E20 के बाद सरकार का बड़ा प्लान! अब किचन फ्यूल, Ethanol ATM और एविएशन पर फोकस; जानें क्या है प्लान
E20 लक्ष्य हासिल करने के बाद भारत सरकार अब इथेनॉल के नए उपयोगों पर तेजी से काम कर रही है. एथेनॉल ATM, Kitchen Fuel, SAF और एक्सपोर्ट के जरिए सरकार अतिरिक्त उत्पादन क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करना चाहती है. देश की एथेनॉल उत्पादन क्षमता करीब 24 बिलियन लीटर तक पहुंचने की ओर है, जबकि मौजूदा मांग इससे कम है.

Ethanol ATM: भारत का इथेनॉल कार्यक्रम अब केवल पेट्रोल में ब्लेंडिंग तक सीमित नहीं रहने वाला है. देशभर में E20 लक्ष्य हासिल करने के बाद सरकार अब इथेनॉल के नए उपयोग तलाश रही है. किचन फ्यूल, इथेनॉल ATM, SAF, फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स और एक्सपोर्ट जैसे नए क्षेत्रों पर तेजी से काम किया जा रहा है. इसका मकसद देश में तेजी से बढ़ी इथेनॉल उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग करना और बायोफ्यूल इकोसिस्टम को और मजबूत बनाना है.
E20 की सफलता के बाद नई चुनौती
पिछले एक दशक में भारत के इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है. पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग करीब 1.5 फीसदी से बढ़कर 20 फीसदी तक पहुंच चुकी है. इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है, किसानों की आय बढ़ी है और घरेलू बायोफ्यूल इंडस्ट्री को मजबूती मिली है. सरकार के अनुसार, 2014-15 से अब तक इथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण देश को 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है.
इसी नीति को देखते हुए शुगर मिल्स और ग्रेन-बेस्ड डिस्टिलरीज ने बड़े पैमाने पर निवेश किया. उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में नई डिस्टिलरीज स्थापित हुई हैं. हालांकि, अब यही सफलता नई चुनौती बन गई है, क्योंकि उत्पादन क्षमता मौजूदा मांग से आगे निकल गई है.
उत्पादन क्षमता मांग से ज्यादा
केयरएज रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की इथेनॉल उत्पादन क्षमता 20 बिलियन लीटर सालाना से अधिक हो चुकी है. चालू वित्त वर्ष में इसमें करीब 4 बिलियन लीटर अतिरिक्त क्षमता जुड़ने की उम्मीद है, जिससे कुल क्षमता लगभग 24 बिलियन लीटर तक पहुंच जाएगी.
इसके मुकाबले E20 प्रोग्राम के तहत सालाना लगभग 11 बिलियन लीटर इथेनॉल की जरूरत होती है. वहीं लिकर, फार्मास्युटिकल और केमिकल इंडस्ट्री की संयुक्त मांग करीब 3 से 3.5 बिलियन लीटर है. यानी करीब 7 बिलियन लीटर उत्पादन क्षमता का अभी पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है. यही वजह है कि सरकार नए उपयोगों पर तेजी से काम कर रही है.
किचन तक पहुंचेगा इथेनॉल
ET की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार इथेनॉल को घरेलू कुकिंग फ्यूल के रूप में भी इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है. इसके तहत इथेनॉल ATM का मॉडल तैयार किया जा रहा है, जहां उपभोक्ता विशेष कैनिस्टर में इथेनॉल भरवाकर उसे विशेष स्टोव में इस्तेमाल कर सकेंगे. इससे एलपीजी पर निर्भरता कम करने और आयात बिल घटाने में मदद मिल सकती है.
सरकार का मानना है कि इथेनॉल घरेलू स्तर पर तैयार होता है, किसानों को फायदा पहुंचाता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करता है. इसलिए इसे एक वैकल्पिक कुकिंग फ्यूल के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं.
एक्सपोर्ट और एविएशन भी बनेंगे बड़े बाजार
घरेलू मांग बढ़ाने के साथ-साथ भारत इथेनॉल एक्सपोर्ट पर भी जोर दे रहा है. नेपाल, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे देशों में इथेनॉल की सप्लाई की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं. इन देशों में ब्लेंडिंग टार्गेट्स तो हैं, लेकिन घरेलू उत्पादन सीमित है. इसके अलावा एविएशन सेक्टर भी इथेनॉल इंडस्ट्री के लिए बड़ा अवसर बन सकता है. सरकार ने SAF के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए रोडमैप तैयार किया है.
इसके तहत 2027 तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 1 फीसदी SAF ब्लेंडिंग, 2028 तक 2 फीसदी और 2030 तक 5 फीसदी ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखा गया है. इथेनॉल आधारित अल्कोहल-टू-जेट टेक्नोलॉजी के जरिए SAF तैयार किया जा सकता है. इस दिशा में NTPC ग्रीन एनर्जी और GPS रिन्यूएबल्स विशाखापत्तनम के पास देश का पहला इथेनॉल -टू-जेट फ्यूल प्लांट विकसित कर रहे हैं.
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