9 साल बाद डॉलर बॉन्ड मार्केट में लौटेगा ICICI Bank, 500 मिलियन डॉलर जुटाने की तैयारी
ICICI Bank करीब 9 साल बाद डॉलर बॉन्ड मार्केट में वापसी की तैयारी कर रहा है. बैंक 5 साल की अवधि वाले डॉलर बॉन्ड इश्यू के जरिए कम से कम 500 मिलियन डॉलर जुटाने की योजना बना रहा है. यह फंड जुटाने की प्रक्रिया RBI की नई स्वैप विंडो सुविधा के तहत होगी.
ICICI Bank: देश के प्राइवेट सेक्टर के बड़े बैंकों में शामिल ICICI Bank करीब 9 साल बाद एक बार फिर डॉलर बॉन्ड मार्केट में उतरने की तैयारी कर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंक कम से कम 500 मिलियन डॉलर जुटाने की योजना बना रहा है. इसके लिए बैंक 5 साल की अवधि वाले डॉलर बॉन्ड जारी कर सकता है. यह फंड जुटाने की प्रक्रिया RBI की नई स्वैप विंडो सुविधा के तहत होगी, जिससे विदेशी मुद्रा में फंड जुटाने की लागत पहले की तुलना में कम हो जाएगी.
कम से कम 500 मिलियन डॉलर जुटाने की तैयारी
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ICICI Bank की योजना कम से कम 500 मिलियन डॉलर जुटाने की है. इसके लिए बैंक 5 साल की अवधि वाले डॉलर बॉन्ड जारी कर सकता है. बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े सूत्रों का कहना है कि डॉलर बॉन्ड जारी करने की तैयारी चल रही है, लेकिन आवश्यक मंजूरियों और प्रक्रियाओं के कारण इसमें 45 से 60 दिन का समय लग सकता है. हालांकि, इस पूरे मामले पर ICICI Bank की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है.
2017 के बाद पहली डॉलर बॉन्ड इश्यू
यदि यह डील पूरी होती है, तो यह दिसंबर 2017 के बाद ICICI Bank की पहली डॉलर बॉन्ड इश्यू होगी. उस समय बैंक ने 10 साल की अवधि वाले बॉन्ड के जरिए 500 मिलियन डॉलर जुटाए थे. उस इश्यू पर 3.80 फीसदी का कूपन तय किया गया था. करीब 9 साल बाद बैंक का दोबारा अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड बाजार का रुख करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि विदेशी बाजार में फंड जुटाने की परिस्थितियां पहले की तुलना में अधिक अनुकूल हो गई हैं.
RBI की नई स्वैप फैसिलिटी से मिलेगा फायदा
इस फंड जुटाने के पीछे सबसे बड़ा कारण RBI की ओर से जून में शुरू की गई नई स्वैप फैसिलिटी है. इस सुविधा के तहत पात्र बैंकों और सरकारी कंपनियों द्वारा लिए जाने वाले External Commercial Borrowings (ECB) को 1.5 फीसदी की निश्चित वार्षिक हेजिंग दर पर सुरक्षित किया जा सकता है. इस पर सेमी-एनुअल कंपाउंडिंग लागू होगा.
नई व्यवस्था से विदेशी मुद्रा में फंड जुटाने की हेजिंग कॉस्ट काफी कम हो जाएगी. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार से डॉलर में कर्ज जुटाना पहले की तुलना में अधिक आकर्षक बन गया है.
HDFC Bank और Axis Bank भी उठा चुके हैं फायदा
ICICI Bank इस सुविधा का लाभ उठाने वाला पहला बैंक नहीं होगा. इससे पहले HDFC Bank जून में नई स्वैप फैसिलिटी का इस्तेमाल करने वाला पहला बैंक बना था. बैंक ने 5 साल की अवधि वाले बॉन्ड के जरिए 750 मिलियन डॉलर जुटाए थे. इसके बाद Axis Bank ने 800 मिलियन डॉलर का ड्यूल-ट्रांच डॉलर बॉन्ड इश्यू जारी किया था.
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