RBI का एक फैसला और भाग गया रुपया, डॉलर के मुकाबले 130 पैसे तक उछला, क्या बनी रहेगी मजबूती
Reserve Bank of India ने बड़ा कदम उठाया है. इस फैसले के बाद रुपये में अचानक मजबूती देखने को मिली और यह करीब 130 पैसे उछल गया. लेकिन इस कदम का असर सिर्फ रुपये तक ही सीमित नहीं है. इसका असर बैंकिंग सेक्टर पर भी पड़ सकता है.
Rupee vs Dollar : भारतीय रुपया पिछले कुछ समय से लगातार दबाव में था. डॉलर के मुकाबले यह कमजोर होता जा रहा था और नए-नए निचले स्तर बना रहा था. ऐसे में अब Reserve Bank of India ने बड़ा कदम उठाया है. उसके एक फैसले के बाद सोमवार सुबह रुपये में अचानक मजबूती देखने को मिली और यह करीब 130 पैसे उछल गया. लेकिन इस कदम का असर सिर्फ रुपये तक ही सीमित नहीं है. इसका असर बैंकिंग सेक्टर पर भी पड़ सकता है. इससे रुपये को संभालने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इसके साथ ही बाजार में हलचल भी बढ़ गई है.
क्या है RBI का बड़ा फैसला
Reserve Bank of India ने बैंकों के लिए नया नियम बनाया है. अब बैंकों को डॉलर में अपनी ओपन पोजिशन 100 मिलियन डॉलर के अंदर रखनी होगी. इसका मतलब है कि बैंक ज्यादा मात्रा में डॉलर रिजर्व नहीं कर पाएंगे. इस फैसले के बाद रुपया 93.59 प्रति डॉलर तक मजबूत हो गया. यह अपने पिछले रिकॉर्ड लो 94.85 से काफी ऊपर आया है. हालांकि बाद में इसमें 0.77 फीसदी की गिरावट देखने को मिली.
इससे पहले पिछले सत्र में यह 94.8125 पर बंद हुआ था. और उसमें कमजोरी भी आई. ऐसे में साफ है कि केवल इस कदम से रुपया लगातार मजबूत नहीं रह सकता. आरबीआई को दूसरे कदम भी उठाने होंगे, साथ ही ग्लोबल लेवल पर भी स्थितियां सामान्य होने से रुपये को बड़ा सपोर्ट मिल सकता है.
1 महीने में 4 फीसदी टूटा रुपया
वेस्ट एशिया में चल रहे युद्ध को अब एक महीने से ज्यादा हो चुका है. इस दौरान भारतीय रुपया लगातार दबाव में रहा है. पिछले एक महीने में रुपया कुल मिलाकर करीब 4.08% तक कमजोर हो गया है. वहीं पिछले एक हफ्ते में भी इसमें 1.76% की गिरावट देखने को मिली है.

बैंकों को हो सकता है नुकसान
इस नियम की वजह से बैंकों को अपने पुराने सौदे बंद करने पड़ रहे हैं. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इस कदम से बैंकिंग सेक्टर को करीब 3000 से 4000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है. यह कदम इसलिए उठाना पड़ रहा है क्योंकि रुपया लगातार कमजोर हो रहा था. वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव और कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से दबाव बढ़ गया था. इसके अलावा विदेशी निवेश भी बाहर जा रहा था, जिससे रुपये पर और असर पड़ा. ऐसे में RBI का यह कदम रुपये को थोड़ी राहत देगा. क्योंकि अगर वह ऐसा नहीं करता तो ना केवल आयात महंगा होता जाता, बल्कि घरेलू बाजार में भी महंगाई बढ़ने की आशंका तेज हो जाती.
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