अब ज्यादा माइलेज वाली कारों पर होगा जोर! CAFE III ड्राफ्ट में सरकार ने किए बड़े बदलाव; जानें नए नियमों में क्या बदला

केंद्र सरकार ने CAFE III के तहत पैसेंजर व्हीकल्स के लिए नए फ्यूल एफिशिएंसी नॉर्म्स का ड्राफ्ट जारी किया है. प्रस्तावित नियम 1 अप्रैल 2027 (FY28) से लागू हो सकते हैं. नए मानकों के तहत वाहन कंपनियों को ईंधन की खपत और कार्बन एमिशन्स में लगातार कमी लानी होगी. ड्राफ्ट में एथेनॉल ब्लेंडिंग, बायोफ्यूल्स, फ्यूल सेविंग टेक्नोलॉजीज और कंप्लायंस क्रेडिट सिस्टम जैसे कई अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं.

कार माइलेज नियम Image Credit: ai/canva

Fuel Efficiency Norms: केंद्र सरकार ने देश में ईंधन की खपत कम करने और वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को घटाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. पावर मिनिस्ट्री ने कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE III) नियमों का नया ड्राफ्ट जारी किया है. प्रस्तावित नियमों के तहत 1 अप्रैल 2027 (FY28) से पैसेंजर व्हीकल्स के लिए पहले से कहीं अधिक सख्त फ्यूल एफिशिएंसी मानक लागू किए जाएंगे. सरकार का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में वाहन निर्माताओं को अपनी पूरी व्हीकल फ्लीट की औसत ईंधन खपत और कार्बन एमिशंस में लगातार कमी लाने के लिए बाध्य करना है. ड्राफ्ट पर 6 अगस्त तक सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं.

क्या हैं CAFE III के नए प्रस्ताव

ET की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित CAFE III नियमों के तहत वाहन कंपनियों को वित्त वर्ष 2031-32 (FY32) तक अपनी औसत ईंधन खपत घटाकर 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर करनी होगी. यह लक्ष्य FY28 में प्रस्तावित 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर की तुलना में काफी सख्त है.

इसी तरह कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य भी घटाकर 78.90 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर किया जाएगा, जबकि FY28 के लिए यह सीमा 94.76 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर प्रस्तावित की गई है. सरकार का मानना है कि इससे वाहन निर्माता अधिक फ्यूल एफिशिएंट और कम प्रदूषण फैलाने वाले मॉडल बाजार में उतारने के लिए प्रोत्साहित होंगे.

ऑटो कंपनियों को मिलेगी कुछ राहत

हालांकि, सरकार ने कंपनियों को पूरी तरह सख्ती के दायरे में नहीं रखा है. ड्राफ्ट में स्लोप फॉर्मूला को पहले के प्रस्ताव की तुलना में थोड़ा आसान बनाया गया है. सितंबर 2025 के ड्राफ्ट में जहां 2027-28 के लिए स्लोप 0.002 प्रस्तावित था, वहीं अब इसे घटाकर 0.00158 कर दिया गया है. इसी तरह FY32 के लिए यह 0.00131 रहेगा. इससे कंपनियों को नए नियमों के अनुरूप अपने व्हीकल पोर्टफोलियो को संतुलित करने में कुछ अतिरिक्त लचीलापन मिलेगा.

दो चरणों में होगी कंप्लायंस की समीक्षा

सरकार ने कंप्लायंस की समीक्षा दो अलग-अलग चरणों में करने का प्रस्ताव रखा है.

  • पहला चरण 3 वर्षों का होगा.
  • दूसरा चरण 2 वर्षों का होगा.

इस व्यवस्था से कंपनियों को अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए अधिक समय और लचीलापन मिलेगा.

बायोफ्यूल्स को मिलेगा बढ़ावा

पहली बार सरकार ने एथेनॉल, बायोफ्यूल्स और कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कार्बन न्यूट्रैलिटी फैक्टर शामिल करने का प्रस्ताव दिया है. वर्तमान एथेनॉल ब्लेंडिंग स्तर के आधार पर 8 प्रतिशत कार्बन रिडक्शन फैक्टर देने का प्रस्ताव है. वहीं कंप्रेस्ड बायोगैस और अन्य बायोफ्यूल्स के लिए यह लाभ वास्तविक ब्लेंडिंग लेवल के आधार पर तय किया जाएगा. इस कदम से वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

फ्यूल सेविंग टेक्नोलॉजीज अपनाने पर मिलेगा फायदा

ड्राफ्ट के अनुसार, यदि कोई वाहन निर्माता फ्यूल सेविंग टेक्नोलॉजीज का उपयोग करता है, तो उसे कंप्लायंस में अतिरिक्त लाभ मिलेगा. कंपनियां अधिकतम 9 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर तक कंप्लायंस बेनिफिट का दावा कर सकेंगी. हालांकि, प्रत्येक स्वीकृत तकनीक पर अधिकतम 1 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर का ही लाभ मिलेगा.

क्रेडिट और डेबिट सिस्टम भी होगा लागू

सरकार ने CAFE II की तरह क्रेडिट और डेबिट मैकेनिज्म को भी जारी रखने का प्रस्ताव दिया है. यदि कोई कंपनी निर्धारित लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करती है, तो उसे कंप्लायंस क्रेडिट्स मिलेंगे. इन क्रेडिट्स का उपयोग वह भविष्य में कर सकेगी.

वहीं, यदि कोई कंपनी लक्ष्य पूरा नहीं कर पाती, तो वह:

  • पहले से अर्जित क्रेडिट्स का उपयोग कर सकती है.
  • दूसरी कंपनियों के साथ वॉलंटरी पूलिंग अरेंजमेंट कर सकती है.
  • या फिर BEE से कंप्लायंस क्रेडिट्स खरीद सकती है.

किन कंपनियों पर लागू होंगे नियम

ये नियम एम1 कैटेगरी पैसेंजर व्हीकल्स पर लागू होंगे, जो भारत में बिक्री के लिए बनाए या आयात किए जाते हैं. हालांकि, जिन वाहन निर्माताओं की सालाना बिक्री 1,000 पैसेंजर व्हीकल्स से कम है, उन्हें इन नियमों से छूट मिलती रहेगी.

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