न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों की एंट्री की तैयारी, SHANTI Act के नियमों का ड्राफ्ट तैयार; नियमों पर मंथन जारी

भारत के न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में प्राइवेट निवेश का रास्ता खोलने वाले SHANTI Act 2025 को लागू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. कानून के तहत नियम और रेगुलेशन का पहला ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और संबंधित मंत्रालयों के साथ इस पर चर्चा जारी है. उद्योग जगत से भी सुझाव मांगे गए हैं. नियमों को अंतिम रूप देने में अभी कई महीने लग सकते हैं.

SHANTI Act 2025 को लागू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. Image Credit: money9live

Highlights

  • SHANTI Act 2025 के नियमों का पहला ड्राफ्ट तैयार
  • न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों की एंट्री का रास्ता होगा साफ
  • नियमों को अंतिम रूप देने में लग सकते हैं कई महीने

SHANTI Act 2025: देश के न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. प्राइवेट कंपनियों की एंट्री का रास्ता खोलने वाले SHANTI Act 2025 को लागू करने की दिशा में सरकार ने अहम कदम उठाया है. इस कानून के तहत नियम और रेगुलेशन का पहला ड्राफ्ट तैयार हो चुका है. अब संबंधित मंत्रालयों और विभागों के साथ इस पर चर्चा चल रही है. उद्योग जगत से भी प्रस्तावित नियमों पर सुझाव मांगे गए हैं. हालांकि, पूरे नियमों को अंतिम रूप देने में अभी कुछ महीने और लग सकते हैं. इन नियमों के नोटिफिकेशन के बाद ही SHANTI Act को पूरी तरह लागू किया जा सकेगा.

SHANTI Act के नियमों का पहला ड्राफ्ट तैयार

इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, SHANTI Act 2025 को लागू करने के लिए नियम और रेगुलेशन का पहला ड्राफ्ट तैयार हो चुका है. सरकार अब इस ड्राफ्ट पर संबंधित मंत्रालयों और विभागों के साथ चर्चा कर रही है. इसके साथ ही इंडस्ट्री से भी सुझाव मांगे गए हैं. सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कानून के सभी प्रावधानों को नियमों में स्पष्ट तरीके से शामिल किया जाए.

नियम बनाने में क्यों लग रहा है इतना समय

SHANTI Act की धारा 84 के तहत सरकार को 26 अलग- अलग सेक्टरों के लिए नियम बनाने हैं. इनमें रेडियोएक्टिव मैटेरियल की सेफ्टी, लाइसेंस के लिए आवेदन और प्रक्रिया, लाइसेंस देने की शर्तें और बीमा से जुड़े नियम शामिल हैं. इसके अलावा बोर्ड के सदस्यों के चयन, निरीक्षण, जांच और अपील से जुड़ी प्रक्रियाएं भी तय करनी होंगी. न्यूक्लियर नुकसान से जुड़े दावों के निपटारे के लिए भी नियम बनाए जाएंगे. इन सभी विषयों को स्पष्ट करने के कारण नियम तैयार करने की प्रक्रिया लंबी हो रही है.

रेगुलेशन में भी कई अहम मुद्दे शामिल

SHANTI Act की धारा 85 के तहत सरकार को आठ प्रमुख सेक्टरों में रेगुलेशन तैयार करने हैं. इसमें सुरक्षा मंजूरी की जरूरत वाली एक्टिविटी और रेडियोलॉजिकल इमरजेंसी से जुड़े प्रावधान शामिल हैं. इसके अलावा बोर्ड की बैठकों के समय, स्थान, प्रक्रिया और कोरम से जुड़े नियम भी तय किए जाएंगे. सरकार चाहती है कि नए नियम SHANTI Act के प्रावधानों के साथ पूरी तरह मेल खाएं. इससे भविष्य में नियमों की अलग-अलग व्याख्या या किसी तरह के विरोधाभास की गुंजाइश कम होगी.

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खुलेगा प्राइवेट निवेश का रास्ता

SHANTI Act भारत की न्यूक्लियर एनर्जी नीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. इसका मकसद 2047 तक देश की न्यूक्लियर एनर्जी क्षमता को 100 GW तक पहुंचाने में मदद करना है. कानून के तहत प्राइवेट कंपनियों के साथ विदेशी कंपनियों के लिए भी न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में भागीदारी का रास्ता खुल सकता है. यह कानून न्यूक्लियर एनर्जी के नियमन, निगरानी और विवाद समाधान से जुड़े प्रावधानों को एक ही कानून के तहत लाता है. हालांकि जब तक सरकार नियम और रेगुलेशन को नोटिफाई नहीं करती, तब तक कानून को पूरी तरह लागू नहीं किया जा सकता.