पेट्रोल पंप पर अब कम ईंधन मिलने की शिकायत होगी दूर, सरकार ने बदले नियम, जानें डिटेल

केंद्र सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी नियमों में बदलाव करते हुए पांच नए फ्यूल डिस्पेंसिंग सिस्टम को सरकारी मंजूरी वाले टेस्ट सेंटर के दायरे में शामिल किया है। अब पेट्रोल डीजल, सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन डिस्पेंसर की जांच और दोबारा जांच GATC में हो दर्ज। इस फैसले से देश में वजन और माप की जांच व्यवस्था मजबूत होगी।

केंद्र सरकार ने वजन और माप से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है.

Fuel Dispenser Verification: केंद्र सरकार ने वजन और माप से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है. जिसके तहत अब पांच नए Fuel Dispensing System को जांच और दोबारा जांच के दायरे में शामिल किया गया है. इसमें पेट्रोल- डीजल के साथ CNG, LPG, LNG और Hydrogen डिस्पेंसर भी शामिल हैं. सरकार का कहना है कि इससे देश में जांच व्यवस्था मजबूत होगी. साथ ही ग्राहकों को सही मात्रा में ईंधन मिलने में ट्रांसपेरेंसी भी बढ़ेगी.

पांच नए नियम शामिल

सरकार ने जिन पांच नए सिस्टम को शामिल किया है उनमें Petrol Diesel Dispenser, CNG Dispenser, LPG Dispenser, LNG Dispenser और Hydrogen Dispenser शामिल हैं. अब इन सभी की जांच गवर्नमेंट अप्रूव्ड टेस्ट सेंटर यानी GATC में हो सकेगी. पहले ये सुविधा सीमित थी. नए नियम लागू होने के बाद इन मशीनों की जांच और दोबारा जांच आसान हो जाएगी. इससे ईंधन डिस्ट्रीब्यूशन में सटीकता बनाए रखने में मदद मिलेगी.

अब इस तरह होगी जांच

नए बदलाव के बाद GATC अब कुल 23 तरह के वजन और माप इक्विपमेंट की जांच कर सकेंगे. पहले यह संख्या 18 थी. इसमें Water Meter, Gas Meter, Energy Meter, Flow Meter और Weighing Machine जैसे इक्विपमेंट पहले से शामिल थे. अब Fuel Dispenser जुड़ने से इसका दायरा और बढ़ गया है. इससे देशभर में वेरिफिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होने की उम्मीद है.

क्लीन एनर्जी का बढ़ेगा यूज

CNG, LNG और Hydrogen जैसे साफ ईंधन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में सरकार ने इनके डिस्पेंसर को भी जांच के दायरे में लाने का फैसला किया है. इससे ग्राहकों को सही मात्रा में ईंधन मिलने की जांच हो सकेगी. साथ ही फ्यूल स्टेशन पर लेनदेन में ट्रांसपेरेंसी भी बढ़ेगी. सरकार का मानना है कि क्लीन फ्यूल को बढ़ावा देने के लिए यह जरूरी कदम है.

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जांच के लिए तय की गई नई फीस

सरकार ने नए नियमों के साथ वेरिफिकेशन फीस भी तय कर दी है. Petrol और Diesel Dispenser के लिए प्रति Nozzle 5000 रुपये फीस रखी गई है. वहीं CNG, LPG, LNG और हाइड्रोजन डिस्पेंसर के लिए प्रति नोजल 10000 रुपये शुल्क तय किया गया है. सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था जांच प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाएगी. साथ ही देशभर में एक समान नियम लागू करने में मदद करेगी.