चौथी बार बढ़े तेल के दाम, पेट्रोल की कीमत 100 के पार, 2.61 रुपए हुआ महंगा, डीजल में 2.71 रुपए का इजाफा

तेल कंपनियों ने सोमवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी कर दी. दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पहुंच गया है. 15 मई के बाद से यह चौथी बढ़ोतरी है.

100 रुपये के पार पेट्रोल Image Credit: Canva/ Money9

Petrol and Diesel Price Hike: देश में आम जनता को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है. तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने सोमवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर से भारी बढ़ोतरी कर दी है. पिछले दो हफ्तों से भी कम समय में ईंधन की कीमतों में यह चौथी बढ़ोतरी है.

ताजा संशोधन के बाद, दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 2.61 रुपये बढ़कर 102.12 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जो पहले 99.51 रुपये थी. वहीं, डीजल के दाम में 2.71 रुपये का इजाफा किया गया है, जिससे दिल्ली में इसकी कीमत 92.49 रुपये से बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है.

चार बार में 7 रुपये से ज्यादा बढ़े दाम

इंडियन ऑयल से मिले आंकड़े के मुताबिक, बीते 15 मई से तेल की कीमतों में संशोधन का सिलसिला दोबारा शुरू हुआ है. एक छोटे अंतराल के बाद शुरू हुई इस बढ़ोतरी से अब तक पेट्रोल और डीजल के दामों में कुल मिलाकर करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हो चुका है.

होर्मुज संकट और कमजोर रुपया बना वजह

बाजार जानकारों के मुताबिक, तेल की कीमतों में यह उछाल वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये की वजह से आया है. पश्चिम एशिया में महीनों से जारी भू-राजनीतिक तनाव और ‘होर्मुज स्ट्रेट’ में जहाजों की आवाजाही ठप होने से दुनिया भर में तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है. भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं, उन्हें महंगे आयात का सामना करना पड़ रहा है.

पीटीआई के अनुसार, सरकारी तेल कंपनी ओएनजीसी (ONGC) की डायरेक्टर (एक्सप्लोरेशन) सुषमा रावत ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतें बेहद अस्थिर बनी हुई हैं. उन्होंने कहा, “जब भी शांति समझौते की खबर आती है, कच्चे तेल के दाम गिरने लगते हैं. लेकिन जैसे ही लगता है कि कोई समाधान नहीं निकला, कीमतें फिर बढ़ जाती हैं.”

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तेल कंपनियों पर था रोजाना 1000 करोड़ का बोझ

सुषमा रावत के मुताबिक, सरकार ने पिछले 76 दिनों तक कीमतों को रोककर आम जनता को वैश्विक महंगाई के बड़े झटके से बचाए रखा. लेकिन इस दौरान तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को हर दिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था, जिसे लंबे समय तक संभालना मुमकिन नहीं था.

बीपीसीएल (BPCL) के पूर्व मार्केटिंग डायरेक्टर सुखमल कुमार जैन ने भी इस बात की पुष्टि की कि बढ़ते क्रूड ऑयल और कमजोर रुपये की दोहरी मार के कारण सरकारी तेल कंपनियां इस वक्त बेहद गंभीर वित्तीय दबाव से गुजर रही हैं.