लक्स-डव जैसे साबुन ₹20 तक महंगे! कच्चे तेल की ‘आग’ बिगाड़ेगी आपका बजट, HUL ने बढ़ाए प्रोडक्ट के दाम
महंगाई की दोहरी मार पड़ने वाली है! कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और युद्ध के हालातों के बीच हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) ने साबुनों के दाम में ₹20 तक की वृद्धि कर दी है. डेली नीड्स के सामान महंगे हो रहे हैं. जानिए डाबर, मैरिको और डोमिनोज जैसे ब्रांड्स पर इसका क्या असर पड़ रहा है.

देश की दिग्गज FMCG कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) ने अपने साबुन पोर्टफोलियो की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया है. कच्चे माल और पैकेजिंग लागत में बेतहाशा बढ़त के चलते कंपनी ने यह बढ़त ग्राहकों को बढ़ाने का फैसला किया है. ताजा जानकारी के अनुसार, साबुनों की कीमतों में 1 रुपये से लेकर 20 रुपये तक इजाफा किया गया है. पश्चिम एशिया के युद्ध के कारण महंगाई से जूझ रहे आम आदमी के लिए ये अतिरिक्त बोझ है.
क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
TOI ने HUL के प्रवक्ता के हवाले से बताया है कि, वर्तमान में कच्चे तेल, पाम ऑयल और प्लास्टिक की कीमतों में जबरदस्त उछाल (कमोडिटी इन्फ्लेशन) देखा जा रहा है. कंपनी का कहना है कि वे अपने पोर्टफोलियो में चुनिंदा रूप से कीमतें बढ़ा रहे हैं ताकि उपभोक्ताओं के लिए मूल्य-कीमत का समीकरण बना रहे. दरअसल, क्रूड ऑयल के डेरिवेटिव्स जैसे पॉलीप्रोपाइलीन और अल्काइल बेंजीन का इस्तेमाल उत्पादों के निर्माण और उनकी पैकेजिंग में बड़े पैमाने पर होता है, जिसकी लागत अब बढ़ गई है. HUL के तहत हमाम, डव, लाइफबॉय, लिरिल, लक्स और रेक्सोना जैसे तमाम ब्रांड शामिल हैं.
युद्ध और कच्चे तेल का असर
28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-ईरान युद्ध ने वैश्विक बाजार में तबाही मचा दी है. कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं. इस वजह से न केवल उत्पादन बल्कि लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई भी महंगी हो गई है. FMCG कंपनियां, जो जीएसटी कटौती के जरिए मांग में सुधार की उम्मीद कर रही थीं, उनके लिए अब रिकवरी की राह और कठिन हो गई है.
अनिश्चितता यहीं खत्म नहीं होती. प्राइवेट फोरकास्टर स्काईमेट ने इस साल ‘सामान्य से कम’ मानसून की भविष्यवाणी की है. अगर मानसून कमजोर रहता है, तो इसका सीधा असर ग्रामीण इलाकों की मांग पर पड़ेगा. पिछले कुछ समय से शहरी उपभोक्ताओं की तुलना में ग्रामीण बाजार ने एफएमसीजी सेक्टर की ग्रोथ में बड़ी भूमिका निभाई है. ऐसे में कम बारिश कंपनियों की चिंता बढ़ा रही है.
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बाकी कंपनियों का क्या है रुख?
- डाबर: कंपनी भू-राजनीतिक स्थिति पर नजर रखे हुए है और लागत प्रबंधन के लिए एहतियाती कदम उठा रही है.
- मैरिको: कंपनी को चौथी तिमाही में बेहतर मुनाफे की उम्मीद है, लेकिन उन्होंने माना कि पश्चिम एशिया के हालात और वेजिटेबल ऑयल की बढ़ती कीमतें एक बड़ी चुनौती हैं.
- जुबिलेंट फूडवर्क्स: दबाव के संकेत रेस्तरां सेक्टर में भी दिखने लगे हैं. डोमिनोज इंडिया की ‘लाइक-फॉर-लाइक’ ग्रोथ चौथी तिमाही में मात्र 0.2% रही, जो स्टोर बिक्री में गिरावट की ओर इशारा करती है.