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फोन कर रहा है आपकी जासूसी? ये 6 सेटिंग्स बदलते ही बंद हो जाएगी ट्रैकिंग
क्या आपका Android फोन Google को आपका डेटा भेज रहा है? इस आसान सेटिंग्स जिन्हें बदलकर आप अपनी प्राइवेसी को बेहतर बना सकते हैं और डेटा शेयरिंग को सीमित कर सकते हैं.आजकल कई लोग इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि उनका Android फोन उनका डेटा Google के साथ शेयर कर रहा है. यह समस्या नई नहीं है और समय-समय पर चर्चा में आती रहती है.
आजकल कई लोग इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि उनका Android फोन उनका डेटा Google के साथ शेयर कर रहा है. यह समस्या नई नहीं है और समय-समय पर चर्चा में आती रहती है. हालांकि यह डेटा शेयरिंग फोन को स्मार्ट और पर्सनलाइज्ड बनाती है, लेकिन कुछ लोग अपनी प्राइवेसी को ज्यादा सुरक्षित रखना चाहते हैं. अच्छी बात यह है कि फोन में कुछ सेटिंग्स बदलकर आप यह कंट्रोल कर सकते हैं कि आपका कितना डेटा शेयर होगा और कितना नहीं. इससे आप अपने डेटा पर ज्यादा नियंत्रण रख सकते हैं और अनचाही ट्रैकिंग को कम कर सकते हैं.
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सबसे पहले Web and App Activity सेटिंग होती है. यह आपके सर्च, ऐप इस्तेमाल, ब्राउजिंग और लोकेशन जैसी जानकारी सेव करती है. अगर आप इसे बंद कर देते हैं तो Google आपके हर काम का रिकॉर्ड नहीं रख पाएगा. इससे आपकी ऑनलाइन एक्टिविटी ज्यादा प्राइवेट रहेगी. यह सेटिंग आपके डेटा को ट्रैक करने का सबसे बड़ा जरिया होती है, इसलिए इसे बंद करना प्राइवेसी के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है.
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दूसरी जरूरी सेटिंग Location History है. यह आपके कहां जाने और कब जाने की जानकारी सेव करती है. कई लोग नहीं जानते कि उनका हर मूवमेंट रिकॉर्ड हो रहा है. अगर आप इसे बंद कर देते हैं तो आपकी लोकेशन हिस्ट्री सेव नहीं होगी. इससे आपकी प्राइवेसी और सुरक्षा दोनों बेहतर हो सकती हैं. यह खासकर उन लोगों के लिए जरूरी है जो अपनी लोकेशन शेयर नहीं करना चाहते.
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YouTube History भी एक अहम सेटिंग है. YouTube आपके देखे गए वीडियो और सर्च को लंबे समय तक सेव रखता है. आप इसे ऑटो डिलीट पर सेट कर सकते हैं, जिससे पुराना डेटा अपने आप हट जाएगा. इससे आपकी देखने की आदतें ज्यादा सुरक्षित रहेंगी और अनचाहे सुझाव भी कम मिलेंगे. यह सेटिंग आपकी ऑनलाइन पहचान को सीमित करने में मदद करती है.
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Ad Personalisation एक ऐसी सेटिंग है जो आपके डेटा के आधार पर आपको विज्ञापन दिखाती है. अगर आप इसे बंद कर देते हैं तो Google आपके बारे में कम जानकारी इकट्ठा करेगा और आपको कम टारगेटेड एड्स दिखेंगे. इससे आपकी प्राइवेसी बढ़ेगी और अनावश्यक विज्ञापन भी कम हो जाएंगे. यह सेटिंग उन लोगों के लिए जरूरी है जो बार-बार आने वाले एड्स से परेशान रहते हैं.
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Location Accuracy और Nearby Device Scanning जैसी सेटिंग्स भी आपके फोन की ट्रैकिंग को बढ़ाती हैं. यह Wi-Fi, Bluetooth और नेटवर्क के जरिए आपकी लोकेशन और आसपास के डिवाइस को स्कैन करती रहती हैं. अगर आप इन्हें बंद कर देते हैं तो आपकी लोकेशन ट्रैकिंग काफी हद तक कम हो जाएगी. इससे आपकी सुरक्षा और डेटा कंट्रोल दोनों बेहतर हो सकते हैं.
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Background Data Usage भी एक अहम पहलू है. कई ऐप्स बिना इस्तेमाल के भी बैकग्राउंड में डेटा भेजते और लेते रहते हैं. आप सेटिंग में जाकर इन ऐप्स को Restricted कर सकते हैं, जिससे वे बेवजह डेटा इस्तेमाल नहीं करेंगे. इससे आपका डेटा भी बचेगा और आपकी प्राइवेसी भी मजबूत होगी.