Iran War: सरकार का अनुमान ₹75000 करोड़ के घाटे का था, लेकिन तेल कंपनियों का नुकसान 25% से भी कम
सरकार ने बताया था कि ईरान युद्ध की वजह से सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को 75,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है. लेकिन सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों की फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर असर शुरू में सोचे गए अनुमान से काफी कम रहा है.
Highlights
- नुकसान और सरकार के अनुमान के बीच बड़ा अंतर.
- पिछले फाइनेंशियल ईयर में कंपनियां मुनाफे में थीं.
- सरकार का अनुमान 75,000 करोड़ रुपये के नुकसान का था.
पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई में आई रुकावट का असर ग्लोबल मार्केट में दिखा. भारतीय बाजार में भी फ्यूल की कीमतों में इजाफा हुआ, क्योंकि सरकार ने कहा कि कच्चे तेल के इंपोर्ट की लागत बढ़ने से खुदरा कीमतों को बढ़ाने का दबाव था. सरकार ने बताया था कि ईरान युद्ध की वजह से सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को 75,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है. लेकिन सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों की फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर असर शुरू में सोचे गए अनुमान से काफी कम रहा है.
इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने जून तिमाही में कुल मिलाकर 18,149 करोड़ रुपये का नेट लॉस दर्ज किया, जो सरकार के लगभग 75,000 करोड़ रुपये के अनुमान से काफी कम है. ये अंतर सरकार के अनुमान के 25 फीसदी से भी कम है.
भारत पेट्रोलियम
भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने 30 जून, 2026 को खत्म हुई तिमाही (Q1 FY27) के लिए 1,872.70 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट लॉस और 3,962.13 करोड़ रुपये का स्टैंडअलोन नेट लॉस दर्ज किया. इसकी मुख्य वजह मार्केटिंग मार्जिन में कमी थी.
हिंदुस्तान पेट्रोलियम
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (30 जून, 2026 को समाप्त तिमाही) के लिए 11,526.41 करोड़ रुपये का स्टैंडअलोन नेट लॉस दर्ज किया. इसके साथ ही, कंपनी का रेवेन्यू बढ़कर 1,45,126.22 करोड़ रुपये रहा और ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) $23.80 प्रति बैरल का मजबूत स्तर रहा.
इंडियन ऑयल
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ने 31 जुलाई, 2026 को घोषणा की कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (जो 30 जून, 2026 को समाप्त हुई) के लिए उसे 2,661.37 करोड़ रुपये का स्टैंडअलोन नेट लॉस और 1,141.09 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट लॉस हुआ है.
कुल स्टैंडअलोन नेट लॉस
| विवरण | राशि (₹ करोड़) |
|---|---|
| IOC | 2,661.37 |
| BPCL | 3,962.13 |
| HPCL | 11,526.41 |
| तीनों कंपनियों का कुल स्टैंडअलोन नेट लॉस | 18,149.91 |
सरकार का दावा- 74,781 करोड़ का नुकसान
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 2 जुलाई को कहा था कि तीन कंपनियों को जून तिमाही में 74,781 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. पुरी उन सवालों का जवाब दे रहे थे कि क्या ईरान और अमेरिका के बीच कुछ समय के लिए बनी सहमति के बाद ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें अपने पीक से नीचे आने पर सरकार पंप पर कीमतें कम करेगी.
कैसे कम हुआ नुकसान?
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, इंडस्ट्री के अधिकारियों ने कहा कि रिटेल फ्यूल की कीमतों में 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी और केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर टैक्स में लगभग 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती ने युद्ध के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल के असर को काफी हद तक कम कर दिया. LPG की ऊंची कीमतों ने भी कंपनियों को कुकिंग गैस की बिक्री पर हुए नुकसान की भरपाई करने में मदद की.
बैलेंसशीट में बड़ा बदलाव
हालांकि, 18,149 करोड़ रुपये का कुल तिमाही नुकसान एक साल पहले इन कंपनियों के 16,184 करोड़ रुपये के कुल नेट प्रॉफिट के मुकाबले एक बड़ा बदलाव है, लेकिन यह सरकार के अनुमान का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा है.
नुकसान और सरकार के अनुमान के बीच अंतर
ईटी के अनुसार, इंडस्ट्री के अधिकारियों ने कहा कि असल नुकसान और सरकार के अनुमान के बीच बड़ा अंतर फ्यूल की कीमतों से जुड़ी राजनीतिक संवेदनशीलता को दिखाता है. पंप पर कीमतें बढ़ाना या क्रूड ऑयल की कीमतें कम होने पर भी कीमत घटाने की मांगों को न मानना राजनीतिक रूप से मुश्किल होता है.
अधिकारियों ने कहा कि नतीजतन, सरकार अक्सर ऊंची रिटेल कीमतों के लिए जनता की सहमति बनाने के मकसद से तेल कंपनियों की फाइनेंशियल स्थिति के बारे में ज्यादा निराशाजनक बातें कहती है. एक अधिकारी ने कहा कि यह राजनीतिक कम्युनिकेशन का मामला है.
कब बढ़ा वित्तीय मुश्किलों पर जोर?
एक और अधिकारी ने कहा कि मई में राज्यों के चुनावों के बाद सरकार के संदेश देने के तरीके में साफ बदलाव आया. संघर्ष के शुरुआती हफ्तों में, जब कुछ राज्यों में चुनाव हो रहे थे, अधिकारियों ने तेल कंपनियों के नुकसान का ज़िक्र करने से काफी हद तक परहेज किया. चुनाव खत्म होने के बाद कंपनियों की फाइनेंशियल मुश्किलों पर जोर अधिक बढ़ गया.
पिछले फाइनेंशियल ईयर में कंपनियों का मुनाफा
फ्यूल की कीमतें बढ़ने से पहले, तेल मंत्रालय में जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने प्रेस ब्रीफिंग में बार-बार कहा कि तेल मार्केटिंग कंपनियों को हर दिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. तेल मंत्रालय के अधिकारियों ने यह भी तर्क दिया कि जून तिमाही में हुआ नुकसान कंपनियों के FY26 के प्रॉफिट को खत्म कर सकता है. इंडियन ऑयल, BPCL और HPCL ने पिछले फाइनेंशियल ईयर में कुल मिलाकर 77,280 करोड़ रुपये का प्रॉफिट दर्ज किया था.
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