चाबहार पोर्ट: भारत और ईरान के बीच बातचीत जारी, अमेरिकी प्रतिबंध हटने का इंतजार; इंडिया के लिए क्यों जरूरी है यह बंदरगाह?
भारत ने इस पोर्ट के लिए अमेरिका से छह महीने की प्रतिबंध छूट हासिल की थी, जो इस साल 26 अप्रैल को खत्म हो गई थी. भारत ने 13 मई 2024 को ईरान की पोर्ट एंड मरीन ऑर्गनाइजेशन के साथ चाबहार पोर्ट के ऑपरेशन के लिए 10 साल की अवधि का समझौता किया था.

भारत और ईरान चाबहार पोर्ट के मैनेजमेंट को लेकर बातचीत कर रहे हैं. इस बीच अमेरिका, ईरान के साथ शांति वार्ता का एक नया दौर शुरू करने की कोशिश कर रहा है. भारत ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध के हटने का इंतजार कर रहा है, जो एक समझौते के बाद हट सकता है. साथ ही भारत, चाबहार पोर्ट में अपने हितों को सुरक्षित रखने के लिए ईरान के साथ बातचीत करने में भी जुटा हुआ है, ताकि इस व्यवस्था को जल्द से जल्द अंतिम रूप दिया जा सके.
भारत ने इस पोर्ट के लिए अमेरिका से छह महीने की प्रतिबंध छूट हासिल की थी, जो इस साल 26 अप्रैल को खत्म हो गई थी.
सरकार ने संसद में दी जानकारी
सरकार ने शुक्रवार को लोकसभा को बताया गया कि चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट के लिए अमेरिका से मिली शर्तों के साथ प्रतिबंधों से छूट 26 अप्रैल को खत्म हो गई है. सरकार इस घटनाक्रम के असर से निपटने के लिए संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रही है.
कानूनी गारंटी की मांग कर रहा भारत
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ईरान के साथ चाबहार पोर्ट को मैनेज करने के लिए वहां की पोर्ट अथॉरिटी के साथ एक समझौता करने पर बातचीत कर रही है. इस समझौते में यह गारंटी भी शामिल होगी कि जब अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध हटा लिए जाएंगे, तो यह अधिकार वापस भारत को सौंप दिया जाएगा. भारत ईरानी सरकार से कानूनी गारंटी की मांग कर रहा है ताकि दोनों पोर्ट अथॉरिटी के बीच हुए समझौते का पालन किया जा सके.
चाबहार पोर्ट को कब से ऑपरेट कर रहा भारत?
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने ईरान के चाबहार पोर्ट पर शहीद बेहेश्ती टर्मिनल के डेवलपमेंट और ऑपरेशन में भारत की भागीदारी की मौजूदा स्थिति के बारे में पूछे गए सवाल का लिखित जवाब दिया. सिंह ने कहा कि चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट का मकसद अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए जरूरी कनेक्टिविटी देना था. साथ ही मध्य एशिया के साथ भारत के व्यापार और आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देना भी था.
भारत सरकार की कंपनी, इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL), अपनी पूरी तरह से अपनी सब्सिडियरी कंपनी, इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल चाबहार फ्री जोन (IPGCFZ) के जरिए 2018 से इस पोर्ट को चला रही है.
भारत ने पूरी कर ली है प्रतिबद्धता
उन्होंने कहा, ’13 मई, 2024 को IPGL और ईरान के पोर्ट्स एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (PMO) के बीच हुए मुख्य कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के अनुसार, भारत ने इस प्रोजेक्ट के लिए 120 मिलियन अमेरिकी डॉलर की अपनी वित्तीय प्रतिबद्धता पूरी कर ली है. इस रकम की आखिरी किस्त अगस्त 2025 में PMO को ट्रांसफर की गई थी.’
भारत के लिए क्यों जरूरी है चाबहार पोर्ट?
जानकारों का कहना है कि चाबहार पोर्ट भारत की रणनीतिक पहुंच के लिए बहुत अहम है और अगर भारत किसी न किसी रूप में इस पोर्ट में अपनी भूमिका बनाए नहीं रखता है, तो चीन इस पर अपना दावा ठोक सकता है. इतने वर्षों में कई चुनौतियां आने के बावजूद, भारत ने इस पोर्ट में अपनी दिलचस्पी नहीं छोड़ी है.
यह बंदरगाह न केवल भारत की रीजनल कनेक्टिवटी का अहम हिस्सा है, बल्कि अफगानिस्तान और मध्य एशिया–पूर्वी रूस तक भारत की आर्थिक और सामरिक पहुंच का महत्वपूर्ण द्वार भी माना जाता है.
पोर्ट की भूमिका
भारत ने 13 मई 2024 को ईरान की पोर्ट एंड मरीन ऑर्गनाइजेशन के साथ चाबहार पोर्ट के ऑपरेशन के लिए 10 साल की अवधि का समझौता किया था. यह करार इंडियन पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) और ईरान के बीच हुआ था. बंदरगाह ने भारत–अफगानिस्तान आर्थिक सहयोग को विस्तार देने, मानवीय सहायता पहुंचाने जैसी आपूर्तियों में भी अहम भूमिका निभाई है.