फिर बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? BPCL डायरेक्टर बोले- सरकार और तेल कंपनियों के पास सिर्फ 3 रास्ते

वैश्विक ऊर्जा संकट और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बीच BPCL ने संकेत दिए हैं कि अगर मौजूदा हालात जारी रहे तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को टाला नहीं जा सकता. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट के बावजूद भारत फिलहाल मजबूत सप्लाई नेटवर्क के दम पर ईंधन संकट से बचा हुआ है.

पेट्रोल की कीमत

वैश्विक ऊर्जा संकट और कच्चे तेल के बाजार में मचे हाहाकार के बीच भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद बुरी खबर आ रही है. भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के डायरेक्टर (HR) राज कुमार दुबे ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौजूदा तनाव और रुकावटें जारी रहीं, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को टालना नामुमकिन हो जाएगा.

सरकार और तेल कंपनियों के पास बचे हैं सिर्फ 3 विकल्प

ANI के हवाले से राज कुमार दुबे ने बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे बेतहाशा उतार-चढ़ाव को देखते हुए पॉलिसीमेकर्स के सामने अब केवल तीन रास्ते ही बचे हैं:

  1. पेट्रोल पंपों पर सीधे तौर पर ईंधन की कीमतें बढ़ा दी जाएं.
  2. तेल कंपनियां खुद इस भारी नुकसान (अंडर-रिकवरी) को झेलें और घाटा उठाएं.
  3. सरकार डेफिसिट फाइनेंसिंग (घाटे की वित्तीय व्यवस्था) के जरिए खुद फंड मुहैया कराए और राहत दे.

उन्होंने कहा कि शुरुआत में वैश्विक कीमतों में 20% से 50% तक की बढ़ोतरी को अस्थायी माना जा रहा था, लेकिन ऊर्जा बुनियादी ढांचे (Energy Infrastructure) को जिस तरह का नुकसान पहुंचा है, उसे ठीक होने में लंबा वक्त लगेगा. ऐसे में अगर मौजूदा हालात नहीं सुधरे, तो कीमतों में एक और बड़ी बढ़ोतरी तय है.

होर्मुज संकेट के लिए भारत का ‘प्लान-बी’

पश्चिम एशिया संकट के कारण इस समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 20 लाख (2 मिलियन) बैरल प्रतिदिन से अधिक तेल की सप्लाई रुकी हुई है. इसके बावजूद भारत में ईंधन की कोई किल्लत नहीं है. दुबे ने इसका श्रेय भारत की मजबूत डिप्लोमेसी और सप्लाई चेन के विस्तार को दिया.

उन्होंने कहा, “पहले हम केवल 20 सप्लाई पॉइंट से तेल खरीदते थे, लेकिन अब हमने इन्हें बढ़ाकर 40 कर दिया है, जिसमें रूस और अफ्रीका के देश भी शामिल हैं.” यही वजह है कि युद्ध के बाद देश में ईंधन की खपत बढ़ने के बावजूद भारत बिना किसी शॉर्टेज के स्थिति को संभालने में कामयाब रहा है.

संकट से मिलेगी ग्रीन एनर्जी को रफ्तार

BPCL के डायरेक्टर के मुताबिक, तेल के भारी-भरकम आयात बिल से विदेशी मुद्रा भंडार पर जो दबाव पड़ रहा है, वह भारत को ग्रीन एनर्जी की तरफ तेजी से बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा. भारत इस समय 200 गीगावॉट (GW) से अधिक सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित कर चुका है.

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प्रधानमंत्री के लक्ष्य के अनुसार, एनर्जी मिक्स में नेचुरल गैस की हिस्सेदारी को मौजूदा 7-8% से बढ़ाकर 15% करने पर काम चल रहा है. इसके अलावा, 20% एथोनॉल ब्लेंडिंग और हाइड्रोजन ईंधन जैसे कदमों से भविष्य में पेट्रोल की निर्भरता और विदेशी मुद्रा के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा.