$90 प्रति बैरल से नीचे फिसला कच्चा तेल, WTI 88 डॉलर पर; जानें, बढ़ते तनाव के बीच क्यों सस्ता हुआ क्रूड ऑयल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है. लंबे समय बाद WTI क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसलकर करीब 88 डॉलर पर कारोबार कर रहा है. वहीं ब्रेंट क्रूड भी नरम हुआ है. हाल के महीनों में भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल महंगा हुआ था, जिससे देश में ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ा था.

कच्चे तेल Image Credit: Getty image

Crude Oil Price Today : अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली है. लंबे समय बाद क्रूड ऑयल 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया है. WTI क्रूड 87.80 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जबकि ब्रेंट क्रूड 91.90 डॉलर प्रति बैरल पर है. हाल के महीनों में ईरान-अमेरिका तनाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के चलते तेल की कीमतों में लगातार उछाल आया था, जिसका असर भारत में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों पर भी देखने को मिला.

WTI और ब्रेंट दोनों में गिरावट

अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड की कीमत 87.80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है, जिसमें 1.24 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. वहीं ब्रेंट क्रूड 91.90 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है और इसमें 0.86 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई.

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बढ़ते टेंशन के बीच क्यों सस्ता हुआ कच्चा तेल?

ईरान पर अमेरिका के हालिया हमले के बाद पश्चिम एशिया में टेंशन बढ़ा, लेकिन इसके बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है. इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम (सीजफायर) समझौते को आगे बढ़ाने की खबर रही. Axios की रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के बीच तनाव कम करने को लेकर एक समझौता हुआ है, हालांकि इसे अभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है. इस खबर के बाद निवेशकों को लगा कि पश्चिम एशिया में हालात फिलहाल और खराब नहीं होंगे और तेल आपूर्ति पर बड़ा खतरा नहीं है. इसी कारण तेल कारोबारियों ने पहले की गई खरीदारी कम कर दी, जिससे ब्रेंट और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ गई.

भू-राजनीतिक तनाव के बीच आई नरमी

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी दर्ज की गई थी. निवेशकों को आशंका थी कि क्षेत्रीय संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. हालांकि अब बाजार में कुछ स्थिरता लौटती दिखाई दे रही है, जिससे कीमतों पर दबाव बना है.

भारत में चार बार बढ़े थे ईंधन के दाम

कच्चे तेल की कीमतों में पहले आई तेजी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा था. तेल कंपनियों ने बढ़ती लागत का हवाला देते हुए पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में चार बार में 7 रुपये की बढ़ोतरी की थी. इससे आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की लागत भी बढ़ी थी.

आगे मिल सकती है राहत

यदि कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर के आसपास या उससे नीचे बनी रहती हैं, तो भारत में ईंधन कीमतों पर दबाव कम हो सकता है. हालांकि अंतिम फैसला तेल कंपनियों और सरकार की नीतियों पर निर्भर करेगा. फिर भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई यह गिरावट उपभोक्ताओं के लिए राहत की उम्मीद लेकर आई है.

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