PNG का खजाना हैं भारत के ये इलाके, इसलिए LPG जैसी किल्लत नहीं, जानें कैसे पहुंचती है आपके घर
पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी युद्ध से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है. होर्मुज स्ट्रेट प्रभावित होने से एलपीजी की सप्लाई पर असर पड़ा है, जिससे भारत समेत कई देशों में कमी देखी जा रही है. हालांकि पाइप नेचुरल गैस यानी पीएनजी की सप्लाई पर ज्यादा असर नहीं पड़ा, क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा देश में ही उत्पादन होता है.
LPG vs PNG Supply: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने पूरी दुनिया को अस्त-व्यस्त कर दिया है. इस युद्ध के चलते वैश्विक स्तर परएनर्जी संकट पैदा हो गया है. ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने के फैसले का असर कई देशों पर सीधे और कई पर अप्रत्यक्ष रूप से पड़ रहा है. भारत, पाकिस्तान, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया जैसे देश इससे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, क्योंकि ये देश अरब देशों से एनर्जी इंपोर्ट पर ज्यादा निर्भर हैं.
देश में पेट्रोल और डीजल की कमी भले ही न हो, लेकिन लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की भारी कमी देखने को मिल रही है, जिससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है. हालांकि, एक तरफ जहां LPG की कमी है, वहीं पाइप नेचुरल गैस यानी PNG की सप्लाई लगातार जारी है. सरकार भी इस पर जोर दे रही है कि जहां पाइपलाइन पहुंच चुकी है, वहां ज्यादा से ज्यादा लोग PNG का उपयोग करें और LPG पर निर्भरता कम करें. आइए समझते हैं कि LPG और PNG क्या हैं और इस संकट का इन पर क्या असर पड़ रहा है.
क्या होती है LPG और कैसे बनता है
LPG का पूरा नाम लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस है. यह मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का कंभीनेशन होता है. इसकी खासियत यह है कि सामान्य तापमान पर यह गैस के रूप में होती है, लेकिन दबाव डालने पर यह लिक्विड में बदल जाती है. इसी वजह से इसे आसानी से सिलेंडर में भरकर एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जाता है.
LPG कोई प्राइमरी फ्यूल नहीं है, बल्कि यह दो प्रोसेस का बाई प्रोडक्ट है. पहला प्रोसेस में जब नेचुलर गैस को जमीन से निकाला जाता है, तो उसमें मीथेन के साथ प्रोपेन और ब्यूटेन भी होते हैं, जिन्हें प्रोसेस करके LPG बनाया जाता है. दूसरा प्रोसेस में जब कच्चे तेल को रिफाइन करके पेट्रोल और डीजल बनाया जाता है, तब भी LPG निकलती है. यही इसके मुख्य सोर्स हैं. वित्त वर्ष 2024–25 में भारत में एलपीजी की कुल खपत लगभग 31.3 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) रही है.
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क्या होती है PNG और कैसे बनता है
PNG यानी पाइप नेचुरल गैस मुख्य रूप से मीथेन गैस होती है, जिसे जमीन से निकालकर पाइपलाइन के माध्यम से सीधे घरों, होटलों और इंडस्ट्री तक पहुंचाया जाता है. इसीलिए LPG के विपरीत, PNG की सप्लाई 24 घंटे लगातार बनी रहती है. PNG अलग से बनाई नहीं जाती, बल्कि नेचुरल गैस को निकालकर उसे रिफाइन किया जाता है और फिर पाइपलाइन के जरिए सप्लाई किया जाता है. इसे पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल माना जाता है. देश में वर्तमान में लगभग 1.62 करोड़ (16.2 मिलियन) घरेलू पीएनजी कनेक्शन हैं
इस संकट से क्यों कम प्रभावित है PNG
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण पेट्रोल, डीजल और LPG की सप्लाई पर असर पड़ा है, जिससे देश में इनकी कमी महसूस की जा रही है. वहीं, PNG की सप्लाई पाइपलाइन के माध्यम से होती है और इसका लगभग 50 फीसदी प्रोडक्शन भारत में ही होता है.
इसी कारण इसकी सप्लाई लगातार जारी रहती है और इसमें ज्यादा रुकावट नहीं आती. भारत में PNG की सप्लाई मुख्य रूप से कृष्णा-गोदावरी बेसिन, असम और त्रिपुरा से होती है. अकेला कृष्णा-गोदावरी बेसिन देश के कुल प्रोडक्शन का लगभग 25 फीसदी योगदान देता है. इसके अलावा, खाड़ी देशों जैसे कतर और यूएई से भी गैस आयात की जाती है. साथ ही अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से भी गैस की सप्लाई होती है.
