसलिए ChatGPT से मिली सलाह उपयोगी हो सकती है, लेकिन उसे जमीन पर लागू करने, ग्राहक खोजने और बिक्री करने की जिम्मेदारी इंसान की ही रहती है.